क्या चीन रोक सकता है ब्रह्मपुत्र नदी का जल प्रवाह?

जब भी भारत से सामने बैठकर बात करने की बारी आती है तो पाकिस्तान अपने दोस्तों की तरफ भागता है. खुद उसकी इतनी हैसियत है नहीं कि सीधे बात कर सके तो वो तुर्किए या चीन का सहारा लेता है. अब फिर उसने यही हरकत की है और चीन के नाम पर गीदड़भभकी दे रहा […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 4 जून 2025, 06:15 AM 4 मिनट read
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क्या चीन रोक सकता है ब्रह्मपुत्र नदी का जल प्रवाह?
Photo: UB India News Archive

जब भी भारत से सामने बैठकर बात करने की बारी आती है तो पाकिस्तान अपने दोस्तों की तरफ भागता है. खुद उसकी इतनी हैसियत है नहीं कि सीधे बात कर सके तो वो तुर्किए या चीन का सहारा लेता है. अब फिर उसने यही हरकत की है और चीन के नाम पर गीदड़भभकी दे रहा है. ऑपरेशन सिंदूर में करारी शिकस्त मिलने के बाद जब उसको सिंधु नदी के पानी का डर सताने लगा है तो उसने ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर भारत को डराने की कोशिश की है.

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा एहसान अफजल ने धमकी दी कि अगर भारत सिंधु नदी का पानी रोकता है तो चीन भी भारत के साथ ऐसा कर सकता है, लेकिन अगर ऐसी स्थिति आई तो पूरी दुनिया में जंग छिड़ जाएगी. उनकी इस धमकी का असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार (3 जून, 2025) को मुंह तोड़ जवाब दिया और आंकड़ों के साथ बताया कि क्या चीन ऐसा कर सकता है. हालांकि, चीन की तरफ से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है.

क्या चीन रोक सकता है ब्रह्मपुत्र नदी का जल प्रवाह?

चीन भारत में ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को पूरी तरह नहीं रोक सकता है क्योंकि इसमें भारत की हिस्सेदारी 86 परसेंट है, जबकि चीन की 20 या 30 परसेंट ही है. आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि क्यों चीन ब्रह्मपुत्र नदी के पूरे प्रवाह को भारत के लिए नहीं रोक सकता है-

ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह में चीन की कितनी हिस्सेदारी?
natstrat.org वेबसाइट पर छपे एक आर्टिकल के अनुसार ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन के कुल जल प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी सिर्फ 20-30 परसेंट ही है. इंडस वॉटर के पूर्व कमिश्नर और भोपाल के केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट अथॉरिटी के सलाहकार पीके सक्सेना और ब्रह्मपुत्र और बराक के पूर्व कमिश्नर ने इस आर्टिकल में बताया है कि ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह में चीन और भारत की कितनी-कितनी हिस्सेदारी है.

86 परसेंट जल प्रवाह भारतीय पूर्वोत्तर राज्यों की वजह से
आर्टिकल के अनुसार चीन की अगर बात करें तो जब ब्रह्मपुत्र नदी उसके एरिया में रहती है तो तिब्बत के जरिए ही इसमें जल प्रवाह होता है. हर साल तिब्बत में होने वाली अल्पवर्षा और 4-12 इंच तक की बर्फबारी से ही मुख्यरूप से नदी में जल प्रवाह होता है.

उन्होंने बताया कि भूटान भले छोटा सा देश है, लेकिन उसका योगदान भी चीन के बराबर है. यह भी जल प्रवाह में 21 परसेंट की हिस्सेदारी देता है, जबकि यहां ब्रह्मपुत्र नदी का सिर्फ 6.7 परसेंट हिस्सा ही बहता है. भारत में नदी का 34.2 प्रतिशत एरिया है, लेकिन नदी के पानी में सबसे ज्यादा 39 प्रतिशत की हिस्सेदारी भारत की है, जो बारिश और मानसून के दौरान 86 परसेंट तक पहुंच जाता है.

लेखकों का कहना है कि भारत में प्रवेश करने से पहले जल प्रवाह सिर्फ 14 परसेंट ही होता है, जो यहां आने के बाद पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के कारण 86 परसेंट तक पहुंच जाता है. इससे साफ है कि ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह में चीन का योगदान न के बराबर है.

हिमंत बिस्व सरमा ने दिया करारा जवाब
हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए डिटेल में ब्रह्मपुत्र नदी पर जानकारी शेयर की थी. उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुत्र ऐसी नदी नहीं है जिस पर भारत निर्भर है, यह एक वर्षा आधारित भारतीय नदी है, जो भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद और मजबूत हो जाती है.

असम सीएम ने कहा, ‘ब्रह्मपुत्र के कुल प्रवाह में चीन का योगदान केवल 30-35 प्रतिशत है, जो मुख्यतः हिमनदों के पिघलने और तिब्बत में सीमित वर्षा के माध्यम से होता है. बाकी का 65-70 प्रतिशत हिस्सा भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड और मेघालय में होने वाली मूसलाधार मानसूनी वर्षा के कारण मिलता है.’

उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा (तूतिंग) पर ब्रह्मपुत्र नदी का प्रवाह लगभग 2,000 से 3,000 घन मीटर प्रति सेकेंड होता है, जबकि असम के मैदानी इलाकों जैसे गुवाहाटी में मानसून के दौरान यह प्रवाह बढ़कर 15,000 से 20,000 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच जाता है.

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