नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने वक्फ संशोधन बिल पर केंद्र सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी है. पार्टी के के चीफ व्हिप देलेश्वर कामत ने कहा है कि हम मजबूती से सरकार के समर्थन में संसद के अंदर वोट करेंगे. पार्टी के सभी सांसदों को इसके लिए व्हिप जारी किया जा चुका है. बता दें कि चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और चिराग पासवान की पार्टी एलजेपीआर के समर्थन के बाद नीतीश कुमार की जेडीयू का समर्थन केंद्र सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है.
बताया जा रहा है कि वक्फ संशोधन बिल बुधवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. इससे पहले जेडीयू ने केंद्र सरकार को कुछ सुझाव दिए थे. इसके बारे में बताया जा रहा है कि उनमें से कुछ सुझाव केंद्र सरकार ने मान लिए हैं और अब नीतीश कुमार की पार्टी ने इस बिल का समर्थन देने की घोषणा कर दी है. माना जा रहा है कि प्रमुख सहयोगियों के समर्थन से सदन में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बहुमत जुटा लेगी और यह बिल आसानी से पास हो जाएगा.
बता दें कि इससे पहले लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास) यानी LJPR ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर केंद्र सरकार का समर्थन करने की घोषणा कर दी है. इसके साथ ही अपने सांसदों के लिए सरकार के समर्थन में मतदान करने का व्हिप भी जारी किया है. पार्टी के सभी सांसदों को दो और तीन अप्रैल के दिन संसद में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है. LJPR के चीफ व्हिप अरुण भारती ने व्हिप जारी किया.
क्या हैं प्रावधान
1.वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर “यूनिफाइड वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995” किया जाएगा.
2.वक्फ की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए इसे ऐसे किसी भी व्यक्ति द्वारा घोषित करने का अधिकार होगा जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो और उस संपत्ति का स्वामी हो.
3.महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.
4.वक्फ सर्वेक्षण के लिए डिप्टी कलेक्टर या उच्च अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी.
5.वक्फ बोर्डों की संरचना में सुधार किया जाएगा, जिससे इसमें मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके.
6.वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण को हटाने और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल और डेटाबेस बनाया जाएगा.
7.ट्रिब्यूनल व्यवस्था में संशोधन कर इसे अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिसमें दो सदस्यीय ट्रिब्यूनल होंगे और उच्च न्यायालय में अपील की समय-सीमा 90 दिन निर्धारित की जाएगी.
8.धारा 40 को हटाकर वक्फ बोर्ड को यह तय करने का अधिकार नहीं होगा कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं.
9.वक्फ प्रबंधन के लिए वार्षिक योगदान को 7% से घटाकर 5% किया जाएगा.
सरकार का मकसद
सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन, सशक्तिकरण और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी गई है ताकि वक्फ संपत्तियों का उपयोग समुदाय के हित में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके.








