चुनाव आयोग के नियमों में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

कांग्रेस चुनाव आयोग के नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस संबंध में मंगलवार (24 दिसंबर 2024) को एक याचिका दायर की. जल्द ही इस मामले में सुनवाई होगी. बता दें कि केंद्र सरकार ने सीसीटीवी कैमरा और वेबकास्टिंग फुटेज […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 24 दिसंबर 2024, 09:44 AM 3 मिनट read
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चुनाव आयोग के नियमों में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस
Photo: UB India News Archive

कांग्रेस चुनाव आयोग के नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस संबंध में मंगलवार (24 दिसंबर 2024) को एक याचिका दायर की. जल्द ही इस मामले में सुनवाई होगी.

बता दें कि केंद्र सरकार ने सीसीटीवी कैमरा और वेबकास्टिंग फुटेज के साथ-साथ उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे कुछ इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के सार्वजनिक निरीक्षण को रोकने के लिए चुनाव नियमों में बदलाव किया है. सरकार का कहना है कि ऐसा करने के पीछे उसका मकसद इनका दुरुपयोग रोकना है. यह बदलाव शुक्रवार (20 दिसंबर 2024) को किए गए थे.

जयराम रमेश ने एक्स पर दी जानकारी

जयराम रमेश ने याचिका दायर करने के बाद एक्स पर लिखा, “निर्वाचनों का संचालन नियम 1961 में हाल के संशोधनों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट दायर की गई है. चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है. इस पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी है, इसलिए इसे एकतरफा और सार्वजनिक विचार-विमर्श के बिना इतने महत्वपूर्ण नियम में इतनी निर्लज्जता से संशोधन करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. उस परिस्थिति में तो विशेष रूप से नहीं जब वह संशोधन चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने वाली आवश्यक जानकारी तक सार्वजनिक पहुंच को समाप्त करता है. चुनावी प्रक्रिया में सत्यनिष्ठा तेजी से कम हो रही है. उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे बहाल करने में मदद करेगा.”

संशोधन से क्या बदल जाएगा?

चुनाव आयोग (ईसी) की सिफारिश के आधार पर केंद्रीय कानून मंत्रालय ने शुक्रवार को चुनाव संचालन नियम 1961 के रूल 93(2)(ए) में संशोधन किया, ताकि सार्वजनिक निरीक्षण के लिए कागजातों या दस्तावेजों के प्रकार को प्रतिबंधित किया जा सके. यानी इसका मतलब ये हुआ कि अब से चुनाव से संबंधित सभी दस्तावेज जनता के लिए उपलब्ध नहीं होंगे. नए बदलाव में सरकार की ओर से संशोधन के मुताबिक, अब केवल 1961 के चुनाव नियमों के कागजात ही सार्वजनिक निरीक्षण के लिए मौजूद रहेंगे. आसान शब्दों में कहें तो केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय की ओर से अधिसूचित इस बदलाव के साथ अब जनता सभी चुनाव-संबंधी कागजात का निरीक्षण नहीं कर सकेगी. केवल चुनाव नियमों के संचालन से जुड़े कागजात की पहुंच जनता तक होगी.

सीसीटीवी फुटेज के दुरुपयोग को रोकने की भी दलील

इसके अलावा नियम में चुनाव पत्रों का जिक्र किया गया था. जबकि चुनाव पत्र और दस्तावेज के तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का जिक्र नहीं आता. इसी अस्पष्टता को दूर करने और मतदान की गोपनीयता के उल्लंघन और एक व्यक्ति की ओर से AI यानी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके मतदान केंद्र के अंदर सीसीटीवी फुटेज के संभावित दुरुपयोग के गंभीर मुद्दे पर विचार करने के लिए, मतदान केंद्र के अंदर सीसीटीवी फुटेज के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियम में ये बदलाव किया गया है.

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