क्या खत्म हो गया ईरान से एटमी खतरा? इस जंग से इजरायल और अमेरिका ने क्या-क्या हासिल किया , ईरान ने कैसे बना ली बढ़त?

ईरान और इजरायल के बीच 12 बाद आखिरकार जंग थम चुकी है. जंग में अमेरिका की एंट्री ने इसे ज्यादा घातक बना दिया था, जब बंकर बस्टर बमों ने ईरानी के तीन अहम परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर का ऐलान कर दिया […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 24 जून 2025, 10:43 AM 5 मिनट read
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क्या खत्म हो गया ईरान से एटमी खतरा? इस जंग से इजरायल और अमेरिका ने क्या-क्या हासिल किया  , ईरान ने कैसे बना ली बढ़त?
Photo: UB India News Archive

ईरान और इजरायल के बीच 12 बाद आखिरकार जंग थम चुकी है. जंग में अमेरिका की एंट्री ने इसे ज्यादा घातक बना दिया था, जब बंकर बस्टर बमों ने ईरानी के तीन अहम परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर का ऐलान कर दिया और चेतावनी भी दी कि कोई भी पक्ष इसका उल्लंघन न करे. लेकिन ईरान की तरफ से जिस परमाणु खतरे को लेकर जंग की शुरुआत हुई थी, क्या वह खतरा अब पूरी तरह खत्म हो चुका है.

पिछले 12 दिन से ईरान-इजराइल के बीच खूनी संघर्ष चल रहा था. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार रात ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले की मंजूरी देकर सबको हैरान कर दिया. लगा कि अब अमेरिका भी सीधा इस जंग में कूद गया है. लेकिन सिर्फ 48 घंटे बाद सोमवार को ट्रंप ने एक और चौंकाने वाली घोषणा कर दी ईरान और इजराइल ने पूरी तरह से सीजफायर पर सहमति बना ली है.

जंग के बाद उठे अहम सवाल

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क्या ईरान-इजरायल की जंग अमेरिका ने फिक्स की थी? क्या अमेरिका का टारगेट ईरान के 3 परमाणु ठिकाने थे? क्या न्यूक्लियर डील में नाकाम अमेरिका ने लिमिटेड जंग कराई? क्या ईरान की परमाणु क्षमता अब खत्म हो गई? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब सीजफायर के बाद जरूर खोजे जाएंगे. आखिर 12 12 दिन तक चली इस जंग का मकसद क्या था और क्या उसे हासिल कर लिया गया है. जंग में ईरान से लेकर इजरायल तक सैकड़ों टन गोला-बारूद फूंकने के बाद क्या इजरायल को ईरान से पैदा हुआ एटमी खतरा खत्म हो गया?

इजरायल पर सीजफायर के ठीक पहले तक किये गए प्रहार और उसमें गई चार लोगों की जान से क्या ईरान का बदला पूरा हो गया है. जंग में ईरान के एक हजार से ज्यादा नागरिकों की जान चली गई. उसके टॉप सैन्य कमांडर्स से लेकर प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों को इजरायल ने मौत के घाट उतार दिया. ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकाने फोर्डो, नतांज और इस्फहान को अमेरिकी बमबारी से काफी नुकसान पहुंचा है. क्या यही राष्ट्रपति ट्रंप के लिए इस जंग का हासिल है?

हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने इसे तुरंत सार्वजनिक रूप से कबूल नहीं किया और तब तक मिसाइलें उड़ती रहीं. बाद में इजराइल की तरफ से सीजफायर पर सहमति की घोषणा की. उसके कुछ देर बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने दुश्मन को पछताने पर मजबूर कर दिया. सवाल ये है कि इतने नुकसान 10 वैज्ञानिक और करीब 20 सैन्य अफसर गंवाने के बावजूद ईरान ने कैसे बाजी पलट दी?

आखिरी दम तक डटा रहा ईरान

ईरान ने कभी सीधे तौर पर हार नहीं मानी. उसने हर हमले का जवाब दिया और आखिरी वक्त तक मोर्चे पर डटा रहा. उसकी रणनीति ये थी कि जब तक दुश्मन थक न जाए, तब तक पीछे नहीं हटना. ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को एक ऐसे देश के तौर पर पेश किया जिस पर यह युद्ध थोपा गया. उसने बार-बार कहा कि इजराइल और अमेरिका उसे उकसा रहे हैं. इससे उसे मुस्लिम देशों की सहानुभूति और नैतिक समर्थन मिला.

यूरेनियम को वक्त रहते शिफ्ट किया

जब अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया, तब तक ईरान अपना 400 किलो संवर्धित यूरेनियम पहले ही किसी सुरक्षित जगह पहुंचा चुका था. इससे उसकी न्यूक्लियर तैयारी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. ईरान ने इजराइल के सिविल इलाकों में हमला कर उसे मानसिक दबाव में डाला. ये सीधे तौर पर संदेश था कि अब जंग सिर्फ सीमाओं पर नहीं रहेगी. इसके साथ ही उसने खुद की तुलना गाजा से करके मुस्लिम दुनिया में खुद को अगुवा की तरह पेश किया.

मोसाद नेटवर्क को किया कमजोर

ईरान ने इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के नेटवर्क पर हमला कर उसे कमजोर किया. कुछ स्लीपर एजेंट्स को पकड़ा गया और कुछ को खत्म कर दिया गया. इससे इजराइल को रणनीतिक नुकसान हुआ. इजराइल और अमेरिका की कोशिश थी कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो, लेकिन ईरान की सरकार इस दबाव में नहीं आई. उल्टा, उसने अंदरूनी एकता को और मज़बूत कर लिया. ईरान ने भले ही अपने कुछ खास लोगों को खोया हो, लेकिन रणनीतिक तौर पर उसने इस जंग में बड़ी बढ़त बना ली है. उसने यह साबित कर दिया कि सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि सोच, चालबाज़ी और सब्र से भी जंग जीती जाती है.

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