क्या कन्हैया कुमार की बिहार चुनाव एंट्री से तेजस्वी की बढ़ेगी मुश्किल?

बिहार की राजनीति की सबसे बड़ी बात यह है कि बीते 19 वर्षों से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और वह एनडीए की ओर से आने वाले 5 वर्षों के लिए भी सीएम फेस के तौर पर प्रोजेक्ट कर दिए गए हैं. इससे आगे बढ़ते हैं तो बिहार की राजनीति की बड़ी उम्मीद लालू प्रसाद यादव […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 10 मार्च 2025, 05:59 AM 6 मिनट read
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क्या कन्हैया कुमार की बिहार चुनाव एंट्री से तेजस्वी की बढ़ेगी मुश्किल?
Photo: UB India News Archive

बिहार की राजनीति की सबसे बड़ी बात यह है कि बीते 19 वर्षों से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और वह एनडीए की ओर से आने वाले 5 वर्षों के लिए भी सीएम फेस के तौर पर प्रोजेक्ट कर दिए गए हैं. इससे आगे बढ़ते हैं तो बिहार की राजनीति की बड़ी उम्मीद लालू प्रसाद यादव के बेटे और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दिखते हैं. हाल में एक एजेंसी के सर्वे में उनकी लोकप्रियता बतौर भविष्य का मुख्यमंत्री,नीतीश कुमार के (18%) के मुकाबले (40%) अधिक है. वह आने वाले समय के सीएम के पद के तौर पर अधिक पसंद किया जा रहे हैं, ऐसा सर्वे का कहना है. इससे आगे बढ़ते हैं तो चेहरा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान और जनसुरज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर पर जाकर नजरें टिक जाती हैं. जबकि राष्ट्रीय पार्टी बीजेपी का कोई खास फेस बिहार में चमकता हुआ नहीं दिख रहा है. लेकिन, बड़ी हकीकत यही है कि जनाधार अच्छा- खासा है और अभी बिहार विधानसभा में 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी भी भाजपा ही है. लेकिन, पार्टी का कोई एक फेस नहीं है. वहीं, दूसरी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की बात करें तो बीते तीन दशक से प्रदेश में इसकी हालत खस्ता रही है. खास बात तो यह कि अस्त्तित्व पर भी संकट के बादल हैं और इसकी हिस्सेदारी को लेकर भी कांग्रेस, राजद के रहमों करम पर निर्भर करती रही है. हालांकि, इस बार भी वह 243 सदस्यीय विधानसभा में 70 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है. लेकिन, महागठबंधन के अंदरखाने की खबर है कि आरजेडी कांग्रेस को इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है.ऐसे में सवाल यह कि क्या महागठबंधन में खींचतान होने पर कांग्रेस कुछ नए प्लान पर बढ़ सकती है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि बिहार में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार बिहार आने वले हैं और जिससे यह अहसास होने लगा है कि विधानसभा चुनाव में कन्हैया कुमार सक्रिय हो सकते हैं. खास बात यह कि उनके नाम के अब पोस्टर भी लगने शुरू हो चुके हैं.

बिहार के लिए चुनावी साल है तो यह कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन कांग्रेस नेता नेता चुन्नू सिंह के लगाए इस पोस्टर की खास बात यह है कि इसमें राहुल गांधी और कांग्रेस प्रभारी कृष्ण अल्लावरु के साथ कन्हैया कुमार की तस्वीर है. कहा जा रहा है कि हो सकता है कि कन्हैया को विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए बड़ी जिम्मेवारी मिल सकती है. इस बीच खबर यह भी है कि कन्हैया कुमार होली के बाद 16 मार्च को बिहार में यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि, इसकी सहमति राहुल गांधी से 12 मार्च को उनकी मुलाकात के बाद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. लेकिन, अंदर ही अंदर कांग्रेस इसको लेकर तैयारी कर रही है.

कांग्रेस की ‘जड़’ मजबूत करने की कवायद कर रही कांग्रेस
बता दें कि 12 मार्च को दिल्ली में बिहार कांग्रेस नेताओं की विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक भी है. राजनीति की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण इसलिए है कि, ऐसा माना जाता है कि लालू प्रसाद यादव कन्हैया कुमार के बिहार में सक्रियता अब तक नहीं चाहते रहे. मगर सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी, लालू यादव के मन के विरुद्ध कन्हैया कुमार को बिहार में एक्टिव करेंगे? दरअसल, बिहार पर कांग्रेस बीते दिनों काफी एक्टिव नजर आ रही है. बीते 18 जनवरी को राहुल गांधी बिहार आए और इसके बाद जनवरी में भी दोबारा बिहार पहुंचे.राहुल गांधी का बिहार दो बार आना संयोग हो सकता है, लकिन उनका फोकस संविधान बचाओ सम्मेलन के तहत अल्पसंख्यक और दलित शख्सियत जगलाल चौधरी रहे हैं.

आरजेडी कन्हैया की राह में रही बाधा, पर अब नया प्लान
राजनीति के जानकार इसे कांग्रेस की रणनीति से भी जोड़ कर देख रहे हैं. बिहार प्रभारी भी बदल दिए गए हैं और अब यहां युवा चेहरा कृष्णा अल्लावरु प्रभारी बनाए गए हैं. इसी बीच कन्हैया कुमार को बिहार की उम्मीद बताते हुए पोस्टर लगाये गये हैं. ऐसे में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. सवाल यह कि क्या कन्हैया के पोस्टर से कन्हैया की बिहार पॉलिटिक्स में सक्रिय एंट्री से महागठबंधन में खटास आ सकती है? दरअसल, बीते दिनों में कई मौके ऐसे आए हैं जब कन्हैया कुमार बिहार में एक्टिव होना चाहते रहे हैं, लेकिन लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी आरजेडी कन्हैया की राह में बाधा रही.

आरजेडी ने क्या कहा, कांग्रेस ने क्या दलील दी?

हालांकि, आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि कौन क्या पोस्टर लगा रहा है, इससे मतलब नहीं है. बिहार की उम्मीद और आशा तेजस्वी यादव हैं. बिहार की जनता ने ठान लिया है कि तेजस्वी यादव को ही मुख्यमंत्री बनना है. तेजस्वी यादव को जनता का आशीर्वाद प्राप्त है. कोई किसी का पोस्टर लगाकर उम्मीद बता सकता है, इसमें हर्ज क्या है. लोकतंत्र है, वैसे तेजस्वी ने जनता के लिए काम करके दिखाया है जनता का आशीर्वाद तेजस्वी यादव को मिलने जा रहा है. वहीं, कांग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा है कि कन्हैया कुमार बिहार के हैं, पहले भी बिहार आए हैं. लोग आगे भी आते हैं जाते रहेंगे और काम करते रहेंगे. उनका बिहार में स्वागत किया जाएगा. हर पार्टी चाहती है कि उनका संगठन मजबूत हो.

क्या कहते हैं राजनीति के जानकार?
राजनीति के जानकार भी फिलहाल कन्हैया के बिहार आगमन को इसी दृष्टि से देख रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि वर्तमान में तेजस्वी यादव को महागठबंधन की ओर से सीएम फेस घोषित कर दिया गया है और कांग्रेस अभी इस अलायंस से अलग होने का सोच भी नहीं सकती है. इतना जरूर है कि सीटों की हिस्सेदारी को लेकर जरूर पेंच फंसेगा और इस पर आरजेडी और कांग्रेस आमने सामने भी होगी. ऐसे में कन्हैया कुमार की एंट्री एक प्रेशर का तरीका है. हालांकि, कांग्रेस को यह बात जरूर खल रही है कि राष्ट्रीय पार्टी होने के बाद भी वह आरजेडी के आगे नतमस्तक रहने को मजबूर है. बहरहाल, राजद और कांग्रेस के आधिकारिक पक्ष के इतर बड़े सवाल येतो जरूर हैं कि क्या तेजस्वी यादव और लालू यादव बिहार में कन्हैया कुमार की सक्रियता पसंद करेंगे? क्या राहुल गांधी बिहार कांग्रेस के भविष्य को लेकर कुछ नई प्लानिंग कर रहे हैं?

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