मामला तो सिर्फ बड़ा भाई बने रहने का है…………….

बिहार में बीते 20 दिनों से सियासी तापमान बढ़ा हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं. इस बीच कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं, जिससे बड़े उलट-फेर की आशंका लोग जताने लगे हैं. इस बीच बिहार में इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व करने वाले आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार के लिए […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 6 जनवरी 2025, 05:54 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
मामला तो सिर्फ बड़ा भाई बने रहने का है…………….
Photo: UB India News Archive

बिहार में बीते 20 दिनों से सियासी तापमान बढ़ा हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं. इस बीच कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं, जिससे बड़े उलट-फेर की आशंका लोग जताने लगे हैं. इस बीच बिहार में इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व करने वाले आरजेडी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार के लिए राजद का दरवाजा खोले रखने की बात नववर्ष के पहले ही दिन कह कर सबको चौंका दिया. लालू के ऑफर को लेकर बाद में उनके बेटे और बिहार के पूर्व डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव को सफाई देनी पड़ी कि ऐसी बात नहीं है. अब इंडिया ब्लॉक में नीतीश कुमार को रखने पर तालाबंदी हो चुकी है. लालू यादव ने 18 जनवरी को कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर आशंकाओं और कयासों को और हवा दे दी है. यह सब तब हो रहा है, जब नीतीश ने एनडीए में ही बने रहने की प्रतिबद्धता कई बार दोहराई है. शनिवार को भी उन्होंने गोपालगंज में साफ-साफ कहा कि वे पिछली गलती अब नहीं करेंगे.

16 दिसंबर से बढ़ा है सियासी तापमान
बीते साल 2024 के आखिरी महीने दिसंबर की 16 तारीख को एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल- आप नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे या फिर महाराष्ट्र की तरह कोई भी फेस नहीं होगा?- का जवाब दिया. शाह शायद सवाल का मकसद समझ गए थे. इसलिए उन्होंने साफ कहा- ‘देखो भाई, आप कितना भी चाहो एनडीए में दरार नहीं होने वाली है…. देखिए इस तरह का मंच पार्टी के डिसिजन लेने के लिए या बताने के लिए नहीं होता है. मैं पार्टी का डिसिप्लिन्ड कार्यकर्ता हूं. पार्टी पार्टिलियामेंट्री बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी और फैसला लिया जाएगा. उसी तरह यह मुद्दा जेडीयू में भी विचार किया जाएगा. दोनों पार्टयों के बीच बातचीत के बाद तय होगा उसे आपको बता दिया जाएगा.’

नीतीश कुमार की चुप्पी से बढ़ा सस्पेंस
नीतीश कुमार चूंकि उसके बाद कभी मीडिया से मुखातिब नहीं हुए, इसलिए उनका पक्ष सामने नहीं आ पाया. इससे कयास लगने लगे कि अमित शाह के बयान से वे नाराज हैं. संयोग से अस्वस्थता के कारण उन दिनों बिहार में चल रहे मेगा इवेंट- बिहार कनेक्ट में भी नीतीश नहीं पहुंचे. लोगों से दो दिनों तक मिलना-जुलना बंद कर दिया. उनके अस्वस्थ होने की जानकारी भी आधिकारिक तौर पर नहीं आई. मीडिया ने सूत्रों के सहारे यह जानकारी सार्वजनिक की. दो दिनों की अस्वस्थता के बाद जब वे प्रगति यात्रा पर निकले, तब लोगों को पहली बार प्रत्यक्ष तौर पर पता चला कि वे स्वस्थ हैं. इस बीच वे दो दिनों की यात्रा पर दिल्ली गए, पर एक दिन बाद ही लौट आए. शोर मचा कि वे पीएम मोदी से भी मिलेंगे. जेपी नड्डा से भी मिलने की खबरें चलीं. पर, वे किसी से नहीं मिले, सिवा दिवंत भूतपूर्व पीएम मनमोहन सिंह के परिजनों के, जहां वे उन्हें शोक जताने पहुंचे थे.

लालू ने दरवाजा खोलने की बात कही
नीतीश कुमार की मीडिया से दूरी उनकी चुप्पी मान ली गई. टीवी चैनल के कार्यक्रम से दिल्ली दौरा तक में इनकी नाराजगी तलाशी गई. इधर लालू यादव द्वारा दरवाजा खोले रखने वाले बयान को भी नीतीश की पिछली गलती से जोड़ा जाने लगा, जिससे वे कई बार अपने अंदाज में इनकार कर चुके हैं. अमित साह के कार्यक्रम और मनोहर खट्टर को बिहार का प्रभारी बनाए जाने को भी भाजपा-जेडीयू के बीच बढ़ती दूरी से जोड़ दिया गया. और तो और, आरिफ मोहम्मद खान को राज्यपाल बनाए जाने को भी भाजपा की बिहार के लिए रणनीतिक चाल माना जाने लगा।

जेडीयू के अंदरखाने की खबर है कि उसे विधानसभा चुनाव में 122 सीटें चाहिए. भाजपा को 121 सीटें देकर बिहार में जेडीयू उसे छोटा भाई बनाए रखना चाहती है. लोकसभा वाला फार्मूला जेडीयू लागू करना चाहती है, जिसमें एक सीट अधिक लेकर भाजपा पहली बार बिहार में बड़ा भाई बन गई थी. नीतीश ने अपने अपमान का यह घूंट इसलिए पी लिया था कि भाजपा की ही मदद से वे सीएम हैं. दूसरा कारण भी था. वे विधानसभा में बराबरी पर भी तैयार हो जाते, पर भाजपा से उन्हें और भी अधिक सीटों पर लड़ना है. आप आश्चर्य करेंगे कि यह कैसे होगा.

असल खेल यही है. जेडीयू ने एक फार्मूला ऐसा तैयार किया है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. जेडीयू ने जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को अपने हिस्से से सीटें देने की सोची है. मांझी के अभी चार विधायक हैं. उपेंद्र कुशवाहा शून्य पर हैं. जेडीयू उन्हें 10 सीटों के भीतर ही सिमटा लेगा. चिराग पासवान से निपटने की जिम्मेदारी जेडीयू ने भाजपा को दे दी है. तर्क है कि पिछली बार चिराग से जेडीयू की अनबन हो गई थी.

JDU की योजना-चिराग से BJP निपटे
जेडीयू को यह भी अंदाजा है कि चिराग ज्यादा सीटें मांगेंगे. चिराग पासवान बिहार की राजनीति करने की अपनी इच्छा का इजहार भी कर चुके हैं. इसके लिए उन्हें ज्यादा सीटें चाहिए. चिराग कम से कम 30-40 सीटें तो मांगेंगे ही. ऐसे में भाजपा की सीटें अपने आप घट जाएंगी. दूसरी ओर मांझी और कुशवाहा को 8-10 सीटों में निपटा कर जेडीयू अकेले 110-115 सीटों पर लड़ना चाहता है. ऐसा हुआ तो महाराष्ट्र एपिसोड की पुनरावृत्ति का खतरा ही खत्म हो जाएगा. चिराग को भाजपा एक सीमा तक समझा सकती है. चिराग अपना अस्तित्व खतरे में डालना कत्तई नहीं चाहेंगे. वे तो विस्तार के मूड में हैं. अड़ कर उन्होंने बंजर पड़ी झारखंड में एक सीट से सियासी जमीन बना ली. बिहार तो उनका पैतृक राज्य है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰