रुपया रोज बना रहा गिरने का रिकॉर्ड…

विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FPI Selling) हो या कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा (Crude Oil Price), इसका असर शेयर बाजार के साथ-साथ करेंसी मार्केट पर भी साफ दिखाई देता है. फिलहाल की बात करें, तो एक ओर जहां रोजाना Stock Market टूट रहा है, तो इंडियन करेंसी रुपया (Rupee) भी हर रोज ही गिरने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 13 जनवरी 2025, 05:21 AM 5 मिनट read
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रुपया रोज बना रहा गिरने का रिकॉर्ड…
Photo: UB India News Archive

विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FPI Selling) हो या कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा (Crude Oil Price), इसका असर शेयर बाजार के साथ-साथ करेंसी मार्केट पर भी साफ दिखाई देता है. फिलहाल की बात करें, तो एक ओर जहां रोजाना Stock Market टूट रहा है, तो इंडियन करेंसी रुपया (Rupee) भी हर रोज ही गिरने का रिकॉर्ड बना रही है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार रुयया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे टूटकर लाइफ टाइम लो-लेवल (Rupee Life Time Low) पर पहुंच गया. आइए समझते हैं कि आखिर इसमें गिरावट का आम आदमी पर क्यो असर होगा?

इकोनॉमी के लिए ठीक नहीं रुपये में गिरावट
रुपये में लगातार जारी गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए अच्छी खबर नहीं है. सोमवार को अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले रुपया 23 पैसे टूटकर 86.27 के स्तर पर आ गया, जो कि इंडियन करेंसी का लाइफ टाइम लो लेवल है. अगर हालिया गिरावट पर गौर करें, तो बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को Rupee 18 पैसे टूटकर 86.04 प्रति डॉलर के स्तर पर क्लोज हुआ था, जबकि इससे पिछले दिन भी ये फिसलकर डॉलर के मुकाबले 85.86 पर बंद हुआ था. किसी भी देश की करेंसी में गिरावट न केवल सरकार पर, बल्कि आम जनता पर भी विपरीत असर डालती है.

क्यों टूटता जा रहा रुपया?
अब बताते हैं कि आखिर रुपया क्यों टूटता जा रहा है और हर रोज गिरने का नया रिकॉर्ड बना रहा है. फिलहाल इसके पीछे कई कारण नजर आ रहे हैं. इसमें अमेरिकी ब्याज दरों में कम कटौती की संभावना के साथ ही सबसे बड़ा हाथ विदेशी निवेशकों की लगातार जारी बिकवाली का माना जा सकता है, जिसने न केवल बाजार पर दबाव बढ़ाने का काम किया है, तो वहीं रुपये पर भी बुरा असर डाला है. दरअसल, फॉरेन इन्वेस्टर्स दुनिया भर के बाजरों से पैसे निकाल रहे हैं और मजबूत होते डॉलर के चलते अमेरिकी बाजारों में डाल रहे हैं. भारत की अगर बात करें, तो यहां के बाजारों में बिकवाली तेज नजर आई है.  इसका असर Rupee पर गिरावट के रूप में साफ दिख रहा है.

30 साल बाद 1 करोड़ रुपये की वैल्‍यू कितनी होगी?

इसके अलावा अन्य कारणों की बात करें, तो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी इसके पीछे की वजह मानी जा सकती है. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा 20 जनवरी को सत्ता संभालने के बाद लिए जाने वाले संभावित फैसलों का दबाव भी भारतीय करेंसी पर दिख रहा है.

कमजोर रुपये का आप पर क्या असर?
किसी भी देश की करेंसी के कमजोर होने के कई साइड इफेक्ट होते हैं. इसे उदाहरण से समझें कि कमजोर होते रुपये से आपके ऊपर क्या असर होने वाला है? तो मान लीजिए अगर आपका कोई बच्चा किसी अन्य देश में पढ़ाई कर रहा है और आप उसे भारत से पैसे भेज रहे हैं, ऐसी स्थिति में आपको नुकसान होने वाला है. चूंकि अमेरिकी डॉलर को ग्लोबल करेंसी का दर्जा प्राप्त है और यह लगातार मजबूत हो रहा है, ऐसे में आप जो रुपये में भेजेंगे, वह डॉलर में कन्वर्ट होने पर कम वैल्यू का रह जाएगा. इस कारण आपको अब पहले की तुलना में अधिक रुपये भेजने होंगे.

यही नहीं अगर आपका कोई परिजन या रिश्तेदार किसी अन्य देश से आपको पैसे भेजता है, तो आपको फायदा होने वाला है. भेजी गई वही पुरानी रकम में अब आपको अब ज्यादा रुपये मिलेंगे. अगर आप कारोबार करते हैं तो असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका बिजनेस इम्पोर्ट बेस्ड है या एक्सपोर्ट बेस्ड. एक्सपोर्ट करने वालों को कमजोर रुपये से फायदा होने वाला है, जबकि इम्पोर्ट करने वालों को अब पुरानी मात्रा में ही माल मंगाने के लिए ज्यादा रुपये भरने होंगे.

महंगाई बढ़ने का बढ़ जाता है जोखिम
जैसा कि बताया जब रुपया गिरता है, तब आयात महंगा हो जाता है, जबकि निर्यात सस्ता हो जाता है. मतलब साफ है कि सरकार को विदेशों से सामान खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं. उदाहरण के तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को देखें, तो भारत अभी अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (करीब 80%) आयात करता है, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने पर कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ जाता है और सरकार को ज्यादा पेमेंट करनी होती है. इसका असर ये होगा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. अगर कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर आम जनता पर महंगाई के रूप में पड़ता है.

 

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