एक ओर मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान का तनाव फिलहाल शात दिख रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ पूर्वी यूरोप में रूस-यूक्रेन युद्ध और भी उग्र होता जा रहा है. ईरान-इजरायल के बीच सीजफायर के बाद अब जुबानी जंग जारी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेताते हुए कहा कि अगर वे सच में कोई समझौता चाहते हैं, तो उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई के प्रति अपनी ‘अस्वीकार्य’ भाषा छोड़नी होगी. ट्रंप ने इससे पहले खामेनेई को खुली चुनौती दी थी और ईरान पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था. वहीं, अमेरिका द्वारा ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हाल ही में किए गए हमलों पर भी बड़ा खुलासा हुआ है. अमेरिका ने इस्फहान जैसे गहरे भूमिगत ठिकाने पर ‘बंकर बस्टर’ बम न गिराने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि वहां यह असरदार नहीं होते. इसके अलावा सैटेलाइट तस्वीरें भी इस बात की पुष्टि कर रही हैं कि फोर्दो परमाणु केंद्र में फिर से हलचल शुरू हो गई है. जिस जगह बम गिरे थे वहां जेसीबी मशीनें और मिट्टी ढोने वाले ट्रक हैं. इसी बीच रूस ने यूक्रेन के पोक्रोवस्क शहर के पास 1.10 लाख सैनिकों को तैनात कर दिया है. ये वही इलाका है जिसे पिछले एक साल से रूस अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहा है. यूक्रेन की सेना के अनुसार, यह फिलहाल सबसे ‘गर्म मोर्चा’ बन गया है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की डोनबास (डोनेत्स्क और लुहान्स्क) पर पूरी पकड़ बनाने की मंशा इससे साफ नजर आती है.
रूस का सफेद सोने पर कब्जा
रूस ने यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में मौजूद एक महत्वपूर्ण लीथियम खदान पर कब्जा कर लिया है, जिसे ‘सफेद सोना’ कहा जाता है. यह खदान अमेरिका-यूक्रेन के बीच हुए एक खनिज समझौते के लिए बेहद अहम मानी जा रही थी. रूस की इस कार्रवाई से अमेरिका को बड़ा झटका लगा है और डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी डील धराशायी हो गई. वहीं, यूक्रेन का रणनीतिक शहर पोखरोव्स्क भी रूसी घेरे में है, जहां 1.10 लाख सैनिक तैनात हैं. यह पूरी कार्रवाई रूस के बढ़ते प्रभाव और ऊर्जा-सुरक्षा की वैश्विक जंग का संकेत देती है.
1.10 लाख रूसी सैनिक तैनात
यूक्रेनी सेना प्रमुख ओलेक्सांद्र सिरस्की ने जानकारी दी है कि रूस ने पूर्वी यूक्रेन के पोक्रोवस्क क्षेत्र में 1.10 लाख सैनिक तैनात कर दिए हैं. यह इलाका 1200 किलोमीटर लंबे मोर्चे का सबसे गरम मोर्चा बन गया है. पिछले एक साल से रूस इस शहर को कब्जे में लेने की कोशिश कर रहा है लेकिन बार-बार की सैन्य कार्रवाइयों के बावजूद उसे सफलता नहीं मिली है.
फोर्दो में फिर हलचल
27 जून को आई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान के फोर्दो परमाणु संयंत्र में फिर से खुदाई और निर्माण कार्य शुरू हो गया है. तस्वीरों में भारी खुदाई मशीनें और निर्माण गतिविधियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं. इससे संकेत मिलता है कि ईरान ने या तो कुछ यूरेनियम पहले ही वहां से हटा लिया था, या अब वह तेजी से अपनी क्षमताएं बहाल करने में जुटा है.
इस्फहान पर नहीं गिराए बंकर बस्टर बम
ईरान के इस्फहान में स्थित एक बड़े परमाणु ठिकाने पर अमेरिका ने बंकर बस्टर बम नहीं गिराए, क्योंकि यह स्थल इतनी गहराई में है कि इन बमों का प्रभावी होना मुश्किल था. यह खुलासा अमेरिकी सेना के टॉप जनरल डैन केन ने सीनेट को जानकारी देते हुए किया. इस्फहान को ईरान की यूरेनियम भंडारण क्षमता का बड़ा हिस्सा माना जाता है, जहां देश का लगभग 60% समृद्ध यूरेनियम छिपा है. हालांकि अमेरिका ने फोर्दो और नतांज साइट्स पर दर्जनों बम गिराए, लेकिन इस्फहान पर केवल टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया गया.
खामेनेई पर ट्रंप के तंज से गरमाया माहौल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह सच में तेहरान से समझौता चाहते हैं, तो उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई के लिए अपनाई गई ‘अस्वीकार्य भाषा’ से पीछे हटना होगा. अरागची का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ट्रंप ने खामेनेई पर हमला बोलते हुए कहा, ‘आपको सच बोलना चाहिए. आपको बुरी तरह हराया गया, और इजरायल को भी नुकसान हुआ.’








