तीन साल में पहली बार अमेरिकी इकॉनोमी का हुआ ये हाल, क्या आनेवाली है मंदी?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ दुनियाभर में छेड़े गए टैरिफ वॉर की वजह से खुद उनका अपना ही देश इसकी चपेट में आ गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनोमी वाले अमेरिका में आने वाली मंदी का आहट तो नहीं? अमेरिका की हालत आज ये […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 1 मई 2025, 07:06 AM 3 मिनट read
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तीन साल में पहली बार अमेरिकी इकॉनोमी का हुआ ये हाल, क्या आनेवाली है मंदी?
Photo: UB India News Archive

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ दुनियाभर में छेड़े गए टैरिफ वॉर की वजह से खुद उनका अपना ही देश इसकी चपेट में आ गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनोमी  वाले अमेरिका में आने वाली मंदी का आहट तो नहीं?

अमेरिका की हालत आज ये हो गई है कि जनवरी से लेकर मार्च तक बीते तीन महीने के पहले क्वार्टर के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था 0.3 प्रतिशत खिसककर नीचे आ गई है. पिछले तीन वर्षों के दौरान पहली बार ये हाल देखने को मिला है. अमेरिकी वाणिज्य विभाग की तरफ से जारी अनुमान में बताया गया है.

पहले क्वार्टर में इस अर्थव्यवस्था की इस धीमी रफ्तार और गिरावट की एक वजह ये भी है कि ट्रंप के टैरिफ के लगने के डर से अमेरिकी कंपनियों ने बाहर से वहां पर सामानों का खूब आयात किया. जनवरी से मार्च के बीच अमेरिकी जडीपी में गिरावट की तुलना अगर एक साल पहले 2024 से करें तो उस वक्त अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की थी.

अमेरिकी इकॉनोमी का बुरा हाल

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इंपोर्ट करीब 41 प्रतिशत बढ़ गया, जो 2020 के बाद सबसे ज्यादा है. उपभोक्ता खर्च में भी तेजी के साथ गिरावट दिखी और ये पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर में रहे 4 प्रतिशत की तुलना में घटकर 1.8 प्रतिशत हो गया. अर्थव्यवस्था में आयी इस गिरावट का सीधा असर वहां के अमेरिकी शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है. जैसे ही जीडीपी के आंकड़े जारी किए गए डाउ जोन्स ने 400 अंकों का गोता लगाया. दूसरी तरफ S&P 500 में भी 1.5 प्रतिशत फिसल गया. जबकि नैस्डेक कंपोजिट में 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.

अमेरिकी में इतनी बड़ी तादा में आयात पहली बार 1972 और उसके बार कोरोना काल और उसके बाद अब किया गया है. हालांकि, दूसरे क्वार्टर में इसका उल्टा देखने को मिल सकता है और जीडीपी पर दबाव कम हो सकता है. कैपिटल इकॉनोमिक्स के पॉड अश्वर्थ का मानना है कि अप्रैल-जून के बीच इकॉनोमी 2 प्रतिशत का ग्रोथ कर वापसी कर सकती है. हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ट्रंप की तरफ से लगाए गए भारी भरकम टैक्स की वजह से दूसरी तिमाही में भी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा और मंदी का खतरा बढ़ रहा है.

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