RBI ने रेपो रेट में 0.25% कटौती की , 5 साल बाद ब्याज दरें घटीं

नए साल में आम आदमी को और क्या चाहिए. पहले इनकम टैक्स वाली राहत मिली. अब आरबीआई ने रेपो रेट घटाकर तोहफा दिया है. जी हां, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को रेपो रेट में बदलाव किया. रेपो रेट में 25 आधार अंक या 0.25 प्रतिशत की कमी हो गई है. रेपो रेट में […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 7 फरवरी 2025, 10:15 AM 7 मिनट read
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RBI ने रेपो रेट में 0.25% कटौती की ,  5 साल बाद ब्याज दरें घटीं
Photo: UB India News Archive

नए साल में आम आदमी को और क्या चाहिए. पहले इनकम टैक्स वाली राहत मिली. अब आरबीआई ने रेपो रेट घटाकर तोहफा दिया है. जी हां, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को रेपो रेट में बदलाव किया. रेपो रेट में 25 आधार अंक या 0.25 प्रतिशत की कमी हो गई है. रेपो रेट में कमी का मतलब है कि आम आदमी को बड़ी राहत. इससे लोगों की जेब पर बोझ कम होगा. उनकी कमाई में अब ज्यादा बचत होगी. अब सवाल है कि आरबीआई के रेपो पेट वाले ऐलान के बाद सब खुश क्यों नजर आ रहे हैं.

दरअसल, रेपो रेट में कमी का सीधा असर लोन की ब्याज दरों पर होता है. इसका मतलब है कि आरबीआई के इस ऐलान से आपके होम लोन से लेकर कार लोन तक सस्ते हो जाएंगे. सबसे पहले जानते हैं कि रेपो रेट में कटौती के बाद किन-किन चीजों में राहत मिल सकती है.

रेपो रेट के घटने से क्या बदलाव आएगा?

रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर अपनी ब्याज दरें कम कर सकते हैं। ब्याज दरें कम होंगी तो हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे।

क्या पहले से चल रहे लोन की EMI भी घटेगी?

लोन की ब्याज दरें 2 तरह से होती हैं फिक्स्ड और फ्लोटर। फिक्स्ड में आपके लोन पर ब्याज दर शुरू से आखिर तक एक जैसी रहती है। इस पर रेपो रेट में बदलाव का कोई फर्क नहीं पड़ता। फ्लोटर में रेपो रेट में बदलाव का आपके लोन की ब्याज दर पर भी फर्क पड़ता है। ऐसे में अगर आपने फ्लोटर ब्याज दर पर लोन लिया है तो EMI भी घट जाएगी।

रेपो रेट क्या है, सस्ता लोन कब से मिलेगा?

RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों के लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं। यानी, बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। हालांकि ये कटौती 1-2 महीने में की जाती है।

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती क्यों की?

RBI गवर्नर ने कहा- बीते कुछ समय में महंगाई दर में गिरावट देखी गई है। 2025-26 में महंगाई में और कमी आने का अनुमान है, इसलिए ब्याज दरों में घटाया गया है।

किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है।

पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।

इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

RBI ने पिछली बार रेपो रेट कब घटाया था?

RBI ने मई 2020 में आखिरी बार रेपो रेट में 0.40% की कटौती की थी और इसे 4% कर दिया था। हालांकि, मई 2022 में रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू किया, जो कि मई 2023 में जाकर रुका। इस दौरान रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 2.50% की बढ़ोतरी की और इसे 6.5% तक पहुंचा दिया था। इस तरह से 5 साल बाद रेपो रेट घटाया गया है।

जानिए महंगाई के आंकड़े क्या कहते हैं?

1. दिसंबर में रिटेल महंगाई 5.22% रही थी: खाने-पीने की चीजें सस्ती होने से दिसंबर में रिटेल महंगाई दर 4 महीने के निचले स्तर 5.22% पर आ गई। नवंबर में महंगाई दर 5.48% पर थी। 4 महीने पहले अगस्त में महंगाई 3.65% पर थी। RBI की महंगाई को लेकर रेंज 2%-6% है।

2. दिसंबर में थोक महंगाई 3.36% रही थी: दिसंबर महीने में थोक महंगाई बढ़कर 2.37% पर पहुंच गई। इससे पहले नवंबर में ये 1.89% पर थी। आलू, प्याज, अंडे, मांस-मछली और फलों की थोक में कीमतें बढ़ीं हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 14 जनवरी को ये आंकड़े जारी किए थे।

चलिए पांच प्वाइंट में रेपो रेट में कमी के असर को विस्तार से समझते हैं.

पहला- रेपो रेट में कमी से बैंकों के लोन की ब्याज दरें सस्ती हो सकती हैं. रेपो रेट में कमी से बैंकों को कम ब्याज दर पर पैसा मिलेगा. इससे वे आपको यानी ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर लोन दे पाएंगे. इससे होम लोन, कार लोन, और अन्य लोन की ईएमआई कम हो सकती है. अभी जितनी ईएमआई दे रहे हैं, वह इसके लागू होते ही कम हो जाएगी.

तीसरा- रेपो रेट में कमी से इंडस्ट्री को भी फायदा होता है.उन्हें भी कम ब्याज दर पर पैसा मिल सकेगा. इससे वे अपने उद्योग-धंधों में अधिक निवेश कर पाएंगे. इसका असर होगा कि नौकरी के अवसर बढ़ेंगे, जिसका सीधा फायदा आम आदमी को ही होगा.

चौथा- रेपो रेट में कमी से देश की तरक्की की राह भी और अधिक खुल जाती है. इससे देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है. जब लोगों को कम ब्याज दर पर लोन मिलता है तो वे ज्यादा खर्च करते हैं. इससे बाजार चलता रहता है.

पांचवां- रेपो रेट में कमी से महंगाई को कंट्रोल में रखने में भी मदद मिलती है. इससे अब कम खर्च  में ही आपका काम चल जाएगा.

रेपो रेपो में 0.25 प्रतिशत की कमी के बाद यह 6.25 प्रतिशत पर आ गई है, जो कि पहले 6.50 प्रतिशत थी. आरबीआई की ओर से बताया गया कि वित्त वर्ष 25 में खुदरा महंगाई दर 4.8 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है, जो कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 4.4 प्रतिशत रह सकती है. सामान्य मानसून के कारण खुदरा महंगाई वित्त वर्ष 26 में 4.2 प्रतिशत पर रह सकती है. अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई 4.5 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 3.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रह सकती है.

 

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