बिहार की सियासत में ‘आरसीपी टैक्स’ की खूब चर्चा होती रही है. यह तब और सुर्खियों में आ गया था जब वर्ष 2017-18 में वर्तमान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसका विशेष तौर पर जिक्र किया था. उनके ‘आरसीपी टैक्स’ का जिक्र करते ही बिहार की सियासत में खलबली मच गई थी. तब तेजस्वी यादव ने कहा था कि बिहार में अधिकारी कितनी भी गलती कर ले, मामला कितना भी गंभीर हो, लेकिन उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता, क्योंकि उसने ‘आरसीपी टैक्स’ देने का काम किया है. तेजस्वी यादव का यह बयान काफी चर्चित रहा था क्योंकि उनका सीधा निशाना सीएम नीतीश के करीबी रहे एक नेता पर था और उन्होंने वसूली की बात की थी. अब एक बार फिर तेजस्वी यादव के एक बयान ने खलबली मचा दी है. उन्होंने इस बार ‘डीके टैक्स’ की चर्चा की है. तेजस्वी यादव के इस बयान से बिहार की राजनीति में नई चर्चा छिड़ गई है और अंदर ही अंदर खलबली भी मच गई है. लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह ‘डीके टैक्स’ है क्या?
पहले तेजस्वी यादव का वह बयान जानते हैं जिसमें उन्होंने ‘डीके टैक्स’ की चर्चा की है. दरअसल, शुक्रवार 10 जनवरी को मीडियाकर्मियों से बातचीत में तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, बिहार में न तो डीजीपी की चल रही है और ना ही मुख्य सचिव की. अब तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी नहीं चल रही है. आज हालात ऐसे हैं कि रिटायर्ड अधिकारी बिहार चला रहे हैं. बिहार में चलता है तो सिर्फ ‘डीके टैक्स’. बिहार में पूरी तरह से वसूली हो रही है. अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में हेरा-फेरी का खेल चल रहा है. काबिल अधिकारियों को साइड लाइन कर दिया जा रहा है. बिहार में अब केवल ‘वसूली गैंग’ चल रहा है.
तेजस्वी यादव ने किनकी ओर किया इशारा?
तेजस्वी यादव ने आगे कहा, बिहार में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है. यहां दुर्भाग्यपूर्ण चीजें हो रही हैं. 2018 के बाद बिहार में सबसे बड़ा पद डीजीपी या फिर मुख्य सचिव का पद महज दिखावटी रह गया है, बल्कि वह सजावट के लायक भी नहीं रह गया है. जो काबिल अधिकारी हैं, जो परफॉर्मर हैं, चाहे वह आईएएस हो या फिर आइपीएस, ऐसे करीब 90 प्रतिशत अधिकारियों को शंटिंग पोस्ट पर डाल दिया गया है.हालांकि, तेजस्वी यादव ने ‘डीके टैक्स’ का नाम जरूरी लिया, लेकिन उस पूर्व अधिकारी का नाम नहीं बताया.
‘डीके टैक्स’ को लेकर इस अधिकारी की चर्चा!
बता दें कि तेजस्वी यादव इससे पहले ‘आरसीपी टैक्स’ की बात करते थे. आरसीपी सिंह भी पूर्व आईएएस अधिकारी रहे थे और नीतीश कुमार के साथ उनकी करीबी किसी से छिपी नहीं थी. बाद में दोनों में अलगाव हुआ और आरसीपी सिंह बीजेपी में शामिल हो गए थे. अब ‘आरसीपी टैक्स’ की जगह ‘डीके टैक्स’ की बात हो रही है तो लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन हो सकते हैं? राजनीतिक हलकों में इसको लेकर चर्चा है कि अंग्रेजी के ‘डी’ लेटर से शुरू होने वाले नाम के एक सरकारी अधिकारी जो सीएम नीतीश कुमार के पसंदीदा हैं और उनके साथ ये साये की तरह साथ नजर आते हैं, वह दीपक कुमार हैं. हालांकि, तेजस्वी यादव का इशारा इन्हीं की ओर है या नहीं इसकी फिलहाल कोई पुष्टि नहीं है .








