आज लोकसभा में पेश होगा नया इनकम टैक्स बिल 2025

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी गुरुवार को लोकसभा में नया इनकम टैक्स बिल 2025 पेश कर सकती है. इस बिल में इनकम टैक्स से जुड़े कानूनों, भाषा और आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रावधान शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ वित्त मंत्री वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टोकरेंसी को […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 13 फरवरी 2025, 07:30 AM 5 मिनट read
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आज लोकसभा में पेश होगा नया इनकम टैक्स बिल 2025
Photo: UB India News Archive

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी गुरुवार को लोकसभा में नया इनकम टैक्स बिल 2025 पेश कर सकती है. इस बिल में इनकम टैक्स से जुड़े कानूनों, भाषा और आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रावधान शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ वित्त मंत्री वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भी कोई कैटेगरी बनाई जा सकती है. दरअसल, जानकारों का मानना है कि सरकार सोने और बुलियन जैसी मौजूदा कैटेगरी के साथ-साथ सर्च के दौरान ‘अघोषित आय’ के रूप में क्रिप्टोकरेंसी को कैटेगराइज कर सकती है.

नए बिल के तहत अघोषित आय में ये चीजें शामिल

नए इनकम टैक्स बिल 2025 के तहत, ‘अघोषित आय’ में ‘पैसा, गोल्ड, ज्यूलरी, वर्चुअल डिजिटल एसेट या अन्य कीमती चीजों’के साथ-साथ किसी भी इंट्री या ट्राजैक्शन से संबंधित खर्च और कमाई शामिल है जो आंशिक या पूर्ण रूप से अघोषित आय को रिप्रेजेंट करती है.

किप्टोकरेंसी को लेकर सरकार कर सकती है बड़ा ऐलान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नए आयकर विधेयक में 23 चैप्टर्स और 16 शिड्यूल हैं. इसमें डिजिटल ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो को लेकर नए नियम या कानून होने की बात कही जा रही है. बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई नियम नहीं बनाया गया है, लेकिन केंद्रीय बजट 2023 में वित्त मंत्री ने कहा था कि वह आगामी समय में इसको लेकर कानून पेश करेंगी. ऐसे में नए आयकर विधायक में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नियमों के ऐलान की उम्मीदें बढ़ गई हैं.

क्रिप्टो या VDA पर लगे टैक्स में कोई बदलाव नहीं

बता दें कि नए इनकम टैक्स बिल में क्रिप्टोकरेंसी या वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर लगने वाले टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है. एसेट्स के ट्रांसफर से होने वाली किसी भी इनकम पर बिना किसी कटौती और छूट के 30 प्रतिशत टैक्स बरकरार रहेगा. इसके अलावा, डिजिटल एसेट्स को ट्रांसफर करने के लिए किए गए पेमेंट पर 1 प्रतिशत का TDS भी देना होगा.

दरअसल, वित्त अधिनियम 2022 के तहत वीडीए ट्रांसफर करते समय पेमेंट पर टीडीएस के संबंध में एक नया सेक्शन 194S शुरू किया गया था. इस सेक्शन के मुताबिक, कोई भी वेतनभोगी व्यक्ति वर्चुअल डिजिटल एसेट के ट्रांसफर के लिए 10,000 रुपये से अधिक का भुगतान करता है, तो उस पर वीडीए की वैल्यू का 1% TDS लगेगा. वहीं, बिजनेसमैन के लिए टीडीएस काटने की यह लिमिट 50,000 रुपये से ज्यादा सेट की गई है.

इनकम टैक्स बिल 2025 से जुड़े 5 अहम बदलाव…

1. टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट

  • नए बिल में टैक्स ईयर का नया कॉन्सेप्ट लाया जाएगा। अभी असेसमेंट ईयर और प्रीवियस ईयर की वजह से टैक्सपेयर्स को कई दिक्कतें होती हैं। कई लोग टैक्स भरते और रिटर्न फाइल करते समय असेसमेंट ईयर और फाइनेंशियल ईयर (पिछला साल) में कन्फ्यूज हो जाते हैं।
  • टैक्स ईयर के एक ही कॉन्सेप्ट से टैक्सपेयर्स को यह समझने में आसानी होगी कि वे किस साल का टैक्स भर रहे हैं और रिटर्न फाइल कर रहे हैं। मान लीजिए, आप 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक कमाएंगे तो यह आपका टैक्स ईयर 2025-26 होगा।

2. फाइनेंशियल ईयर में कोई बदलाव नहीं

  • टैक्सपेयर्स को याद रखना चाहिए कि फाइनेंशियल ईयर में कोई बदलाव नहीं होगा। यह 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च को खत्म होगा। नया बिल कैलेंडर ईयर को टैक्स ईयर के तौर पर नहीं मानेगा।

3. धाराओं में बदलाव

  • नए बिल में कई धाराओं में भी बदलाव हो सकता है। मौजूदा एक्ट में, इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग सेक्शन 139 के तहत आती है जबकि न्यू टैक्स रिजीम सेक्शन 115BAC के तहत। नए बिल में इन दोनों धाराएं बदल सकती हैं।

4. रेजिडेंसी कानूनों में कोई बदलाव नहीं

  • नए बिल में रेजिडेंसी कानूनों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये नए एक्ट में भी वैसे ही रहेंगे। मौजूदा कानून रेजिडेंसी को तीन कैटेगरी में बांटा गया है: ऑर्डिनरी, नॉन-ऑर्डिनरी और एनआरआई। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेजिडेंसी कानूनों में बदलाव की जरूरत है।
  • मौजूदा कानूनों के तहत टैक्सपेयर्स को पिछले 10 सालों का रेकॉर्ड देखना पड़ता है ताकि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में उनकी रेजिडेंसी का पता चल सके। मतलब अगर आप भारत में कितने दिन रहे, यह जानने के लिए पिछले 10 साल का हिसाब देखना पड़ता है।

5. ITR में कोई बदलाव नहीं

  • बजट 2025 में की गई घोषणा के मुताबिक टैक्सपेयर्स की आसानी के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा, आयकर स्लैब और पूंजीगत लाभ कराधान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मतलब रिटर्न भरने की आखिरी तारीख, टैक्स स्लैब और कैपिटल गेन्स टैक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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