क्‍या ‘कन्‍फ्यूजन’ अमेरिका की पॉलिसी का हिस्‍सा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ (शुल्क) को लेकर आक्रामक आर्थिक नीति कई विरोधाभासी विचारों से भरी है। उनके सलाहकार भी अलग-अलग बातें कर रहे हैं। एक तरफ, उनका कहना है कि दूसरे देश अमेरिका को लूट रहे हैं और उन्हें रोकना जरूरी है। दूसरी तरफ, वे कनाडा, मेक्सिको और चीन के साथ ड्रग्स की लड़ाई […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 23 मार्च 2025, 07:29 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
क्‍या ‘कन्‍फ्यूजन’ अमेरिका की पॉलिसी का हिस्‍सा?
Photo: UB India News Archive

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ (शुल्क) को लेकर आक्रामक आर्थिक नीति कई विरोधाभासी विचारों से भरी है। उनके सलाहकार भी अलग-अलग बातें कर रहे हैं। एक तरफ, उनका कहना है कि दूसरे देश अमेरिका को लूट रहे हैं और उन्हें रोकना जरूरी है। दूसरी तरफ, वे कनाडा, मेक्सिको और चीन के साथ ड्रग्स की लड़ाई की बात कर रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि टैरिफ से देश के 36 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज को कम करने में मदद मिलेगी। लेकिन, इन सब बातों के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ट्रंप के टैरिफ का असर दिख रहा है। कनाडा, मेक्सिको और चीन से आने वाले सामानों पर भारी शुल्क लगाने से अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे व्यापार में निवेश और लोगों का भरोसा कम हुआ है। शेयर बाजार में भी लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इस वजह से फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) भी ब्याज दरों को कम करने से हिचकिचा रहा है। वह इंतजार कर रहा है कि ट्रंप आगे क्या कदम उठाते हैं और उसका अर्थव्यवस्था पर क्या असर होता है।

ट्रंप और उनके सलाहकार अपनी आर्थिक रणनीति को स्पष्ट करने के बजाय अनिश्चितता को ही अपनी नीति का हिस्सा मान रहे हैं। व्हाइट हाउस के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने सीएनबीसी पर कहा कि 2 अप्रैल तक कुछ अनिश्चितता रहेगी। ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या वह कारोबारियों को अपनी नीति के बारे में स्पष्ट जानकारी देंगे तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कंपनियों को निश्चितता की जरूरत है। उन्होंने फॉक्स न्यूज पर मारिया बार्टिरोमो को बताया कि वह ऐसा कहते हैं, यह कहना अच्छा लगता है। लेकिन, सालों से बड़े वैश्विक खिलाड़ी अमेरिका को लूट रहे हैं। वे अमेरिका से पैसा निकाल रहे हैं। हम सिर्फ कुछ पैसा वापस ले रहे हैं। हम अपने देश के साथ न्याय करेंगे।

मंदी की आशंका से नहीं क‍िया जा रहा इनकार
ट्रंप ने मंदी की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का कहना है कि इस अनिश्चितता के कारण मंदी की आशंका बढ़ सकती है। फेडरल रिजर्व ने भी इस अनिश्चितता पर ध्यान दिया है। उसने ब्याज दरों को स्थिर रखा है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए ज्‍यादा महंगाई और धीमी ग्रोथ का अनुमान लगाया है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि अनिश्चितता बहुत ज्यादा है।

रेटिंग एजेंसी फिच ने चेतावनी दी है कि ट्रंप की ओर से शुरू किए गए वैश्विक व्यापार युद्ध से वैश्विक विकास कम होगा। अमेरिकी उत्पादन धीमा होगा। साथ ही, कीमतें बढ़ेंगी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में कटौती में देरी होगी।

फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्‍टन ने कहा कि टैरिफ में ग्रोथ से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी, वास्तविक मजदूरी कम होगी और कंपनियों की लागत बढ़ेगी। नीतिगत अनिश्चितता बढ़ने से व्यापार निवेश पर असर पड़ेगा।

अप्रत्याशित बने रहना चाहते हैं ट्रंप
इस अनिश्चितता का मुख्य कारण यह है कि ट्रंप टैरिफ को व्यापार में सुधार के बजाय नीतिगत मुद्दों को सुलझाने के लिए एक हथियार के रूप में देखते हैं। वह अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने के लिए अप्रत्याशित बने रहना चाहते हैं। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के आर्थिक सुरक्षा और प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष नवीन गिरिशंकर ने कहा कि ट्रंप 2.0 की शुरुआत में रणनीतिक तालमेल और प्रभावी समन्वय की कमी है। इस वजह से नीति में अस्थिरता आ रही है, जिसका असर वित्तीय बाजारों और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

इन्वेस्टमेंट फर्म वेदा पार्टनर्स की आर्थिक नीति निदेशक हेनरिटा ट्रेज ने कहा कि सांसदों को उम्मीद है कि टैरिफ सिर्फ एक बातचीत की रणनीति है। जब इस बारे में निश्चितता होगी तो बाजार शांत हो जाएंगे। हालांकि, निवेशकों को अभी भी डर लग रहा है। कैपिटल हिल पर यह राय बन रही है कि 1 अप्रैल के बाद निश्चितता आ जाएगी और बाजार शांत हो जाएंगे। लेकिन, ज्यादातर निवेशकों को ऐसा नहीं लगता। वे मानते हैं कि अनिश्चितता से निकट भविष्य में अस्थिरता आएगी। इसका अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। ट्रंप ने अपनी बातचीत की रणनीति के तहत टैरिफ को कम करने या हटाने की इच्छा दिखाई है। लेकिन, यह स्पष्ट नहीं है कि बाजार की प्रतिक्रिया से उनके फैसलों पर कोई असर पड़ा है। उनके शीर्ष आर्थिक सलाहकार भी उनकी नीतियों को बदलने के लिए तैयार नहीं दिखते हैं।

मंदी के ल‍िए भी रेडी
वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने सीबीएस न्यूज से कहा कि ट्रंप के टैरिफ इतने महत्वपूर्ण हैं कि अगर इससे अमेरिका में मंदी भी आ जाए तो भी यह इसके लायक है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी मंदी की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर दूसरे देश अपनी व्यापार बाधाओं को कम करते हैं तो कुछ टैरिफ को कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संरक्षणवाद एक अच्छी नीति है। उन्होंने फॉक्स बिजनेस नेटवर्क पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ महत्वपूर्ण उद्योगों की पहचान की है जो हमसे दूर हो गए हैं। वह अमेरिका में मैन्‍यूफैक्‍चरिंग को वापस लाना चाहते हैं और इसलिए हम ये टैरिफ लगा रहे हैं।

लगातार चल रहे इस ड्रामे का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कंपनियों के बीच सौदे कम हो रहे हैं और कुछ तरह के व्यापार निवेश में कमी आ रही है। राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल में वित्‍त मंत्री रहे लैरी समर्स ने कहा कि अगर ट्रंप अपने टैरिफ को कम भी कर देते हैं तो भी वह नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये बहुत ही समस्याग्रस्त कदम हैं, भले ही इन्हें वापस ले लिया जाए। इनसे बहुत ज्यादा अनिश्चितता पैदा होती है, जो अर्थव्यवस्था पर हावी रहती है।

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰