ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने आतंकियों से कितने बदले लिए?

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में एयर स्ट्राइक करके बदला ले लिया है. इस कार्रवाई के दौरान नौ स्थानों पर स्थित 21 आतंकी शिविरों और प्रशिक्षण स्थलों को निशाना बनाया गया है. हालांकि, भारत की ओर से […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 8 मई 2025, 07:22 AM 5 मिनट read
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ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने आतंकियों से कितने बदले लिए?
Photo: UB India News Archive

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में एयर स्ट्राइक करके बदला ले लिया है. इस कार्रवाई के दौरान नौ स्थानों पर स्थित 21 आतंकी शिविरों और प्रशिक्षण स्थलों को निशाना बनाया गया है. हालांकि, भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर नाम से की गई यह कार्रवाई केवल पहलगाम आतंकवादी हमले का जवाब नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं. आइए जान लेते हैं कैसे और क्या है पूरी कहानी.

दक्षिण कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसारन में 22 अप्रैल को पुरुष पर्यटकों को महिलाओं और बच्चों से अलग करके उनकी हत्या कर दी गई थी. इनको धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया था, जिसमें 26 पर्यटकों की जान चली गई थी. इनमें एक नेपाली और स्थानीय कश्मीरी भी शामिल थे. पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक धड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट ने इस हमले की जानकारी ली थी. इसके बाद भारत ने हमले के लिए पाकिस्तान पर आरोप भी लगाए पर उसने इससे इनकार कर दिया था.

भारत ने चलाया ऑपरेशन सिंदूर

इस पर पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकियों पर सीधा निशाना साधा. ऑपरेशन सिंदूर के तहत रात में मिसाइलों से हमला कर आतंकियों के कई ठिकानों को भारत ने नेस्तनाबूद कर दिया, जिनमें बहावलपुर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय और मुरिदके में स्थित लश्कर-ए-तैयबा का मरकज भी शामिल है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस कार्रवाई में दर्जनों आतंकी मारे गए हैं पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

पुलवामा हमले का भी हिसाब चुकता

अपनी कार्रवाई के जरिए भारत ने न केवल पहलगाम हत्याकांड का बदला लिया है, बल्कि पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा अंजाम दिए गए अन्य आतंकी हमलों का भी हिसाब चुकता किया है. पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाकर भारत ने यह संदेश भी दिया है कि वह केवल न्याय की लड़ाई लड़ रहा है. दरअसल, इस कार्रवाई के दौरान ऐसे टारगेट चुने गए थे, जिनसे न केवल पहलगाम हमले का बदला लिया जा सके, बल्कि भारत में दूसरे हमलों की साजिश रचने वाले स्थलों को भी इस दौरान निशाना बनाया गया.

इस दौरान सबसे बड़ा हमला बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय मरकज सुभानअल्लाह पर किया गया. इसमें जैश के मुखिया मौलाना मसूद अजहर के परिवार के 10 लोग मारे गए. उसके चार करीबी भी इसमें खेत रहे. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित जैश के इसी मुख्यालय से साल 2019 में पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स के काफिले पर आत्मघाती हमले की साजिश रची गई थी. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे.

पठानकोठ हमले का साजिश स्थल तबाह

साल 2016 में पंजाब के पठानकोठ में स्थित भारतीय वायुसेना के बेस को निशाना बनाया गया था, जिसमें छह सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे. सात मई (07 मई 2025) की भोर में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के पंजाब में स्थित सरजल क्षेत्र के तेहरा कलां गांव में स्थित जैश के शिविर पर मिसाइलें बरसाईं. यह शिविर मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में दहशतगर्दी फैलाने के लिए आतंकवादियों के लॉन्च पैड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था.

यह शिविर जम्मू में स्थित सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सिर्फ छह किमी की दूरी पर स्थित था. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और जैश ने शकरगढ़ क्षेत्र में भूमिगत सुरंगें बना रखी हैं, जिनके जरिए आतंकवादी भारत में घुसाए जाते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया था कि इस शिविर को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि इसका सीधा संबंध साल 2016 में पठानकोट में हुए आतंकवादी हमले से था. पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले का पाकिस्तानी हैंडलर अली काशिफ जन सरजल में स्थित शिविर से ही आतंकी गतिविधियां संचालित करता था.

मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों का भी लिया बदला

पाकिस्तान में मुरिदके के नंगल सहदन में स्थित मरकज तैयबा को हाफिज सईद के आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय बताया जाता है. यह 82 एकड़ में फैला है, जहां हथियार रखे जाते हैं और आतंकवादियों को शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जाता रहा है. इस केंद्र का सीधा संबंध ओसामा बिन लादेन से है, जिसने साल 2000 में इस परिसर में एक मस्जिद और गेस्ट हाउस बनवाने के लिए धन दिया था.

साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले की तैयारी यहीं की गई थी. अजमल कसाब समेत अन्य आतंकवादियों ने यहीं पर दौरा-ए-रिब्बत (खुफिया प्रशिक्षण) हासिल किया था. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि 26/ 11 मुंबई हमले के साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली और तहव्वुर राणा भी कई अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मुरिदके का दौरा कर चुका है. हाफिज सईद के साथ ही जकी उर रहमान जैसे लश्कर के अन्य आतंकियों का निवास भी इसी जगह पर है. भारत ने इसे भी निशाना बनाकर नेस्तनाबूद कर दिया है.

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