जदयू संग बीजेपी को क्या है गिला ! बिहार में साथ साथ फिर दिल्ली में नीतीश से क्यों दूर दूर ?

बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और भाजपा में अभी गाढ़ी दोस्ती है. दोस्ती कोई नई नहीं है. वर्ष 2005 से यह साथ बना हुआ है. हां, बीच-बीच में दोस्ती टूटती-जुटती भी रही है. संप्रति दोनों बिहार में साथ मिल कर सरकार चला रहे हैं. भाजपा राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी पार्टी है तो […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 28 दिसंबर 2024, 05:36 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
जदयू संग बीजेपी को क्या है गिला ! बिहार में साथ साथ फिर दिल्ली में नीतीश से क्यों दूर दूर ?
Photo: UB India News Archive

बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और भाजपा में अभी गाढ़ी दोस्ती है. दोस्ती कोई नई नहीं है. वर्ष 2005 से यह साथ बना हुआ है. हां, बीच-बीच में दोस्ती टूटती-जुटती भी रही है. संप्रति दोनों बिहार में साथ मिल कर सरकार चला रहे हैं. भाजपा राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी पार्टी है तो जेडीयू की जमीन बिहार में ही पुख्ता रही है. वैसे जेडीयू ने नार्थ ईस्ट के राज्यों- अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी अपनी जमीन तैयार की थी. पर उसकी साथी भाजपा ने ही वहां इसका नामोनिशान मिटा दिया. झारखंड में भाजपा से मिली दो सीटों पर जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक ने ही जीत दर्ज की. जीतने वाले सरयू राय भी पूर्व में भाजपा की ही राजनीति करते रहे हैं. यूपी में भी जेडीयू चुनाव लड़ने के लिए कसमसाती रही है, लेकिन भाजपा ने मौका नहीं दिया. अब दिल्ली में जेडीयू की इच्छा भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की है, लेकिन भाजपा की दिल्ली इकाई ने जेडीयू को मौका देने से मना कर दिया है. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अब जेडीयू को दिल्ली में जमीन देने पर फैसला करना है. वैसे 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू को तीन सीटें देकर भाजपा आजमा चुकी है. जेडीयू का एक भी उम्मीदवार नहीं जीत पाया था. बहरहाल, भाजपा के तेवर से ऐसा लगता है कि वह जेडीयू को बिहार से बाहर जमीन देने के मूड में नहीं है.

दिल्ली में जेडीयू को सीटें नहीं देगी भाजपा!
कुछ ही दिनों पहले जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने प्रेस कान्फ्रेंस कर बताया कि भाजपा के साथ मिल कर जेडीयू दिल्ली में चुनाव लड़ेगा. सीटों की संख्या भाजपा से बातचीत कर तय होगी. जेडीयू नेताओं ने जिस तरह आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को निशाने पर लिया, उससे साफ था कि वे एनडीए में रह कर ही चुनाव लड़ने के पक्षधर हैं. पर, भाजपा की दिल्ली इकाई ने जेडीयू की डिमांड की यह कह कर हवा निकाल दी है कि उसे सीटें देना पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित होगा. तर्क यही है कि पिछली बार तीन सीटें देकर कोई फायदा नहीं हुआ था. वहां आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीत गए थे. इसलिए भाजपा को लगता है कि जेडीयू के साथ गठबंधन का कोई फायदा नहीं होने वाला.

पूर्वांचली वोटरों से जेडीयू को है काफी आस
दिल्ली में बड़े पैमाने पर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग रहते हैं. बंगाल में इन्हें बिहारी, नार्थ ईस्ट में पूरबिया तो दिल्ली में इन्हें पूर्वांचली कहा जाता है. नौकरी और पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली पहुंचे ये लोग दिल्ली विधानसभा की 17 सीटों पर प्रभाव रखते हैं. दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों में इनकी बसाहट है. दिल्ली की 1797 कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले 80 से 90 प्रतिशत लोग पूर्वांचल के हैं. विकासपुरी, द्वारका, मटियाला, मॉडल टाउन, बुराड़ी, करावल नगर, सीमापुरी, बादली, किराड़ी, नांगलोई, उत्तम नगर, पटपड़गंज, लक्ष्मी नगर, संगम विहार, बदरपुर, पालम, देवली, राजेंद्र नगर जैसी विधानसभा सीटों पर पूर्वांचलियों का प्रभाव है. इन सीटों पर उम्मीदवार की जीत-हार का फैसला इन्हीं लोगों के हाथ होता है. इन्हीं में तीन सीटें बुराड़ी, किराड़ी और सीमापुरी सीटें पिछली बार समझौते में भाजपा ने जेडीयू को दी थी.

झारखंड में मांगी 10 सीटें तो मिलीं सिर्फ 2
कुछ महीने पहले ही हुए झारखंड विधानसभा के चुनाव में भी जेडीयू ने एनडीए फोल्ड में रह कर चुनाव लड़ा था. जेडीयू पहले 10 सीटों की मांग कर रहा था, लेकिन भाजपा ने सिर्फ दो सीटें ही दीं. उनमें भी एक सीट तो जेडीयू की सिटिंग सीट थी. निर्दलीय विधायक सरयू राय के जेडीयू ज्वाइन करने से जमशेदपुर पूर्वी सीट जेडीयू की हो गई थी. भाजपा ने वह सीट सरयू राय से ले ली और उन्हें उसके बदले जमशेदपुर पश्चिमी की सीट दी. जेडीयू से सिर्फ सरयू राय ने ही जीत दर्ज की. भाजपा को झारखंड का सबक भी याद है. दो सीटें मिलने से नीतीश कुमार की नाराजगी भी नजर आई. उन्होंने बिहार से ही अलग होकर बने झारखंड में न अपने उम्मीदवारों का चुनाव प्रचार किया, बल्कि एनडीए से भी दूर ही रहे.

अरुणाचल-मणिपुर में जेडीयू के विधायक टूटे

भाजपा ने आरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में जेडीयू के विधायकों को तोड़ लिया था. अरुणाचल प्रदेश में जब जेडीयू के विधायक भाजपा ने तोड़े, उस वक्त दोनों बिहार में साथ-साथ सरकार चला रहे थे. पहले भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के 6 में पांच विधायकों को तोड़ा था. बाद में मणिपुर के जेडीयू विधायक को भी अपने पाले में कर लिया. इससे भी यह साबित होता है कि भाजपा बिहार से बाहर जेडीयू को जमीन नहीं देना चाहती. दिल्ली में अगर जेडीयू की इच्छा पर पानी फिर गया, जैसे कि संकेत मिल रहे हैं, तो यह बात पक्के तौर पर मान लेनी होगी कि जेडीयू को बिहार तक ही सिमटा कर भाजपा रखना चाहती है.

बिहार में जेडीयू-भाजपा के रिश्ते ठीक नहीं?
बिहार में भी भाजपा और जेडीयू के रिश्ते की डोर अब पहले की तरह मजबूत नहीं रही. नीतीश कुमार दोस्ती में ईमानदारी का इजहार तो करते रहे हैं कि पहले की गलती नहीं दोहराएंगे. एनडीए में ही बने रहेंगे. पर, भाजपा को शायद उनसे मिले अनुभव निश्चिंत नहीं रहने देते. समय-समय पर नीतीश के दगा देने का संशय भाजपा नेताओं के मन में अब भी बना हुआ है. इस संशय को हवा आरजेडी के नेता देते रहते हैं. तेजस्वी यादव कभी नीतीश के गलत पार्टी के संसर्ग में होने पर अफसोस जताते हैं तो उनकी ही पार्टी के विधायक भाई वीरेंद्र जल्द ही सियासी खेल की बात कह कर नीतीश कुमार को संदिग्ध बना देते हैं.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰