बांग्लादेश में इस्लामिक जनरल बनाना चाहते हैं मोहम्मद यूनुस !

बीते साल 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार को हटाए जाने के बाद बांग्लादेश अनिश्चित चौराहे पर खड़ा है। हसीना के नेतृत्व में 16 साल तक तेजी से विकास के लिए जाना जाने वाला बांग्लादेश एक अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य से जूझ रहा है। देश में सत्ता संघर्ष के साथ ही इस्लामिक कट्टरपंथ तेजी से […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 29 जनवरी 2025, 06:15 AM 4 मिनट read
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बांग्लादेश में इस्लामिक जनरल बनाना चाहते हैं मोहम्मद यूनुस !
Photo: UB India News Archive

बीते साल 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार को हटाए जाने के बाद बांग्लादेश अनिश्चित चौराहे पर खड़ा है। हसीना के नेतृत्व में 16 साल तक तेजी से विकास के लिए जाना जाने वाला बांग्लादेश एक अस्थिर राजनीतिक परिदृश्य से जूझ रहा है। देश में सत्ता संघर्ष के साथ ही इस्लामिक कट्टरपंथ तेजी से पैर पसार रहा है। इन सबके बीच मोहम्मद यूनुस के राज में पाकिस्तान की आईएसआई भी सक्रिय हो गई है। शेख हसीना के वफादारों की जान पर बनी हुई है, इसके बावजूद उनमें से कुछ छिपकर विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देने में सफल हुए हैं।

शेख हसीना को हटानए जाने को उनके वफादार इस्लामिक सैन्य तख्तापलट बताते हैं। हाल ही में हसीना के एक पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल ने एक इंटरव्यू में सेना प्रमुख जनरल वकर उज जमान और देश की खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों पर ‘इस्लामिक आतंकवादियों और सेना’ द्वारा संयुक्त तख्तापलट में सहयोग का आरोप लगाया।

बांग्लादेश सेना प्रमुख को घेर रहे यूनुस

हालांकि, विशेषज्ञ शेख हसीना विरोधी आंदोलन में इस्लामिक कट्टरपंथियों और पाकिस्तान की आईएसआई की भूमिका स्वीकार करते हैं लेकिन बांग्लादेश सेना प्रमुख को निशाने पर लिए जाने को खतरनाक बताते हैं। यूनुस और उनके इस्लामिक सहयोगी यही चाहते हैं। यूरेशियन टाइम्स में लिखे एक लेख में सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने कहा है कि अगर जनरल वकर उज जमान इस्लामिक कट्टरपंथियों, जेहादियों और खिलाफत समर्थकों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में विफल होते हैं तो बांग्लादेश की सेना को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

इसके साथ ही जनरल वकर उज जमान को अंतरिम सरकार की कैबिनेट से जेहादियों, हिज्ब उत तहरीर और हिफाजत ए इस्लाम जैसे समूहों के सदस्यों को अपने मंत्रिमंडल से बाहर निकालने के लिए मजबूर करने के लिए मोहम्मद यूनुस पर दबाव बनाने की जरूरत है। इसमें कहा गया है कि यूनुस भी सेना को बदनाम करने की कोशिश में जुटे हैं। अगर यूनुस और उनके सहयोगी सैन्य अधिकारियों पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाने में सफल हो जाते हैं तो सेना के लिए नतीजे विनाशकारी हो सकते हैं।

बांग्लादेश सेना प्रमुख के तख्तापलट का प्लान

लेख में कहा गया है कि यूनुस और उनके साथ बांग्लादेश सेना और डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलीजेंस (DGFI) को खत्म करके उसी जगह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी आर्मी (IRA) लाने का लक्ष्य रखते हैं। ऐसा लगता है कि बांग्लादेश सेना प्रमुख फंस गए हैं। यूनुस के कुछ सहयोगियों ने सेना प्रमुख पर अवामी लीग के भ्रष्ट नेताओं को देश से बाहर भेजने में मदद का आरोप लगाया है। यह साफ तौर पर जनरल जमान को कमजोर करने और उनकी जगह किसी ऐसे को लाने के छिपे एजेंडे को दिखाता है, जो पाकिस्तान और जेहाद समर्थक है।

भारत के लिए खतरे की घंटी

रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई भी सक्रिय हो गई है। इसी जनवरी में आईएसआई प्रमुख ने ढाका की गुप्त यात्रा की थी। आईएसआई भारत को अस्थिर करने के इरादे से बांग्लादेश में अपने ठिकानों और ऑपरेशन को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रही है। इसमें उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो संभावित रूप से भारतीय विद्रोही समूहों के लिए प्रशिक्षण मैदान के रूप में काम कर सकते हैं। शेख हसीना ने भारत विरोधी विद्रोही समूहों के ठिकानों को नष्ट कर दिया था।

आईएसआई के एजेंडे में उन रणनीतिक स्थानों पर नियंत्रण हासिल करना शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल 1971 में देश की आजादी से पहले किया जाता था। शुरुआत में वे कॉक्स बाजार, उखिया, टेकनाफ, मौलवी बाजार, हबीगंज, शेरपुत पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईएसआई और अल-कुद्स के 67 प्रशिक्षित गुर्गों ने बांग्लादेश में हिज्ब उत तहरीर, हरकर-उल-जेहाद (हूजी), अंसार अल-इस्लाम, हिफाजत-ए-इस्लाम और अन्य इस्लामी आतंकवादी समूहों के सदस्यों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।

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