अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत ने बनाया ये खास प्लान……….

भारत वैश्विक व्यापार पर अमेरिका द्वारा अतिरिक्त आयात शुल्क लगाए जाने से उत्पन्न स्थिति पर नजर रखेगा तथा जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगा. इसकी वजह यह है कि अमेरिका को खुद अपने घरेलू उद्योग से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से ये बात कही […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025, 08:48 AM 7 मिनट read
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अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत ने बनाया ये खास प्लान……….
Photo: UB India News Archive

भारत वैश्विक व्यापार पर अमेरिका द्वारा अतिरिक्त आयात शुल्क लगाए जाने से उत्पन्न स्थिति पर नजर रखेगा तथा जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगा. इसकी वजह यह है कि अमेरिका को खुद अपने घरेलू उद्योग से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से ये बात कही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को भारत और चीन सहित लगभग 60 देशों पर 11 से 49 प्रतिशत के जवाबी शुल्क की घोषणा की. यह नौ अप्रैल से लागू होगा.

अधिकारी ने कहा कि भारत के लिए चुनौतियां और अवसर, दोनों हैं, क्योंकि निर्यात में उसके कई प्रतिस्पर्धी देश जैसे चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, कंबोडिया और थाइलैंड उच्च शुल्क का सामना कर रहे हैं. सूत्र ने कहा, “एक देश के तौर पर हमें स्थिति पर नजर रखने की ज़रूरत है और जल्दबाज़ी करने की जरूरत नहीं है. यह कुछ नया हुआ है. यह अभूतपूर्व है. अमेरिकी उद्योग भी इस कदम से नाराज होंगे और चुनौतियां भी होंगी. हमें इंतजार करने, निरीक्षण करने और देखने की जरूरत है क्योंकि हमें यह निष्कर्ष निकालने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए कि यह भविष्य के लिए है. हमें यह देखने की जरूरत है कि उनके पक्ष में क्या है.”

अमेरिका की ओर से आयात शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य व्यापार घाटे में कमी लाना तथा विनिर्माण को बढ़ावा देना है. भारत पर 26 प्रतिशत शुल्क के बारे में उन्होंने कहा कि केवल छह-सात क्षेत्र जैसे झींगा और कालीन को भारी करों‍ से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अधिकांश अन्य क्षेत्रों को निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा, क्योंकि प्रतिस्पर्धी देशों को भारत की तुलना में अधिक शुल्क का सामना करना पड़ेगा.

मोटे अनुमान के अनुसार, भारत के लगभग 25 प्रतिशत निर्यात को कर से छूट मिली हुई है तथा शेष के लिए ‘मिश्रित परिदृश्य’ है. उन्होंने यह भी कहा कि सोने के आभूषण और कालीन जैसी मूल्य-संवेदनशील वस्तुओं पर शुल्क लगाया जाएगा. अमेरिका वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था. भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है.

अमेरिका के साथ भारत का 2023-24 में वस्तुओं पर व्यापार अधिशेष (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) 35.32 अरब डॉलर था. यह 2022-23 में 27.7 अरब डॉलर, 2021-22 में 32.85 अरब डॉलर, 2020-21 में 22.73 अरब डॉलर और 2019-20 में 17.26 अरब डॉलर था. पिछले साल अमेरिका को भारत के मुख्य निर्यात में औषधि निर्माण और जैविक उत्पाद (8.1 अरब डॉलर), दूरसंचार उपकरण (6.5 अरब डॉलर), कीमती और अर्द्ध-कीमती पत्थर (5.3 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 अरब डॉलर), सोना और अन्य कीमती धातु के आभूषण (3.2 अरब डॉलर), सहायक उपकरण सहित सूती तैयार वस्त्र (2.8 अरब डॉलर), और लोहा और इस्पात के उत्पाद (2.7 अरब डॉलर) शामिल हैं.

आयात में कच्चा तेल (4.5 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब डॉलर), कोयला, कोक (3.4 अरब डॉलर), तराशे और पॉलिश किए हुए हीरे (2.6 अरब डॉलर), इलेक्ट्रिक मशीनरी (1.4 अरब डॉलर), विमान, अंतरिक्ष यान और उसके कलपुर्जे (1.3 अरब डॉलर) तथा सोना (1.3 अरब डॉलर) शामिल थे।व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि चीन को 54 प्रतिशत शुल्क का सामना करना पड़ेगा, इसलिए भारत में वस्तुओं की डंपिंग की संभावना है.

वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका द्वारा की गई घोषणाओं के निहितार्थों की सावधानीपूर्वक जांच कर रहा है. वह हितधारकों से उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए उनसे परामर्श कर रहा है तथा प्रभाव का आकलन करने के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ संपर्क में हैं. अमेरिका को भारत के कृषि निर्यात पर इन शुल्क के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर सूत्र ने कहा कि अमेरिका में भारतीय प्रवासी कीमतों की परवाह किए बिना इन वस्तुओं का उपभोग करेंगे. चावल निर्यात के मामले में, जबकि वर्तमान अमेरिकी शुल्क नौ प्रतिशत है, 27 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद भारत वियतनाम और थाइलैंड के मुकाबले बढ़त बनाए हुए है.

साल 2024 में भारत का मछली, मांस और प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य निर्यात 2.58 अरब डॉलर रहा. प्रसंस्कृत खाद्य, चीनी और कोको का निर्यात 1.03 अरब डॉलर रहा. इसी प्रकार, देश का अनाज, सब्जियां, फल और मसालों का निर्यात पिछले वर्ष 1.91 अरब डॉलर का था. पिछले साल 18.15 करोड़ डॉलर मूल्य के डेयरी उत्पाद अमेरिका भेजे गए, जबकि खाद्य तेलों का निर्यात 19.97 करोड़ डॉलर रहा. शराब, वाइन और स्पिरिट का निर्यात कुल मिलाकर 1.92 करोड़ डॉलर रहा.

भारत पर एक दिन बाद ही ट्रंप ने क्यों कम कर दिया टैरिफ…………

अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के दस्तावेज में भारत पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क को 27 प्रतिशत से घटाकर 26 प्रतिशत कर दिया है. शुल्क नौ अप्रैल से लागू होंगे. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (2 अप्रैल) को अलग-अलग देशों के खिलाफ टैरिफ की घोषणा करते हुए एक चार्ट दिखाया था जिसमें भारत, चीन, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों पर लगाई जाने वालीं नई टैरिफ रेट का जिक्र था.

चार्ट के अनुसार, भारत ‘‘मुद्रा हेरफेर और व्यापार बाधाओं’’ सहित 52 प्रतिशत शुल्क लेता है और अमेरिका अब भारत से 26 प्रतिशत का रियायती जवाबी शुल्क वसूलेगा. हालांकि, व्हाइट हाउस के दस्तावेजों में भारत पर 27 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने का जिक्र था लेकिन नवीनतम दस्तावेज में इसे घटाकर 26 प्रतिशत कर दिया गया है.

कम होने का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा
इस संबंध में पूछे जाने पर उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि शुल्क के एक प्रतिशत कम होने का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा.अमेरिका वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा. भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत रही. अमेरिका के साथ भारत का 2023-24 में वस्तुओं पर व्यापार अधिशेष (आयात व निर्यात के बीच का अंतर) 35.32 अरब अमेरिकी डॉलर था. यह 2022-23 में 27.7 अरब अमेरिकी डॉलर, 2021-22 में 32.85 अरब अमेरिकी डॉलर, 2020-21 में 22.73 अरब अमेरिकी डॉलर और 2019-20 में 17.26 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था.

अमेरिका का भारत से निर्यात
अमेरिका को 2024 में भारत के मुख्य निर्यात में औषधि निर्माण व जैविक (8.1 अरब डॉलर), दूरसंचार उपकरण (6.5 अरब डॉलर), कीमती व अर्ध-कीमती पत्थर (5.3 अरब अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 अरब डॉलर), सोना व अन्य कीमती धातु के आभूषण (3.2 अरब डॉलर), सहायक उपकरण सहित सूती तैयार वस्त्र (2.8 अरब डॉलर) और लोहा व इस्पात के उत्पाद (2.7 अरब डॉलर) शामिल था. आयात में कच्चा तेल (4.5 अरब डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब डॉलर), कोयला व कोक (3.4 अरब डॉलर), कटे व पॉलिश किए हुए हीरे (2.6 अरब डॉलर), इलेक्ट्रिक मशीनरी (1.4 अरब डॉलर), विमान, अंतरिक्ष यान व उसके पुर्जे (1.3 अरब डॉलर) और सोना (1.3 अरब डॉलर) शामिल थे.

 

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