बिहार में चुनावी संग्राम से पहले गठबंधन में जंग !

बिहार विधान सभा चुनाव 2025 को लेकर अभी भले काफी वक्त है, पर जिस तरफ से पार्टी नेतृत्व ने दावेदारी का पहाड़ खड़ा करना शुरू कर दिया है, उससे लगने लगा है कि चुनाव जल्द होने वाला है। राहत यह है कि सीटों की जंग केवल महागठबंधन में ही नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर भी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 4 फरवरी 2025, 06:40 AM 4 मिनट read
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बिहार में चुनावी संग्राम से पहले गठबंधन में जंग !
Photo: UB India News Archive

बिहार विधान सभा चुनाव 2025 को लेकर अभी भले काफी वक्त है, पर जिस तरफ से पार्टी नेतृत्व ने दावेदारी का पहाड़ खड़ा करना शुरू कर दिया है, उससे लगने लगा है कि चुनाव जल्द होने वाला है। राहत यह है कि सीटों की जंग केवल महागठबंधन में ही नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर भी परवान पा रहा है। यह दावेदारी आगामी विधान सभा चुनाव में इसलिए महत्वपूर्ण है कि दावे करने वाले जातीय क्षत्रप हैं। ये सब अपनी हिस्सेदारी के पीछे अपरोक्ष रूप से जातीय संख्या का आईना भी दिखा रहे हैं। इस कड़ी में कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह, लोजपा(आर) के केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संस्थापक जीतन राम मांझी के बाद अब वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी शामिल हो चुके हैं।

ऐसा क्या कहा मुकेश सहनी ने?

तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के बीच लगातार बेहतर बॉन्डिंग के बीच अब एक नया ट्विस्ट आ गया। यह ट्विस्ट बना सीटों की हिस्सेदारी। अपरोक्ष रूप से ही पर मुकेश सहनी ने नंबर गेम तो खेल ही डाला। बड़े ही सलीके से सिवान की जनसभा में कह डाला कि विधान सभा में अब चार नहीं वीआईपी के चालीस विधायक होंगे।

मतलब साफ है कि 40 से ज्यादा सीटों पर तो लड़ेंगे। ऐसा तो हैं नहीं कि मुकेश सहनी उस श्रेणी में आते हैं जिनका विधान सभा या लोक सभा चुनाव में 100 फीसदी स्ट्राइक रेट रहा हो। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सामने सीटों की हिस्सेदारी तो चुनौती है ही, लेकिन मुकेश सहनी ने सिवान में यह कहकर टेंशन बढ़ा दी है कि मुकेश सहनी टिकट मांगने वालों में से
नहीं बल्कि, टिकट बांटने वालों में से हैं।

कांग्रेस ने भी चौंकाया!

तेजस्वी यादव के लिए यह कोई पहला झटका नहीं होगा। इसके पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी यह कहकर कि कांग्रेस 2020 में जितनी सीटों पर चुनाव लड़ी थी उससे कम सीटों पर 2025 में भी नहीं लड़ेगी। यानी 70 विधान सभा पर दावा ठोक दिया। जबकि पिछले कुछ विधान सभा चुनाव की बात करें तो धीरे-धीरे जीत का मार्जिन घटा ही है।

2015 के विधानसभा में कांग्रेस को 40 सीटें मिली, जिसमें से उसने 27 पर जीत दर्ज की। इसी प्रकार 2020 में पार्टी 70 सीटों पर लड़ी जरूर पर जीत सकी महज 19 सीटें। कांग्रेस 70 प्रतिशत सीटों की दावेदारी का आधार लोकसभा चुनाव 2024 के प्रदर्शन को बना रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस 9 सीटों पर लड़ी थी और तीन सीटों पर चुनाव जीत हासिल की थी

दावेदारी का खेल एनडीए में भी कम नहीं

दावेदारी के खेल में एनडीए की तरफ से सबसे पहले जनता दल यू (JDU) ने अपने दावे का इजहार किया था। तब जनता दल यू की तरफ से हर हाल में 120 सीटों पर तो लड़ने की बात आई थी। मिली जानकारी के अनुसार आगामी विधान सभा चुनाव 2025 राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लक्ष्य आधारित चुनाव है।

इस लक्ष्य के अनुकूल नीतीश कुमार राज्य में नंबर वन पार्टी बनना चाहते हैं, बल्कि 2010 में मिली 115 सीट के लिमिट को भी पार करना चाहते हैं। इसके लिए कम से कम 120 सीट पर लड़ना जरूरी है। जेडीयू के इस दावे पर लोकसभा चुनाव परिणाम की छाप भी है।

जदयू का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 में उनका स्ट्राइक रेट भाजपा से ज्यादा है। भाजपा 17 लोकसभा पर चुनाव लड़ी और 12 पर जीत दर्ज की। जदयू 16 सीटों पर लड़कर 12 सीटों पर जीती थी। नीतीश कुमार के मिशन 130 की चर्चा के साथ एनडीए में शामिल दल अभी से ही सचेत हो गए हैं।

लोजपा (आर) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने तो अलग मोर्चा खोल रखा है। लोकसभा में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट को आधार मानते चिराग पासवान ने पहले ही हर जिले में एक सीट पर चुनाव लड़ने की बात सार्वजनिक कर दी है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी अपना इरादा प्रकट कर दिया है।

उपेंद्र कुशवाहा ने तो यह सार्वजनिक मंच से कहा कि विधान सभा में लोकसभा चुनाव का गणित नहीं चलेगा। हम के संस्थापक अध्यक्ष जीतन राम मांझी भी 40 सीटों पर लड़ने की बात कही है।

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