क्वाड शिखर सम्मेलन में तमाम मुद्दों के साथ-साथ जिस एक मुद्दे पर खासतौर पर बात की गई, वो था क्लीन एनर्जी.इस मुद्दे पर शिखर सम्मेलन से इतर भारत और अमेरिका के बीच भी बात हुई. दोनों देशों ने इस क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ावा देने पर जोर दिया है. व्हाइट हाउस ने कहा कि साझेदारी के तहत अमेरिका और भारत अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (IBRD) के जरिए एक बिलियन अमेरिकी डॉलर के नए मल्टीलेटरल फाइनेंस को अनलॉक करने के लिए काम कर रहे हैं. इसमें भारत की घरेलू स्वच्छ ऊर्जा सप्लाई चेन निर्माण को बढ़ावा देना शामिल है. यह फंडिंग सौर, पवन, बैटरी, एनर्जी ग्रिड सिस्टम, हाई एफिशिएंसी वाले एयर कंडीशनर और सीलिंग फैन सप्लाई चेन पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रमुख टेक्नालॉजी वर्टिकल के लिए विनिर्माण क्षमता के विस्तार में मददगार हो सकती है.
इसके साथ-साथ ही व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका और भारत साझा राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए स्थायी रूप से प्रतिबद्ध होने की भी बात की. व्हाइट हाउस ने कहा कि हमारे आर्थिक विकास एजेंडे के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में हम क्लीन एनर्जी ट्रांजीशन के लाभ हासिल करने के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं. इसमें हमारी आबादी के लिए उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन, वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में तेजी लाना और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति शामिल है.
इन उद्देश्यों के समर्थन में अमेरिका और भारत स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और घटकों के लिए पूरक अमेरिकी और भारतीय विनिर्माण क्षमता का विस्तार करने और अफ्रीका में साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करने के साथ तीसरे देशों में बढ़े हुए सहयोग के लिए आधार तैयार करने के लिए द्विपक्षीय तकनीकी, वित्तीय और नीतिगत समर्थन को बढ़ाने और विस्तारित करने का इरादा रखते हैं.
भारत हिंद महासागर में प्रमुख शक्ति
सूत्रों के मुताबिक, क्वाड नेताओं ने हिंद महासागर में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भारत की सराहना की. जापानी प्रधानमंत्री किशिदा ने पीएम मोदी की सराहना की और वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट के आयोजन की उनकी पहल का समर्थन किया. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बानीस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत हिंद महासागर में प्रमुख शक्ति है. राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि अमेरिका को हिंद महासागर में भारत के अनुभव और नेतृत्व से सीखने की बहुत-सारी बातें हैं.
भारत को वापस मिले 4000 साल पुराने 297 एंटीक्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय अमेरिका की यात्रा पर हैं और वहां उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात कर ली है. ठीक इसी समय अमेरिका और भारत के गहरे संबंधों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने भारत के 297 एंटीक्स (पुरावशेष) या एंटीक्विटीज को लौटाने का इंतजाम कर लिया है. अमेरिका के भारत से चोरी या तस्करी की गई 297 पुरावशेषों की वापसी के वादे के तहत भारत की इन सांस्कृतिक संपत्ति को जल्द ही वापस लाया जाएगा.
4000 साल पुराने हैं ये एंटीक्स (पुरावशेष)
ये पुरावशेष 4000 सालों की बीच के समय के हैं और 2000 BCE (ईसा पूर्व) से 1900 सदी के दौरान के हैं. ये वस्तुएं भारत के कई हिस्सों की हैं और ज्यादातर पुरावशेष पूर्वी भारत की टेराकोटा कलाकृतियां हैं. इनके अलावा दूसरी पत्थर, मेटल, लकड़ी और हाथीदांत से बनी हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों से चुराई या तस्करी की गई थीं.
पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने देखी एक्जीबिशन
पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान यूएस के विलमिंगटन, डेलावेयर में उनकी बैठक के मौके पर प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति बाइडेन को कुछ चुनिंदा टुकड़े दिखाए गए. प्रधानमंत्री ने इन कलाकृतियों की वापसी में सहयोग के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को धन्यवाद दिया. पीएम मोदी ने कहा कि ये भारत की ऐतिहासिक संस्कृति का हिस्सा होने के साथ इसकी सभ्यता और चेतना के आंतरिक केंद्र का निर्माण करती थीं.
केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के साथ तालमेल बिठाकर वापस लाई जा रही भारत की कीमती वस्तुएं
ये फैसला इस साल पहले ही हो गया था जब 2024 के जुलाई में एक कल्चरल प्रॉपर्टी एग्रीमेंट (सांस्कृतिक संपत्ति समझौते) पर दोनों देशों ने साइन कर लिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र ने जून 2023 में उनकी बैठक के बाद संयुक्त वक्तव्य में इसकी जानकारी दी थी. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग के बाद इसे अमेरिका के ब्यूरो ऑफ एजूकेशनल और कल्चरल अफेयर्स ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के साथ तालमेल बिठाकर इन प्राचीन मूर्तियों, कलाकृतियों और अभिलेखों को भारत को वापस करने का इंतजाम कर दिया है.
भारत को वापस दिए जा रहे खास एंटीक्विटीज को जानें
- 10-11वीं शताब्दी ईसा पूर्व की मध्य भारत की बलुआ पत्थर की अप्सरा
- 15-16वीं सदी के मध्य भारत के ब्रॉन्ज से बने जैन तीर्थंकर
- पूर्वी भारत से तीसरी-चौथी शताब्दी के टेराकोटा फूलदान
- पहली शताब्दी ईसा पूर्व-पहली शताब्दी से जुड़ी दक्षिण भारत की पत्थर की मूर्ति
- 17-18वीं सदी के दक्षिण भारत के कांस्य में भगवान गणेश
- 15-16वीं सदी के उत्तर भारत के बलुआ पत्थर से बनी भगवान बुद्ध की खड़े अवतार की मूर्ति
- 17-18वीं सदी के पूर्वी भारत से कांस्य में भगवान विष्णु
- 2000-1800 ईसा पूर्व की उत्तर भारत की तांबे की मानवरूपी आकृति
- 17-18वीं सदी के दक्षिण भारत के कांसे से बने भगवान कृष्ण,
- दक्षिण भारत के ग्रेनाइट से बने भगवान कार्तिकेय जो 13-14वीं शताब्दी ईसा पूर्व के हैं
भारत-अमेरिका के गहरे संबंधों के बीच 578 कलाकृतियां आईं वापस
साल 2016 के बाद से अमेरिकी सरकार ने बड़ी संख्या में भारत से स्मगलिंग या चोरी हुए पुरावशेषों को लौटाया है. देखिए खास आंकड़े-
जून 2016 में पीएम मोदी की USA यात्रा के समय 10 पुरावशेष लौटाए
सितंबर 2021 में पीएम मोदी की USA यात्रा के दौरान 157 पुरावशेष वापस लौटाने का प्रबंध हुआ
पिछले साल जून में पीएम मोदी की USA यात्रा के दौरान 105 पुरावशेष वापस मिले
साल 2016 से अमेरिका से भारत लौटी सांस्कृतिक कलाकृतियों की कुल संख्या 578 है जो किसी भी देश की भारत को लौटाई गई सांस्कृतिक कलाकृतियों की सबसे बड़ी संख्या है. दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने के लिए ये बड़ा कदम है.








