चिराग पासवान का कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना!

बिहार में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। BJP की तरफ से कहा गया है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही एनडीए गठबंधन का चेहरा होंगे। हालांकि बीजेपी के किसी बड़े नेता की तरफ से ये साफ नहीं किया गया है कि चुनाव रिजल्ट के बाद […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 3 जून 2025, 06:47 AM 7 मिनट read
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चिराग पासवान का कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना!
Photo: UB India News Archive

बिहार में आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। BJP की तरफ से कहा गया है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही एनडीए गठबंधन का चेहरा होंगे। हालांकि बीजेपी के किसी बड़े नेता की तरफ से ये साफ नहीं किया गया है कि चुनाव रिजल्ट के बाद भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे। इसी बीच चिराग पासवान की दिल्ली छोड़कर बिहार की राजनीति में वापस आने की इच्छा को कई लोग नीतीश कुमार के लिए चुनौती मान रहे हैं।

चिराग पासवान, जो NDA के सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता हैं, अपनी पार्टी के लिए ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। वह विधानसभा की लगभग 45 सीटें चाहते हैं। उनका यह कदम JD(U) के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

नीतीश पर सेफ साइड बयान दे रहे चिराग

सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान जानते हैं कि अमित शाह जैसे बड़े नेता ने नीतीश कुमार का समर्थन किया है। वह मुख्यमंत्री की दौड़ में नहीं हैं। लेकिन वे चाहते हैं कि उनकी पार्टी को चुनाव में अच्छी सीटें मिलें और वह आगे बढ़े। चिराग पासवान ने सोमवार को विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, ‘मैं लंबे समय तक केंद्रीय राजनीति में नहीं रहना चाहता। मैं बिहार और बिहार के लोगों के लिए राजनीति में आया हूं। मैं ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ के अपने विजन को आगे बढ़ाना चाहता हूं।’

चिराग ने यह भी कहा कि अगर राष्ट्रीय नेताओं के चुनाव लड़ने से पार्टी को फायदा होता है, तो वे चुनाव लड़ेंगे। इससे NDA को बिहार में मजबूत होने में मदद मिलेगी। सूत्रों के अनुसार, चिराग चुनाव को लेकर गंभीर हैं। उनके जीजा और पार्टी सांसद अरुण भारती ने कहा कि वे किसी आरक्षित सीट से नहीं, बल्कि सामान्य सीट से चुनाव लड़ेंगे। वे समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।

नवादा सामान्य सीट से चिराग को चुनाव लड़ाने की तैयारी

LJP (रामविलास) के सूत्रों ने बताया कि चिराग की घोषणा से पहले ही, एजेंसियों के जरिए सर्वे कराया जा रहा था। इसका मकसद ऐसी सीट खोजना था, जहां से चिराग बड़ी जीत हासिल कर सकें। इससे NDA को भी फायदा होगा। चिराग पहले जमुई और हाजीपुर जैसी आरक्षित सीटों से लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। हाजीपुर सीट पर उनके पिता रामविलास पासवान चुनाव लड़ते थे। चर्चा है कि अब चिराग नवादा जैसी सामान्य सीट पर ध्यान दे रहे हैं।

अरुण भारती ने बताया, ‘वे नवादा से बिहार चुनाव लड़ेंगे। यह तय हो गया है।’ नवादा में 70,000 भूमिहार, 55,000 यादव, 50,000 SC/ST और 30,000 कुशवाहा और मुस्लिम वोटर हैं। यह एक मिली-जुली सीट है। इससे चिराग को बिहार की जाति की राजनीति से ऊपर उठकर एक चेहरा बनने में मदद मिलेगी।

चिराग को लेकर बीजेपी का रवैया आगे देखेंगे

चिराग पासवान की इन योजनाओं पर बिहार BJP के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा, ‘हर गठबंधन के नेता को अपनी पार्टी चलाने का अधिकार है। हमें इस पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।’

लेकिन सवाल यह है कि चिराग पासवान अभी इतना जोर क्यों लगा रहे हैं और क्या उन्हें 45 सीटें मिल पाएंगी? चिराग के करीबियों का कहना है कि उन्हें लगता है कि नीतीश कुमार की सेहत उन्हें पूरा कार्यकाल पूरा करने नहीं देगी। अगर NDA सत्ता में लौटती है, तो चिराग को उपमुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है। फिलहाल, उनकी पार्टी को 6% वोट मिलते हैं। वे इस बार इसे बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए वे 45 सीटों के लिए जोर लगा रहे हैं।

हालांकि, BJP के एक सूत्र ने सीटों की संख्या पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘जब यह बात आएगी, तब हम देखेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘गठबंधन में हर किसी को मांग करने का अधिकार है। पिछली बार, BJP और JD(U) के बीच सीटों का बंटवारा होने के बाद, BJP को मुकेश सहनी के नेतृत्व वाली VIP जैसी छोटी पार्टियों को अपनी सीटों में से सीटें देनी पड़ी थीं। अब कहां जगह है? लेकिन हां, जब सही समय आएगा, तो हमारे नेता खुले दिमाग से बात करेंगे।’

2020 में एनडीए का हिस्सा नहीं थे चिराग और कुशवाहा

2020 के चुनाव में, JD(U) ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 43 सीटें जीती थीं। वहीं, BJP ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा और 71 सीटें जीतीं। HAM ने सात में से चार सीटें जीतीं। VIP ने 11 में से चार सीटें जीतीं, जिससे NDA का स्कोर 125 हो गया। LJP, जो NDA का हिस्सा थी, चुनाव से पहले गठबंधन से अलग हो गई थी। RLSP भी गठबंधन का हिस्सा नहीं थी।

चिराग पासवान की रणनीति से बिहार की राजनीति में हलचल मची हुई है। वे अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहते हैं और सरकार में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं। लेकिन BJP और JD(U) के लिए यह देखना होगा कि वे चिराग की मांगों को कैसे पूरा करते हैं। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सभी राजनीतिक दलों की निगाहें अब सीटों के बंटवारे पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी कितनी सीटें जीतती है और किसकी सरकार बनती है।

CM नहीं डेप्यटी सीएम पर पोस्ट चिराग की नजर

एलजेपी (आर) की तरफ से पोस्टर लगाकर चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री चेहरा बताया जा रहा है। लेकिन जानकार मानते हैं कि चिराग की प्लानिंग कुछ दूसरी है। सूत्र बताते हैं कि चिराग पासवान जैसे नेता भली-भांति समझते हैं कि मौजूदा राजनीतिक हालात में उनका बिहार का मुख्यमंत्री बनना इतना आसान नहीं है। क्योंकि वह समझते हैं कि एनडीए में रहते हुए बीजेपी से ज्यादा ताकत हासिल करना आसान काम नहीं है।

ऐसे में चिराग जब बिहार की राजनीति करने को इच्छुक हैं तो वह चाहेंगे कि अगर अगली बनने वाली NDA की सरकार में उन्हें डेप्युटी सीएम का पद ऑफर हो तो यह भी कोई खराब राजनीतिक सौदा नहीं होगा। अगर चिराग डेप्युटी सीएम का पद पाते हैं तो उन्हें और उनकी पार्टी को पहली बार खुलकर बिहार में काम करने का मौका मिलेगा।

बीजेपी और जेडीयू के बीच तालमेल रखना चिराग की चुनौती

चिराग पासवान और उनकी पार्टी का दावा है कि ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नारा युवाओं को आकर्षित कर रहा है। वे बिहार को विकसित और समृद्ध बनाना चाहते हैं। उन्होंने युवाओं को रोजगार देने और शिक्षा को बेहतर बनाने का वादा किया है। हालांकि, चिराग पासवान के सामने कई चुनौतियां हैं। उन्हें BJP और JD(U) के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्हें अपनी पार्टी को मजबूत करना होगा और ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतनी होंगी। उन्हें बिहार की जनता का विश्वास जीतना होगा और उन्हें यह दिखाना होगा कि वे बिहार को बेहतर बना सकते हैं।

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