टैरिफ युद्ध का चीन है असली गुनहगार जिसके वजह से भयंकर बढ़ेगी महंगाई! ……………

अमेरिका ने चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 104 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि वो 24 घंटे के भीतर अमेरिका पर लगाया गया 34 पर्सेंट का reciprocal टैरिफ वापस नहीं लिया, तो वो चीन से आने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 10 अप्रैल 2025, 05:46 AM 6 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
टैरिफ युद्ध का चीन है असली गुनहगार जिसके वजह से भयंकर बढ़ेगी महंगाई! ……………
Photo: UB India News Archive

अमेरिका ने चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 104 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि वो 24 घंटे के भीतर अमेरिका पर लगाया गया 34 पर्सेंट का reciprocal टैरिफ वापस नहीं लिया, तो वो चीन से आने वाली वस्तुओं पर 50 पर्सेंट का additional tariff लगा देंगे। बुधवार को चीन सरकार के बड़े नेताओं की बैठक हुई जिसमें जवाबी कार्रवाई पर विचार हुआ। बुधवार को भारत सहित सभी एशियाई शेयर बाज़ारों में गिरावट जारी रही। चीन ने कहा है कि अमेरिका के रुख पर दुनिया के सभी देशों को मिलकर विरोध करना चाहिए और अमेरिका को WTO के नियमों का पालन करने के लिए मजबूर करना चाहिए क्योंकि अमेरिका अपने फायदे के लिए पूरी दुनिया का कारोबार चौपट कर रहा है। लेकिन सवाल ये है कि आज जो स्थिति पैदा हुई है क्या उसके लिए कौन जिम्मेदार है? ट्रम्प का टैरिफ या समस्या की जड़ में चीन है?

आज ऐसा लग रहा है कि अमेरिका चीन के पीछे पड़ा है। ये धारणा बनायी जा रही है कि अमेरिका पूरी दुनिया का एजेंडा सेट करने में लगा है लेकिन अगर टैरिफ और कारोबार के इस युद्ध की शुरुआत देखें तो पता चलेगा कि इसके लिए चीन भी उतना ही जिम्मेदार है और ये बात भारत से बेहतर कौन जानता है। चीन बाजार में सस्ता माल बेचता है, चीन की बनी वस्तुओं ने हमारे मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है। ये सिलसिला 24 साल पहले शुरू हुआ जब चीन WTO (विश्व व्यापार संगठन) का सदस्य बना। चीन ने कम लगात पर मैन्युफैक्चरिंग का नैरेटिव सेट किया, बड़ी बड़ी फैक्ट्रियां लगाईं, करोड़ों मजदूरों से सस्ते में दिन-रात काम कराया और इस माल को दुनिया भर में बेचा।

अमेरिका के मार्केट पर चीन ने लगभग कब्जा कर लिया था। उस समय किसी ने इसका विरोध नहीं किया। चीन की हरकतों से भारत और अमेरिका जैसे देशों में मैन्युफैक्चरिंग को भारी नुकसान हुआ पर उस समय किसी ने चीन से नहीं कहा कि ये गलत ट्रेड प्रैक्टिस है। चीन की तरक्की तो हुई पर चीन ने व्यापार नियमों की धज्जियां उड़ाईं। ये दुर्भाग्य की बात है कि उस समय भारत ने भी इसका विरोध नहीं किया। भारत जैसे देश चुपचाप WTO के नियमों को मानते रहे। चीन हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता रहा और उस समय की हमारी सरकार चीन की सड़कें और चीन की फैक्ट्रियां दिखाकर चीन का महिमामंडन करती रहीं।

2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो चीन की इन अनफेयर प्रैक्टिस पर सवाल उठाए गए। ‘मेक इन इंडिया’ का अभियान शुरू किया गया। मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन को चुनौती दी गई, लेकिन दुनिया के ज्यादातर मुल्क उस समय भी खामोश रहे। आज हाल ये है कि चीन दुनिया के 181 देशों के साथ व्यापार करता है, इनमें से 150 देश चीन के साथ व्यापार के घाटे में हैं। 43 देश ऐसे हैं  जिनका चीन के साथ व्यापार घाटा 5 परसेंट से ज़्यादा है। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन और मेक्सिको जैसी बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाएं  चीन के साथ व्यापार घाटे में हैं। इसीलिए टैरिफ युद्ध पर आज के हालात के लिए जितना चीन जिम्मेदार है, उतने ही जिम्मेदार अमेरिका और यूरोप के मुल्क भी हैं जिन्होंने उस समय चीन को मनमानी करने दी।

भयंकर बढ़ेगी महंगाई!

अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक टकराव कोई नया मुद्दा नहीं है. 2018 से शुरू हुए व्यापार युद्ध में दोनों देशों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर वक्त-वक्त पर भारी टैरिफ लगाए. हालांकि अब यह विवाद एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है, जब अमेरिका ने चीन से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ को 125% तक बढ़ा दिया.

अमेरिका की तरफ से चीन के खिलाफ टैरिफ बढ़ोतरी करने का मुख्य मकसद घरेलू कंपनियों को निर्माण के लिए प्रेरित करना और चीनी सामान पर निर्भरता को कम करना है. ट्रंप का यह कदम केवल चीन ही नहीं, बल्कि अमेरिकी कंज्यूमर को भी प्रभावित करेगा, क्योंकि चीन से इम्पोर्ट होने वाला सस्ता सामान अब महंगा हो जाएगा. इससे अमेरिकी बाजार में महंगाई बढ़ सकती है.

अमेरिका चीन से क्या-क्या खरीदता है?
चीन, अमेरिका के सबसे बड़े निर्यातक देशों में से एक है. अमेरिकी बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की अच्छी-खासी सप्लाई चीन से होती है. इनमें खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान होते हैं, जिनमें स्मार्टफोन, कंप्यूटर, वीडियो गेम, लीथियम-आयन बैटरी आदि शामिल है.

होम डेकोर और फर्नीचर में लाइट फिक्स्चर, सीटें, गद्दे चीन से अमेरिका में निर्यात किए जाते हैं. टेक्सटाइल की बात करें तो स्वेटर, कपड़े और जूते अमेरिकी बाजार में बड़ी संख्या में चीन से पहुंचते हैं. अन्य प्रोडक्ट में प्लास्टिक के बने सामान, मोटर गाड़ी के पुर्जे, पार्टी सजावट की चीजें, मेडिकल उपकरण आदि भी चीन एक्सपोर्ट करता है. अब टैरिफ बढ़ने से इन वस्तुओं की कीमत अमेरिका में बढ़ जाएगी.

चीन अमेरिका से क्या-क्या आयात करता है?
चीन न केवल अमेरिकी बाजार में सामान बेचता है बल्कि उनसे खरीदता भी है. चीन अमेरिकी एग्रीकल्चर प्रोडक्ट और इंडस्ट्रियल मशीनरी का प्रमुख खरीदार है. अमेरिका से चीन जाने वाली मुख्य सामानों में एग्रीकल्चर प्रोडक्ट, एनर्जी रिसोर्स, इंडस्ट्रियल मशीनरी, मेडिसिन समेत स्क्रैप कॉपर, एसाइक्लिक हाइड्रोकार्बन, एथिलीन पॉलिमर शामिल है. इन क्षेत्रों में अमेरिकी निर्यात पर अगर चीन कोई पलटवार करता है तो अमेरिकी कृषि और टेक कंपनियों को बड़ा नुकसान हो सकता है.

व्यापार पर प्रभाव 
2024 में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार घाटा 295.4 बिलियन डॉलर रहा, जो 2023 की तुलना में 5.8% अधिक है. वहीं, अमेरिका से चीन को निर्यात में 2.9% की गिरावट आई, जबकि अमेरिका में चीनी सामान का आयात 2.8% बढ़ा. इस डेटा से स्पष्ट है कि विवाद से चीन को भी झटका लग रहा है, लेकिन अमेरिका में भी उपभोक्ता पर असर पड़ रहा है. अगर दोनों देश पीछे नहीं हटे तो यह व्यापार घाटा और ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का खतरा पैदा हो सकता है.

UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰