कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने अटारी बॉर्डर बंद करने का ऐलान कर दिया. इसका सबसे ज्यादा असर राजस्थान में रह रहे पाक विस्थापित हिंदू परिवारों पर पड़ रहा है. जो पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए थे. दो दिन पहले भारत सरकार की ओर सभी वीजा लेकर आए पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में भारत छोड़ने का आदेश दिया था.
पहलगाम हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपना लिया है. पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द कर दिया गया है और वापसी की तिथि भी तय कर दी गई है. इसपर एक पाकिस्तानी महिला ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हम 10 साल बाद आए और 15 दिन में वापस जा रहे हैं. करता कोई है और भरना किसी को पड़ता है. बता दें अटारी-वाघा बॉर्डर से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक वापस जा रहे हैं. एक पाकिस्तानी महिला ने कहा, ‘हम एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए डेढ़ महीने के वीजा पर यहां आए थे और 15 दिनों के भीतर वापस लौट रहे हैं. जो कुछ भी हुआ वह गलत था, किसी और ने यह काम किया और हमारे जैसे लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है. हम 10 साल बाद यहां आए थे. जिसने भी यह किया वह भाग गया, लेकिन हम इसके परिणाम भुगत रहे हैं.’
बात अगर जोधपुर की करे तो यहां पर जो, पाक विस्थापितों रहते हैं उनके लिए बड़ी चुनौती और परेशानी बन गई है. इन्हीं में से एक है सादोरी देवी 55 साल की उम्र में ये 13 लोगों के परिवार के साथ एक महीने पहले यहां बसने की उम्मीद से जोधपुर आई थी लेकिन अब इन्हें डर है कि कहीं ये अपने परिवार से दूर ना हो जाए.
सदौरी बाड़मेर की सीमा से लगे पाकिस्तान के सांगड़ की रहने वाली हैं. उन्होंने बताया कि उनका 13 लोगों का परिवार 27 मार्च को यही सोच कर आया था कि जोधपुर में कुछ दिन ठहर जाएंगे, तब तक परिवार के बाकी लोगों को भी वीजा मिल जाएगा. वीजे के बाद वे भी यहां आ जाएंगे. लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद माहौल तनावपूर्ण है. अब परिवार जल्द से जल्द पाकिस्तान के लिए रवाना हो रहा है.
राजस्थान में रह रहे बड़ी संख्या में पाक विस्थापित
बता दें कि पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए सबसे ज्यादा विस्थापित पश्चिमी राजस्थान में रह रहे हैं. इसमें बात की जाए तो जोधपुर, बाड़मेर व जैसलमेर सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में पाक विस्थापित निवास कर रहे हैं. जोधपुर की बात करें तो यहां बड़ी संख्या में ऐसे परिवार जोधपुर में चौखा, राजीव गांधी आवासीय योजना, सुंदर बालाजी, गंगाणा, काली बेरी, मंडोर इत्यादि क्षेत्र में अस्थाई रूप से कच्ची बस्ती में रह रहे हैं. इनमें से अधिकांश को भारतीय नागरिकता नहीं मिली है, इसी वजह इन परिवारों को डर है कि कहीं उन्हें भी भारत छोड़ने को मजबूर न कर दिया जाए.
पहलगाम की बैसरन घाटी में मासूम पर्यटकों का नरसंहार करने के बाद भी पाकिस्तान की ओर से नापाक हरकत लगातार की जा रही है. पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की ओर से 25 और 26 की दरम्यानी रात में फिर से सीजफायर उल्लंघन करते हुए गोलीबारी की गई. इंडियन आर्मी ने LoC पर पाकिस्तानियों को ऐसा जवाब दिया कि सब के सब डर से अपने बिल में जा छुपे. पाकिस्तानी सेना ने LoC पर कई पोस्ट से फायरिंग शुरू की थी. फायरिंग के लिए छोटे हथियारों का इस्तेमाल किया गया था. फायरिंग में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है. एक दिन पहले भी पाक ने फायरिंग की थी. पाकिस्तान ने छोटे हथियारों से तकरीबन 600 राउंड फायर किए थे. जवाब में भारतीय सेना ने 1300 राउंड फायर कर पाक फौज का मुंह बंद कर दिया. बारामूला के टूटमारी गली सेक्टर में पाक सेना ने फायरिंग की थी. इसके अलावा पाकिस्तान फौज ने पीओके में भी कई जगह फायरिंग की थी.
इसर ने बताया कि उनका इतिहास जोधपुर के बालेसर गांव से है. बालेसर में वंशावली भी है और पुश्तैनी जमीन भी है लेकिन दादा पाकिस्तान के सांगड़ में खेती-बाड़ी करते थे और बंटवारे के बाद वहीं रह गए. दादा से यहां के किस्से सुना करते थे. पाकिस्तान के हालातों को देखते हुए यहां रहने आए थे. इसर की पत्नी भागी ने बताया कि वu बड़े बेटे मनीष, अमेश, दिव्या, चंपा व विराम के साथ भारत आई हैं. उनका मन यहीं रहने का है, लेकिन बड़े बेटे मनीष की पत्नी पाकिस्तान में रह गई है. उनका वीजा लग गया होता तो हम कभी पाकिस्तान लौटने की नहीं सोचते. लेकिन अभी के हालातों में जल्द से जल्द वापस लौटना होगा.
सीमांत लोक संगठन के हिंदू सिंह सोढा ने बताया कि यहां 3 हजार पाक विस्थापित रह रहे हैं. जब तक उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं मिल जाती तब तक वह पाकिस्तानी नागरिक ही कहलाएंगे. भारत सरकार के इस आदेश के बाद सभी दहशत में हैं. सोडा ने बताया कि कई पाक विस्थापितों के कॉल आए हैं, वे कह रहे हैं कि स्थानीय अधिकारी फोन करके यह कह रहे हैं कि उनको पाकिस्तान लौटना होगा. ऐसे में हमने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि इन हिंदू परिवारों को शिथिलता मिलनी चाहिए. यह लंबे समय से भारत में रह रहे हैं, वहां जाकर उनकी जान जोखिम में आ जाएगी. मगर अब इस तरीके से उनको पाकिस्तान जाना पड़ रहा है तो दुख और दर्द उनके मन में भी है. मगर जो घटना हुई है उसकी निंदा वो भी करते हैं, मगर जिस तरीके से उस घटना का शिकार दिए हुए हैं तो कहीं ना कहीं दर्द उनके मन में आज भी देखने को मिलता है.
उधर, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में 20 साल के सैयद आदिल हुसैन शाह ने पर्यटकों को बचाने का प्रयास करते हुए अपनी जान गंवा दी. युवक के बलिदान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उसके परिवार से वीडियो कॉल पर बात की और उन्हें पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता सौंपी. सहायता राशि का चेक शिवसेना कार्यकर्ताओं और सीमा अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से सैयद आदिल हुसैन शाह के परिवार वालों को दिया. इस अवसर पर एकनाथ शिंदे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सैयद के परिवार से बातचीत की और हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हुए सांत्वना दी. पहलगाम में पर्यटकों को घुड़सवारी कराकर आजीविका चलाने वाले सैयद आदिल ने हमले के दौरान असाधारण बहादुरी का परिचय दिया. जब आतंकवादियों ने गोलीबारी की तो सैयद ने अपने साथ यात्रा कर रहे एक पर्यटक को बचाने के लिए एक आतंकवादी का हथियार छीनने की कोशिश की. संघर्ष के दौरान उन्हें गोली लग गई थी.
पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश है. पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिनमें भारत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को निकालना और नया वीजा नहीं जारी करना शामिल है. इस पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र के फैसले का सख्ती से पालन किया जाएगा. दरअसल, भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के सभी वीजा रद्द कर दिए हैं, जो 27 अप्रैल से प्रभावी होंगे. मेडिकल वीजा सिर्फ 29 अप्रैल तक वैध रहेंगे. कोई नया वीजा जारी नहीं किया जाएगा. दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘दिल्ली सरकार इन आदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कर रही है. उल्लंघन पर पूरी ईमानदारी से नजर रखी जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.’








