बिहार में आरजेडी के सीएम फेस और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने अपनी घोषणाओं से सीएम नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. नीतीश कुमार की महिला संवाद यात्रा का प्लान बनकर बदल गया, पर तेजस्वी ने अपनी यात्रा रुक-रुककर जारी रखी. इसी दौरान उन्होंने दो ऐसी घोषणाएं कर दीं, जो नीतीश के गले की हड्डी साबित हो सकती हैं. नीतीश के सामने अब एक ही रास्ता है. वे इसकी काट में उनसे भी लुभावनी योजनाएं घोषित करें. पिछली बार भी तेजस्वी ने सरकारी नौकरी के वादे से कमाल कर दिया था. हालांकि जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार ने अपनी यात्रा के प्लान में बदलाव इस खतरे को भांपते हुए ही किया है. नीतीश जान लेना चाहते थे कि तेजस्वी की झोली में वादों की कितनी और क्या-क्या रेवड़ियां हैं. अब वे अपनी झोली से उनसे भी आकर्षक घोषणाएं कर सकते हैं. तेजस्वी तत्काल कुछ भी देने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन सरकार का प्रमुख होने के नाते नीतीश अपनी घोषणाओं पर तुरंत अमल भी कर सकते हैं.
तेजस्वी यादव के लुभावने वादे
तेजस्वी यादव को विश्वास है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और झारखंड की तरह महिलाओं को नकद देने से उनके वोट झटके जा सकते हैं. हाल ही संपन्न झारखंड और महाराष्ट्र में महिलाओं को कैश बेनिफिट देने का चमत्कार तेजस्वी देख चुके हैं. तेजस्वी यादव को यह भी पता है कि बिहार में नीतीश कुमार की ताकत महिलाएं ही हैं. इसलिए तेजस्वी ने वादा किया है कि उनकी सरकार बनी तो वे बिहार में ‘माई-बहिन मान योजना’ लागू करेंगे. इसके तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए की सम्मान राशि मिलेगी. इससे पहले वे हर उपभोक्ता को 200 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा कर चुके हैं.
नौकरी का वादा रहा था कारगर
तेजस्वी यादव ने पिछले विधानसभा चुनाव में 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा किया था. उनके इस वादे की सीएम नीतीश ने खूब खिल्ली भी उड़ाई थी. नीतीश ने तब कहा था कि इतनी नौकरियों के लिए वे पैसा कहां से लाएंगे! तंज में उन्होंने यह भी कह दिया था कि पैसे क्या अपने पिता से मांगेंगे. हालांकि जब नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ आए तो उन्होंने सरकारी नौकरियों का पिटारा खोल दिया. शिक्षकों की रिकॉर्ड संख्या में नियुक्ति हुई. नियुक्ति का सिलसिला अब भी जारी है, जब नीतीश एनडीए के सीएम हैं. अगले साल तक 12 लाख नौकरियों का नीतीश ने लक्ष्य निर्धारित किया है. नौकरी के वादे पर तेजस्वी ने बड़ी सफलता हासिल की थी. वैसे वे मामूली अंतर से सीएम नहीं बन पाए. तेजस्वी दावा करते हैं कि 17 महीने सरकार में रह कर उन्होंने दिखा दिया कि नौकरी कैसे दी जा सकती है.
महिलाओं पर नीतीश की पकड़
नीतीश कुमार महिला सशक्तीकरण के पहले से ही पैरोकार रहे हैं. इसीलिए अब भी महिलाओं पर उनका जादू बरकरार है. लोकसभा चुनाव में यह दिख भी चुका है. वे तेजस्वी की तरह वादे तो नहीं करते, लेकिन किसी न किसी रूप में वे महिलाओं को लाभ पहुंचाते रहे हैं. छात्राओं के लिए साइकिल, पोशाक के लिए पैसे और अविवाहित लड़कियों के लिए प्रोत्साहन राशि वे सीधे उनके खाते में भेजते हैं. महिलाओं को पंचायत और निकाय चुनावों में उन्होंने 50 प्रतिशत आरक्षण दिया तो सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कीं. महिलाओं को नीतीश कितना मान देते हैं, यह इसी से स्पष्ट है कि उनके कहने पर राजस्व के भारी नुकसान के बावजूद उन्होंने बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी. तेजस्वी के 2500 रुपए वादे के बाद अब उनकी बारी है. संभव है कि उन्होंने तेजस्वी की काट के लिए एक्सरसाइज भी शुरू कर दिया होगा.








