इजरायल-ईरान सीजफायर ट्रंप का नोबेल वाला दांव!

इजरायल-ईरान के बीच बीते 12 दिनों से चला आ रहा संघर्ष सीजफायर की ओर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया। उन्होंने इसका श्रेय संकेतों में लेते हुए कहा कि इजरायल और ईरान दोनों ही शांति का प्रस्ताव लेकर मेरे पास आए थे। दोनों करीब-करीब एक साथ उनके पास पहुंचे और उन्होंने शांति […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 24 जून 2025, 11:52 AM 7 मिनट read
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इजरायल-ईरान सीजफायर ट्रंप का नोबेल वाला दांव!
Photo: UB India News Archive

इजरायल-ईरान के बीच बीते 12 दिनों से चला आ रहा संघर्ष सीजफायर की ओर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया। उन्होंने इसका श्रेय संकेतों में लेते हुए कहा कि इजरायल और ईरान दोनों ही शांति का प्रस्ताव लेकर मेरे पास आए थे। दोनों करीब-करीब एक साथ उनके पास पहुंचे और उन्होंने शांति का प्रस्ताव रखा। इससे पहले भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम का भी ट्रंप ने क्रेडिट लेने की कोशिश की थी। मगर, भारत ने साफ तौर पर नकार दिया था कि उसके और पाकिस्तान के बीच कोई तीसरा देश मध्यस्थ नहीं बना था। जानते हैं नोबेल पुरस्कार को लेकर क्या रहे हैं विवाद और महात्मा गांधी को लेकर क्या विवाद होते हैं?

इन चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को मिला है नोबेल

अब तक चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। थियोडोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, जिमी कार्टर और आखिरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को यह सम्मान मिला था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल गोर को 2007 में जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाली संस्था एन इनकन्वीनिएंट ट्रुथ के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। इससे पहले साल 1973 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर को वियतनाम युद्ध खत्म कराने में अहम भूमिका के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।

रूस-जापान जंग रुकवाने के लिए रूजवेल्ट को मिला था नोबेल

थियोडोर रूजवेल्ट अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति थे। 1901 में राष्ट्रपति मैकिनले की हत्या के बाद उन्हें अमेरिका का राष्ट्रपति बनाया गया था। रूस-जापान युद्ध को ख़त्म करवाने के लिए इन्हें 1906 में नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया था।

यूएन की स्थापना के लिए विल्सन को मिला अवॉर्ड

वुडरो विल्सन अमेरिका के 28वें राष्ट्रपति थे। वह 1913 से लेकर 1921 तक पद पर रहे। विल्सन को 1919 में राष्ट्र संघ की स्थापना में उनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। विल्सन ने प्रथम विश्वयुद्ध रुकवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। उस वक्त संयुक्त राष्ट्र संघ को लीग ऑफ नेशंस कहा जाता था।

क्लाइमेट चेंज के लिए कार्टर को सम्मान

जिमी कार्टर साल 1977 से लेकर 1981 तक अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति थे। कार्टर को साल 2002 में विश्व शांति, जलवायु परिवर्तन और मानवाधिकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका 100 साल की उम्र में देहांत हुआ था और वे अमेरिकी इतिहास में सबसे ज्यादा समय तक जीवित रहने वाले पूर्व राष्ट्रपति थे।

कूटनीतिक प्रयासों के लिए ओबामा को सम्मान

बराक ओबामा अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति थे। साल 2009 में ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन्हें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और देशों के बीच सहयोग को मज़बूत करने के उनके प्रयासों के लिए दिया गया था।

हर कोई नहीं कर सकता है नोबेल के लिए नामांकन

नोबेल पुरस्कार के लिए हर साल एक फरवरी तक नामांकन जमा किए जाते हैं। केवल कुछ चुनिंदा लोग और संस्थाएं ही किसी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित कर सकती हैं। जैसे-देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, पूर्व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, संसद सदस्य, जज और कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य वगैरह। ये लोग नामांकन पत्र भेजते हैं जिसमें यह बताया जाता है कि क्यों वह व्यक्ति या संगठन शांति पुरस्कार का हकदार है।

ऐसे चुना जाता है विजेता का नाम, जान लीजिए

इसके बाद पांच सदस्यों की नोबेल समिति नामांकनों की जांच करती है और एक शॉर्टलिस्ट तैयार करती है। समिति विशेषज्ञों से सलाह ले सकती है। समिति पूरी जांच और विचार-विमर्श के बाद विजेता चुनती है। आमतौर पर विजेता के नाम की घोषणा हर साल अक्टूबर में होती है। पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को ओस्लो, नॉर्वे में आयोजित होता है, जहां विजेता को मेडल, सर्टिफ़िकेट और नकद पुरस्कार राशि (करीब 9 करोड़ रुपये) दी जाती है।

50 साल तक नामितों के नाम उजागर नहीं होते

नोबेल शांति पुरस्कार उन व्यक्तियों या संगठनों को मिलता है, जिन्होंने राष्ट्रों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने, सेना की तैनाती कम करने या शांति सम्मेलनों के आयोजन और प्रचार में बेहतरीन काम किया हो। पुरस्कार के लिए हर साल एक फरवरी तक नामांकन जमा किए जाते हैं। नोबेल फ़ाउंडेशन के नियमों के मुताबिक शॉर्टलिस्ट किए गए नामों को 50 साल तक सार्वजनिक नहीं किया जाता। कोई भी खुद को नामांकित नहीं कर सकता है।

जब ओबामा रह गए थे हैरान, पूछा-किसलिए

जब बराक ओबामा को नोबेल पुरस्कार दिया गया तो कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। ख़ुद ओबामा इस पुरस्कार के मिलने से हैरान थे। उन्होंने साल 2020 में प्रकाशित अपनी जीवनी में लिखा कि पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्होंने उनकी पहली प्रतिक्रिया थी-किसलिए। वो नौ महीने पहले ही राष्ट्रपति बने थे और आलोचकों का कहना था कि ये जल्दी में लिया गया फ़ैसला था। ओबामा के पद ग्रहण करने के सिर्फ 12 दिनों बाद ही नोबेल पुरस्कार के नॉमिनेशन की प्रक्रिया खत्म हो गई थी। साल 2015 में नोबेल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर गेर लुंडेस्टन ने बीबीसी को बताया था कि जिस कमेटी ने ये फैसला लिया था। उन्हें बाद में इस पर अफसोस हुआ था।

यासिर अराफात को नोबेल पर हुआ था विवाद

पूर्व फलस्तीनी नेता यासिर अराफात को 1994 में ये पुरस्कार इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री येत्जाक रॉबिन और इजरायल के विदेश मंत्री शिमोन पेरेज के साथ ओस्लो शांति समझौते के लिए दिया गया था। समझौता इजरायल-फलस्तीनी विवाद को सुलझाने की एक उम्मीद लेकर आया था। इसकी उस वक्त बहुत आलोचना हुई थी, क्योंकि हमास को चरमपंथी संगठन और अराफात को उसका आका माना जाता था।

रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ रहने वालीं सू ची को नोबेल

साल 1991 में सू ची को म्यांमार के सैन्य शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए इस पुरस्कार से नवाज़ा गया। लेकिन 20 साल बाद, आंग सान सू ची पर सर्वोच्च नेता रहते हुए रोहिंग्या मुसलमानों के मानवाधिकारों का हनन और उनकी हत्या के आरोप लगे. यूएन ने इसे ‘नरसंहार’ बताया। सू ची से नोबेल सम्मान वापस लेने की भी मांग उठी लेकिन नोबेल कमेटी के नियम ऐसे नहीं हैं।

अबी अहमद को नोबेल देने पर खूब हुआ विवाद

दिसंबर 2020 में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को इस पुरस्कार के नवाजा गया। ये पुरस्कार उन्हें पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ लंबे समय से चल रहे विवादों को सुलझाने की कोशिश के लिए दिया गया था। लेकिन एक साल के बाद ही इस फैसले पर सवाल उठने लगे। अंतरराष्ट्रीय समुदायों ने सवाल उठाए कि क्या अहमद द्वारा उत्तरी तिगरी में की गई सैन्य तैनाती सही थी। वहां लड़ते हुए हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। संयुक्त राष्ट्र ने इसे दुखद त्रासदी करार दिया था।

गांधी को नहीं मिला नोबेल शांति पुरस्कार

नोबेल शांति पुरस्कार पर सबसे बड़ा विवाद महात्मा गांधी को यह सम्मान न दिए जाने को लेकर होता रहा है। कई बार नॉमिनेट किए जाने के बावजूद गांधी को ये सम्मान नहीं दिया गया। साल 2006 में नॉर्वे के इतिहासकार और तब के शांति पुरस्कार की कमेटी के अध्यक्ष गेर लुंडेस्टैड ने कहा था कि गांधी की उपलब्धियों को सम्मान नहीं देना नोबेल इतिहास की सबसे बड़ी चूक में से एक है।

क्या ट्रंप ने अब नोबेल वाला दांव चला है

माना जा रहा है कि ट्रंप मन ही मन नोबेल पुरस्कार की चाहत रखते हैं। यही वजह है कि वह पहले तो दो देशों के बीच जंग को भड़काते हैं और फिर कुछ दिन बाद अचानक सीजफायर का ऐलान कर देते हैं। ट्रंप बार-बार खुद को शांति का मसीहा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम का क्रेडिट ट्रंप ने खुद लिया था। वैसे भी पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल के लिए नामित कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सीजफायर के बहाने ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की फिराक में हैं।

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