बिहार चुनाव के लिए भाजपा ने कमर कस ली है. भाजपा अपनी रणनीति भी तय कर चुकी है. कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं, बेहतर जाति समीकरण, ऑपरेशन सिंदूर के कारण पॉजिटिव माहौल, जाति जनगणना कार्ड और नीतीश कुमार के प्रति सहानुभूति… बिहार चुनाव लिए यह बीजेपी की रणनीति है. हालांकि, बीजेपी यह सुनिश्चित कर रही […]
By UB India News • Patna, Bihar गुरुवार, 12 जून 2025, 05:27 AM • 4 मिनट read
बिहार चुनाव के लिए भाजपा ने कमर कस ली है. भाजपा अपनी रणनीति भी तय कर चुकी है. कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं, बेहतर जाति समीकरण, ऑपरेशन सिंदूर के कारण पॉजिटिव माहौल, जाति जनगणना कार्ड और नीतीश कुमार के प्रति सहानुभूति… बिहार चुनाव लिए यह बीजेपी की रणनीति है. हालांकि, बीजेपी यह सुनिश्चित कर रही है कि किसी भी तरह की लापरवाही या अति आत्मविश्वास न हो, क्योंकि चुनाव में कठिन जातीय बैटल होने की उम्मीद है.
टॉप बीजेपी सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि एनडीए के पक्ष में बिहार में काफी अनुकूल माहौल है और वे इस अक्टूबर में नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहे हैं. लेकिन पार्टी सतर्क है और अति आत्मविश्वास से बच रही है. यह जानते हुए कि बिहार में कास्ट बैटल है. जाति आधारित वोटिंग होती रही है और आरजेडी इस बार अपने यादव-मुस्लिम वोट बैंक के अलावा अन्य जाति समूहों को आक्रामक रूप से लुभा रही है.
सूत्रों ने कहा कि बिहार में निश्चित रूप से कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं है. लोग एनडीए सरकार के तहत बिहार में किए गए विकास की सराहना कर रहे हैं. टॉप बीजेपी सूत्र ने कहा कि बीजेपी मानती है कि लालू की राजद आगामी विधानसभा चुनावों में यादव-मुस्लिम जाति के बाहर के उम्मीदवारों को अधिक टिकट देकर अखिलेश यादव की 2024 लोकसभा वाली चुनावी रणनीति की दोहराने की कोशिश कर रही है.
अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने पिछले साल उत्तर प्रदेश में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी या यूं कहिए कि चोट पहुंचाई थी. समाजवादी पार्टी ने गैर-यादव ओबीसी को अधिक टिकट दिए और 37 लोकसभा सीटें जीतीं. यह सपा का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था.
भाजपा का बिहार के लिए पांच प्लान
➡️ अच्छा कास्ट कॉम्बिनेशन
➡️ ऑपरेशन सिंदूर के बाद पॉजिटिव माहौल
➡️ जाति जगणनना वाला दांव
➡️ नीतीश के लिए सहानुभूति
अखिलेश वाले दांव का है काट
वहीं, भाजपा के एक अन्य सूत्र ने कहा कि एनडीए के पास विपक्ष की तुलना में मजबूत कास्ट कॉन्बिनेशन है. हाल ही में जाति जनगणना की घोषणा से भी एनडीए को लाभ होने की उम्मीद है. सूत्र ने कहा, ‘विपक्ष की ओर से नीतीश कुमार के स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है, लेकिन उन्हें इन बिहार चुनावों में काफी सहानुभूति वोट मिलने की संभावना है.’
ऑपरेशन सिंदूर का मिलेगा फायदा
वैसे भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद चुनाव कराने वाला बिहार पहला स्टेट होगा. ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भाजपा को बिहार से पॉजिटिव फीडबैक मिल रहे हैं. यहां के लोगों में पाकिस्तान विरोधी भावना मजबूत है. प्रधानमंत्री ने अप्रैल से अब तक बिहार में दो रैलियां की हैं. इन दोनों रैलियों में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई पर बात की है. अब पीएम नरेंद्र मोदी 20 जून को सिवान में होंगे, जो आरजेडी का गढ़ है.
कांग्रेस की संभावनाएं धुंधली, चिराग की चमक तेज
बीजेपी को उम्मीद है कि आरजेडी फिर से कांग्रेस को बड़ी संख्या में सीटें दे सकती है. पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने 144 सीटों में से 75 सीटें जीतकर एक अच्छा स्ट्राइक रेट हासिल किया था. मगर कांग्रेस ने 70 सीटों में से केवल 19 सीटें जीती थीं. वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) ने केवल 43 सीटें जीतीं, क्योंकि चिराग पासवान की पार्टी ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़कर इसे काफी नुकसान पहुंचाया था.
टॉप बीजेपी सूत्र ने एक अहम बदलाव पर ध्यान दिया. उन्होंने बताया कि चिराग अब एनडीए के साथ हैं और 2024 लोकसभा चुनावों में अच्छा स्ट्राइक रेट दिखाया था. उनकी पार्टी ने पांच सीटें जीती थीं.
चिराग पासवान ने हाल ही में कहा कि वह सामान्य सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और पार्टी के लिए डिप्टी सीएम पद के लिए प्रयासरत हैं. बीजेपी सूत्र ने कहा, ‘उनका पटना-हाजीपुर क्षेत्र में अच्छा वोट बेस है और उनकी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं.’
एनडीए में नहीं फंसेगा सीटों पर पेच
वहीं, दूसरे बीजेपी सूत्र ने कहा कि नीतीश की जदयू और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की महत्वकांक्षाओं के बावजूद बिहार में सीटों का बंटवारा सुचारू रूप से होगा. सूत्र ने कहा, ‘हमारे नेता अब तक नीतीश कुमार हैं.’ उन्होंने कहा कि यहां तक कि आरजेडी भी जानती है कि कांग्रेस को बड़ी संख्या में सीटें देने पर विपक्षी खेमे में प्रदर्शन कमजोर रहेगा, जैसा कि पिछले चुनावों में देखा गया है.