345 पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करेगा चुनाव आयोग

भारत के चुनाव आयोग ने 345 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों (RUPPs) को अपनी लिस्ट से हटाने का फैसला किया है। ये वे दल हैं जो पिछले 6 सालों में एक भी चुनाव नहीं लड़े और इनके पंजीकृत पते पर कोई कार्यालय नहीं मिला। चुनाव आयोग ने बताया कि देश भर के विभिन्न राज्यों और […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 26 जून 2025, 01:20 PM 3 मिनट read
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345 पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करेगा चुनाव आयोग
Photo: UB India News Archive

भारत के चुनाव आयोग ने 345 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों (RUPPs) को अपनी लिस्ट से हटाने का फैसला किया है। ये वे दल हैं जो पिछले 6 सालों में एक भी चुनाव नहीं लड़े और इनके पंजीकृत पते पर कोई कार्यालय नहीं मिला। चुनाव आयोग ने बताया कि देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले इन 345 दलों ने रजिस्टर्ड अनरजिस्टर पॉलिटिकल पार्टी के रूप में बने रहने की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं किया। आयोग के पास वर्तमान में 2800 से ज्यादा RUPPs रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इनमें से कई दल न तो चुनाव लड़ रहे हैं और न ही अपनी मौजूदगी साबित कर पा रहे हैं।

पंजीकरण रद्द करने के क्या हैं नियम?

चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A और चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत, कोई भी पंजीकृत दल अगर लगातार 6 साल तक लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव में हिस्सा नहीं लेता, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। ऐसे दल अक्सर केवल कागजों पर मौजूद रहते हैं और टैक्स छूट, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। आयोग ने इन दलों के पंजीकृत पतों का भौतिक सत्यापन किया, जिसमें ये दल मौजूद नहीं पाए गए।

2022 में 86 RUPPs को हटाया गया था

चुनाव आयोग ने अपने बयान में बताया कि ये 345 दल देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। इनमें से कई दलों ने अपने पते में बदलाव की सूचना भी आयोग को नहीं दी, जो नियमों का उल्लंघन है। इससे पहले 2022 में आयोग ने 86 गैर-मौजूद RUPPs को हटाया था और 253 को ‘निष्क्रिय’ घोषित किया था। इस बार भी आयोग ने सख्ती दिखाते हुए निष्क्रिय दलों को हटाने का फैसला किया है। इस कदम से इन दलों को मिलने वाले लाभ जैसे मुफ्त चुनाव चिन्ह और अन्य सुविधाएं, बंद हो जाएंगी। यह कदम न केवल राजनीतिक प्रक्रिया को मजबूत करेगा, बल्कि मतदाताओं का भरोसा भी बढ़ाएगा।

क्या है RUPP और क्यों हो रही कार्रवाई?

बता दें कि रजिस्टर्ड अनरजिस्टर पॉलिटिकल पार्टियां (RUPPs) वे दल हैं, जो या तो नए रजिस्टर्ड हैं, या जिन्होंने विधानसभा या लोकसभा चुनावों में पर्याप्त वोट हासिल नहीं किए कि उन्हें राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सके, या फिर जिन्होंने रजिस्ट्रेशन के बाद कभी चुनाव ही नहीं लड़ा। ऐसे दलों को मान्यता प्राप्त दलों की तरह सभी सुविधाएं नहीं मिलतीं, लेकिन इन्हें कुछ अधिकार मिलते हैं, जैसे सामान्य चुनाव चिह्न (कॉमन सिंबल) का आवंटन। चुनाव आयोग ने पाया कि कई RUPPs इन सुविधाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं इसलिए उनके ऊपर ये एक्शन लिया जा रहा है।

‘भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी’

आयोग ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रखेगा ताकि केवल सक्रिय और वैध दल ही पंजीकृत रहें। प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत, पंजीकृत दलों को अपने कार्यालय, पदाधिकारियों और अन्य विवरणों में बदलाव की सूचना आयोग को देनी होती है। अगर कोई दल छह साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ता या उसका कार्यालय सत्यापन में नहीं मिलता, तो उसे गैर-मौजूद मानकर हटाया जा सकता है। यह नियम धन शोधन और चुनावी धोखाधड़ी को रोकने के लिए बनाया गया है।

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