बिहार में चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार हो गया. मंत्रियों के बीच विभाग भी बंट गए. कैबिनेट विस्तार के बाद नीतीश मंत्रिमंडल में कुल 36 मंत्री हो गए. बिहार में चर्चा थी कि जदयू और भाजाप दोनों के नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल होंगे. मगर ऐसा क्या हुआ कि सभी सातों मंत्री पद भाजपा को मिल गए. क्या बिहार में भाजपा बिग ब्रदर हो गई है? क्या बिहार चुनाव में सीएम फेस भी बदल सकता है. अगर कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे पर गौर से नजर फरमाएं तो एक सच्चाई का पता चलेगा. वह यह कि इस कैबिनेट विस्तार में नीतीश कुमार के पास खोने क लिए कुछ नहीं. सारा बदलाव भाजपा कोटे से है. जी हां, यूं कहिए कि नीतीश कुमार ने चवन्नी भर भी समझौता नहीं किया. भाजपा ने अपने कोटे के ही विभागों का आपस में बंटवारा किया है. चलिए इसको समझते हैं.
बिहार में बुधवार को नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ. 7 नए चेहरों से बिहार के सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की गई. पहले चर्चा थी कि नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा कोटे से नए चेहरों को जगह मिलेगी. पर जब लिस्ट सामने आई तो सभी चौंक गए. केवल भाजपा के ही 7 मंत्रियों ने शपथ ली. कैबिनेट विस्तार को देखकर लग रहा कि नीतीश कुमार अपने मंत्रियों से संतुष्ट हैं. उन्हें अपने कोटे से किसी फेरबदल की जरूरत महसूस नहीं हुई. जबकि भाजपा ने सात नए चेहरों को जगह दी.
भाजपा ने क्यों नहीं की बार्गेनिंग
यहां दिलचस्प है कि नीतीश कुमार और जदयू ने अपने कोटे से जरा भी छेड़छाड़ नहीं होने दी. जदयू कोटे वाले मंत्रालय अथवा विभाग पर कोई समझौता नहीं होने दिया. बिहार में भाजपा की अधिक सीटें हैं. ऐसे में वह जदयू से बार्गेनिंग कर सकती थी. मगर नीतीश कुमार के सियासी मिजाज को देखकर यह करना मुनासिब न लगा. यानी भाजपा ने अपने हिस्से के विभागों का ही बंटवारा किया है. नीतीश कुमार ने एक भी अतिरिक्त विभाग भाजपा को नहीं दिया.
जदयू ने कुछ नहीं दिया
इस तरह से बिहार में भाजपा ने अपने कोटे वाले विभागों में ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया है. जदयू के कोटे में जो विभाग थे, वह अब भी वैसे ही हैं. जो भी फेरबदल है वह भाजपा में है. नीतीश कुमार की जदयू ने एक भी विभाग भाजपा के लिए नहीं छोड़ा. यह तब है जब सत्ता में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में भाजपा आ चुकी है. अब जदयू बड़े भाई की भूमिका में नहीं है. सीटों और मंत्रियों के मामले में जेडीयू की संख्या बीजेपी से कम हो गई है. फिलहाल, बिहार विधानसभा में बीजेपी के 80 और जेडीयू के 45 विधायक हैं. वहीं, मंत्रियों की बात करें तो अब भाजपा के 21 मंत्री, जेडीयू के 13 मंत्री, ‘हम’ पार्टी के 1 मंत्री और 1 निर्दलीय मंत्री हैं.
बिहार के सात नए मंत्री और उनके विभाग
संजय सरावगी- राजस्व एवं भूमि सुधार
राजू कुमार सिंह- पर्यटन मंत्री
जीवेश मिश्रा- नगर विकास एवं आवास विकास
सुनील कुमार- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
मोतीलाल प्रसाद- कला, संस्कृति एवं युवा विभाग
कृष्ण कुमार मंटू- सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
विजय मंडल- आपदा प्रबंधन विभाग
भाजपा बनी है बड़ा भाई
इसका मतलब है कि भाजपा बड़ा भाई है. बावजूद इसके नीतीश कुमार की जदयू कैबिनेट विस्तार में टस से मस नहीं हुई. उसने अपनी ओर से एक भी विभाग भाजपा के कोटे में नहीं जाने दिया. भाजपा के मंत्रियों के पास जो अतिरिक्त प्रभार थे, उन्हीं को कम करके सात नए मंत्री बनाए गए और उन्हें विभाग सौंपे गए. नए मंत्रियों को सौंपे गए विभागों को लेकर जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, भाजपा कोटे वाले कई पुराने मंत्रियों के विभाग भी बदले गए हैं. भाजपा के जो मंत्री पहले एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उनके कुछ विभाग अब नए मंत्रियों के बीच वितरित कर दिए गए हैं. इसके तहत डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के कुछ विभाग बदल दिए गए हैं.








