CM सम्राट चौधरी ने गुरुवार को गंडक बैराज का हवाई सर्वे किया। इसके बाद वे गंडक बैराज पहुंचे। CM यहां सिर्फ 8 मिनट रुके। इस दौरना उन्होंने अधिकारियों से स्थिति को समझा। आगे की प्लानिंग की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। खतरा अभी टला नहीं है। सभी लोग अपने काम में लगे हैं। भगवान की कृपा रही तो जल्द सब ठीक हो जाएगा।
CM ने आज गंडक का हवाई सर्वे किया। उन्होंने कहा कि नेपाल में आए सैलाब को देखते हुए बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों बगहा, वाल्मीकिनगर, बेतिया एवं मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति का सर्वेक्षण किया। इस दौरान संभावित प्रभावों, आवश्यक एहतियाती उपायों, सुरक्षा एवं राहत-बचाव कार्यों को लेकर प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को पूरी तत्परता के साथ आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा एवं हर संभव सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई बाढ़ के बाद बिहार के गंडक बैराज से सुबह से 3 बार पानी छोड़ा जा चुका है। रात 12 बजे तक नेपाल की ओर से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक, यानी क्यूबिक फीट प्रति सेकेंड पानी छोड़ा गया। बगहा स्थित गंडक बैराज के 36 गेट खोल दिए गए हैं।
रात 12 बजे बैराज से 1 लाख 52 हजार क्यूसेक, सुबह 6 बजे 88 हजार, 7 बजे 92,900 हजार, 10 बजे 104,400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। मतलब बैरेज से हर सेकेंड 79.3 लाख लीटर पानी निकल रहा है। गंडक बैराज पर नेपाल में हुई तबाही का मलबा भी दिखाई दे रहा है। पानी के साथ भैंस, फ्रिज और घरों का सामान भी बहकर आ रहा है।
क्यूसेक (cusec) पानी की प्रवाह दर (Flow Rate) की यूनिट है, पानी की मात्रा की नहीं। 1 क्यूसेक यानी एक सेकेंड में 1 घन फुट बह रहा है। 1 घन फुट पानी करीब 28.32 लीटर होता है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, इस बाढ़ के बाद गंडक में 3 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं, फ्लैश फ्लड आने की भी आशंका है। बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट जारी है। ये जिले पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं।
जानिए कितना छोड़ा गया पानी
जानकारी के मुताबिक तड़के 2.30 बजे डिस्चार्ज घटकर 95,200 क्यूसेक, तीन बजे 88,300 क्यूसेक और 3.30 बजे 83,900 क्यूसेक हो गया। सुबह चार बजे 81,400 क्यूसेक और 4.30 बजे 79,700 क्यूसेक दर्ज किया गया। यानी मध्यरात्रि से महज साढ़े चार घंटे में करीब 70,500 क्यूसेक की कमी दर्ज की गई। सुबह पांच बजे भी डिस्चार्ज 79,700 क्यूसेक रहा, लेकिन इसके बाद पानी फिर बढ़ने लगा। 5.30 बजे 81,800 क्यूसेक और सुबह छह बजे 88,300 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इससे संकेत है कि गंडक के जलप्रवाह में एक बार फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई है।
जल संसाधन विभाग मुस्तैद
जल संसाधन विभाग ने कहा कि बाढ़ से सुरक्षा के लिए विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति को देखते हुए संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बढ़ाई गई है। अधिकारियों को नदी के जलस्तर और डिस्चार्ज पर लगातार नजर रखने तथा संवेदनशील इलाकों में आवश्यक तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल के पानी ने बनाए बाढ़ जैसे हालात
- वैशाली में 400 घर डूबे, राघोपुर में हालत सबसे ज्यादा खराब: राघोपुर प्रखंड के चकसिंगार, वीरपुर, जुरावनपुर बरारी, जुरावनपुर करारी, फतेहपुर, रामपुर, जफराबाद, जहांगीरपुर, शिवनगर सहित कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। इन प्रखंडों के 400 घरों पूरी तरह पानी से घिर आए हैं। मुंगेर में गंडक के पानी से हालत बिगड़ी, निचले इलाके में घुसा पानी, 100 से ज्यादा घर सड़कों पर रह रहे हैं।
- मुंगेर में 100 से ज्यादा घरों में घुसा पानी: गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ने से निचले इलाके के 100 से ज्यादा घरों में पानी घुस आया है। बुधवार रात से गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 50 मीटर नीचे आकर स्थिर हो गया था। आपदा विभाग के अनुसार, गुरुवार सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी स्तर से लगभग 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
- खगड़िया में 50 हजार से ज्यादा घर डूबे: खगड़िया में गंगा और बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 80 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। कोसी और बागमती नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 20 पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूबे हैं।
बिहार में कितना असर डाल सकता है नेपाल से आ रहा पानी, 3 पॉइंट में समझें
नेपाल से आने वाले पानी की चौड़ाई 22 मीटर, गंडक नदी की 200 मीटर
नेपाल की जिस नदी से पानी आने की बात कही जा रही है, उसकी चौड़ाई करीब 22 मीटर है, जबकि गंडक नदी करीब 200 मीटर चौड़ी है। आगे चलकर पानी का दबाव गंडक और कोसी नदी की ओर बंट सकता है।
- गंडक में 3-4 लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमानगंडक नदी में करीब 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी आने का अनुमान है। पानी के तेज बहाव को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
- बैराज पर खतरा नहीं, तेज बहाव चिंतावाल्मीकिनगर गंडक बैराज को करीब 8.5 लाख क्यूसेक पानी का दबाव झेलने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसलिए 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी आने पर फिलहाल बैराज पर खतरे की आशंका नहीं है। सबसे बड़ी चिंता नदी के तेज करंट को लेकर है। ऐसे में नदी में नाव चलाना और जाने से बचने की सलाह दी गई है।
- नेपाल बॉर्डर पर आवाजाही रोकीबगहा में नेपाल बॉर्डर पर ऐहतियात के तौर पर नाकेबंदी जारी है। बिहार के जो लोग नेपाल में फंसे हैं, उन्हें भारत आने दिया जा रहा है। नेपाल के जो लोग बिहार में फंसे हैं, उन्हें नेपाल जाने की अनुमति दी जा रही है। अन्य लोगों की आवाजाही पर रोक जारी है।
कैसे टला बिहार से खतरा?
- भोटे कोशी और त्रिशूली नदी: बाढ़ का पानी सबसे पहले तिब्बत से निकलने वाली भोटे कोशी नदी में आया. भोटे कोशी आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिल जाती है. त्रिशूली नदी मध्य नेपाल की एक प्रमुख नदी है, जिसने इस बाढ़ के सबसे बड़े वेग का सामना किया. इसके बाद नारायणी नदी में ये पानी पहुंचा और फिर गंडक.
- गंडक नदी में नेपाल से पानी रात करीब 8 बजे पहुंचना शुरू हुआ था. इसके बाद नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा. देर रात वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर पानी का डिस्चार्ज करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था. हालांकि अब राहत की खबर है. गंडक नदी का जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है. फिलहाल वाल्मीकिनगर गंडक बराज से करीब 81 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है.
- बताया जा रहा है कि नेपाल की त्रिशूली नदी में बढ़ा पानी नारायणी नदी के रास्ते आगे निकल गया. पानी का बड़ा हिस्सा नारायणी में फैल गया. इससे गंडक में उम्मीद से कम पानी पहुंचा. इसी वजह से बिहार और यूपी में बाढ़ का बड़ा खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है. निचले इलाकों में भी राहत की स्थिति है. नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार और यूपी में अलर्ट जारी किया गया था. प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया था.
- बाढ़ नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा के ऊंचे पहाड़ी इलाके से शुरू हुई. इसका असर रसुवा जिले के टिमुरे और स्याप्रुबेसी इलाके में दिखा.
- ल्हेंडे नदी और भोटे कोसी नदी के ऊपरी हिस्से में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आया.
सुबह करीब 8:30 से 9 बजे के बीच पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा.
- वैज्ञानिकों को आशंका है कि ऊंचे पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा खिसका. इसे आइस एवलॉन्च कहा जाता है. बर्फ और चट्टानों का मलबा ल्हेंडे खोला में गिरा. इससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया.
- नदी में पानी जमा होने लगा और प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बन गई. इसके बाद जमा पानी अचानक टूटकर नीचे की ओर बह निकला. पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर भी बहने लगे.
- वैज्ञानिक इस संभावना की भी जांच कर रहे हैं. आशंका है कि किसी ऊंचाई वाले इलाके में मौजूद ग्लेशियल झील का पानी अचानक बाहर आया हो. इसे GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड कहा जाता है.
हालांकि, अभी यह पक्के तौर पर नहीं कहा गया है कि बाढ़ की वजह GLOF ही थी.
- इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. इससे पहाड़ और बर्फ खिसकने की संभावना जताई जा रही है.
- वैज्ञानिकों को भूकंपीय रिकॉर्ड में कुछ असामान्य संकेत भी मिले हैं. लेकिन अभी भूकंप और बाढ़ के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है.
- वैज्ञानिकों के मुताबिक बाढ़ की गति और उसका स्तर असाधारण था. त्रिशूली नदी में कुछ जगहों पर केवल 30 मिनट में पानी करीब 9 मीटर तक बढ़ गया. मालखू में जलस्तर करीब 7 मीटर बढ़ा. पानी के साथ मलबा और बड़े पत्थर भी तेजी से नीचे आए.
नेपाल का पानी बिहार में मचा सकता है तबाही!
उल्लेखनीय है कि अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ऐसी बाढ़ होती है जो बहुत कम समय में भारी बारिश, बादल फटने, पहाड़ी क्षेत्रों से तेज जलप्रवाह या बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण आती है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री चौधरी ने विशेष रूप से गंडक नदी से जुड़े पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली सहित अन्य संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल से आने वाले पानी की स्थिति पर सतत नजर रखी जाए और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते एहतियाती कदम उठाए जाएं।
NDRF और SDRF की टीमें तैनात
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन माइकिंग के माध्यम से लोगों को लगातार आवश्यक सूचनाएं और संभावित खतरे की चेतावनी देता रहे, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम तैनात रखी जाएं तथा जिला प्रशासन इनके साथ समन्वय स्थापित करके तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक और तकनीकी टीम पूरी तरह सक्रिय रहें तथा किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति में लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।








