NEET पेपर लीक के खिलाफ 27 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन खत्म कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। वांगचुक ने शुक्रवार सुबह जारी वीडियो संदेश में कहा कि पिछले […]
By UB India News • Patna, Bihar शुक्रवार, 24 जुलाई 2026, 05:14 AM • 8 मिनट read
NEET पेपर लीक के खिलाफ 27 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन खत्म कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
वांगचुक ने शुक्रवार सुबह जारी वीडियो संदेश में कहा कि पिछले दो दिन से सरकार के साथ उनकी लगातार बातचीत चल रही थी। इस दौरान उनकी तीन प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से इन मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया। वांगचुक ने कहा,
सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर केस दर्ज नहीं करने, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने तथा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया।
वांगचुक ने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया है। उनके लिए सबसे अहम बात छात्रों पर कार्रवाई रुकवानी थी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इतना जरूरी नहीं था।
वांगचुक के अनशन खत्म करने पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) फाउंडर अभिजीत दीपके ने खुशी जताई। हालांकि उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार रात वांगचुक को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया।
वांगचुक की 5 बड़ी बातें…
- 65 सांसदों का मिला समर्थन: विभिन्न दलों के करीब 65 सांसद उनसे मिले या उन्होंने संदेश भेजकर भरोसा दिलाया कि वे संसद में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली का मुद्दा उठाएंगे।
- दो दिन तक चली बातचीत के बाद बनी सहमति: सरकार के साथ लिखित आश्वासन को लेकर लगातार दो दिन बातचीत हुई। इसी वजह से उन्होंने अनशन दो दिन और जारी रखा और आखिरकार सहमति बनने पर इसे समाप्त किया।
- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर समझौता नहीं हुआ: सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई आश्वासन नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे अनशन खत्म करने की अनिवार्य शर्त नहीं माना।
- आगे की लड़ाई के लिए जान बचाना जरूरी: उनके सामने दो रास्ते थे, या तो अनशन जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालें या फिर आगे भी आंदोलन जारी रखने के लिए अनशन खत्म करें। हजारों लोगों की अपील के बाद उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।
- छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता: उनके लिए सबसे अहम मुद्दा यह था कि आंदोलन में शामिल छात्रों पर कोई केस न हो। बाकी मुद्दों, जैसे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पर आगे भी दूसरे तरीकों से संघर्ष जारी रहेगा।
मोदी बोले- वांगचुक डॉक्टरों का रूटीन फॉलो करें
पीएम मोदी ने रविवार रात X पोस्ट कर कहा- मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं कि वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन फिर से प्राप्त करें। मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूं कि सोनम जी स्वस्थ रहें।
विपक्षी सांसदों ने भी मिलकर अनशन खत्म करने को कहा था
22 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचा, जहां सोनम वांगचुक भर्ती थे। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के विवेक तन्खा, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, सीपीआई(एम) के जॉन ब्रिटास, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह समेत कई सांसद शामिल थे।
सांसदों ने वांगचुक को एक संयुक्त पत्र सौंपकर अनशन समाप्त करने की अपील की और भरोसा दिया कि NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में मजबूती से उठाया जाएगा। शुरुआत में करीब 55 सांसदों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, बाद में यह संख्या बढ़कर लगभग 65 हो गई।
कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा और अन्य विपक्षी सांसदों ने 22 जुलाई वांगचुक से मुलाकात की थी।
वांगचुक ने 28 जून को भूख हड़ताल शुरू की थी
सोनम वांगचुक इस आंदोलन से 28 जून को जुड़े, जब उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उनकी मांगें थीं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, NEET पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो, परीक्षा प्रणाली में सुधार कर जवाबदेही तय की जाए और पेपर लीक से जुड़े छात्र आत्महत्या मामलों के पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिले।
CJP प्रोटेस्ट के बीच सरकार के संकटमोचक कैसे बन गए JP नड्डा?
भाजपा और सरकार के लिए यह संवेदनशील परिस्थिति है. ऐसी स्थिति में जेपी नड्डा सरकार के लिए सबसे बड़े संकटमोचक बनकर उभरे हैं. जी हां, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों से बातचीत हो या, जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में घायल छात्रों से मुलाकात या फिर मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से दो दौर की बात…हर मौके पर जेपी नड्डा ने अहम भूमिका निभाई है. इतना ही नहीं, सीजेपी के प्रदर्शनकारियों को सरकार की ओर से भरोसा दिलाने के लिए भी जेपी नड्डा ही आगे आए. वैसे भी सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वा कर जेपी नड्डा ने पहली सफलता हासिल कर ली है. अब सीजेपी प्रोटेस्ट खत्म कराने की जिम्मेदारी है.
दरअसल, सोनम वांगचुक के अनशन और कॉकरोच जनता पार्टी के नुमाइंदों से बातचीत करने के लिए जिस तरीके से पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों ने जेपी नड्डा की अगुवाई में बातचीत और समझौते की प्रक्रिया शुरू करवाई, उसे देखकर तो यही लगता है कि जेपी नड्डा सरकार के लिए संकटमोचक साबित हुए हैं. आंदोलन के शुरुआत से अंत तक जेपी नड्डा ही अधिकतर बैठकों और मुलाकातों की अगुवाई करते नजर आए.
जेपी नड्डा कैसे बने सरकार के संकटमोचक
दरअसल, बीजेपी से पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूदा मोदी सरकार में केन्द्रीय स्वास्थ मंत्री की ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं. नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रोटेस्ट चल रहा है. सोम वार को जैसे ही प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जेपी नड्डा ऐक्शन में आ गए. उन्होंने तुरंत बातचीत का चैनल एक्टिवेट कर दिया. अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद हेतु अलग-अलग टीमें बनाई गईं.
सबसे पहले 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के नुमाइंदों से उन्होंने मुलाक़ात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि जो भी मांग वह कर रहे हैं, उसे उचित फ़ोरम पर रखा जाएग. यहां ध्यान देने वाली बात है कि 20 जुलाई का दिन वही दिन था, जब पहली बार प्रदर्शनकारियों का आंदोलन उग्र हो चुका था. सीजेपी प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च का ऐलान किया था. लेकिन सरकार की ओर से बैक चैनल संवाद लगातार जारी था.
घायल प्रदर्शनकारियों से मिले जेपी नड्डा
जब 20 जुलाई को प्रदर्शन में हिंसा हुई. जंतर-मंतर पर पुलिस से लेकर प्रदर्शनकारी सब घायल हुए. उसके अगले दिन जेपी नड्डा ने घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव मेडिकल सहायता का आश्वासन दिया और उनकी मांगों के लिए वार्ता करने की बात कही. मंगलवार की शाम आते-आते सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी और प्रदर्शनकारियों को ये भी संदेश दिया कि जब भी वो चाहें सरकार से मुलाकात कर सकते हैं. नड्डा ने संसद में भी कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है.
आधी रात को मेदांता पहुंचे नड्डा
इसके बाद जेपी नड्डा गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल सोनम वांगचुक से मिलने गए. इस कोशिश से एक ओर प्रदर्शनकारी तो दूसरी ओर सोनम वांगचुक से सरकार का संपर्क हो गया. इस मुलाकात के कुछ समय बाद सोनम वांगचुक की तरफ से चिट्ठी जारी की गई, जिसमें सरकार के समक्ष उन्होंने अपनी मांगे रखीं. पिछले दो दिनों में सरकार ने सोनम वांगचुक की मांगों का सिलसलेवार तरीके से अध्यन किया और इन्हे पूरा करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया.
मोदी का बयान और वांगचुक का अनशन खत्म
इसके बाद ही गुरुवार रात पीएम मोदी का बयान आता है और सोनम वांगचुक जेपी नड्डा की मौजूदगी में अपना अनशन तोड़ देते हैं. इस तरह से अब तक के डेवलपमेंट में जेपी नड्डा ने अहम भूमिका निभाई है. हालांकि, जेपी नड्डा ने आधा काम कर दिया है. जब आंदोलन खत्म होगा, तभी पूरा माना जाएगा. इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सोनम को क्या आश्वासन दिया गया?