RBI अपना मुनाफा सरकार को क्यों सौंप देता है?

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) भारत का केंद्रीय बैंक है. इसे 1935 में हिल्टन-यंग कमीशन की सलाह पर बनाया गया था. यह भारत में पैसों और बैंकों को नियंत्रित करने का सबसे बड़ा संगठन है. इसका मुख्य काम भारत में पैसों की स्थिरता बनाए रखना है. इसका मतलब है कि रुपये की कीमत को स्थिर […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 13 जुलाई 2025, 06:00 AM 4 मिनट read
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RBI अपना मुनाफा सरकार को क्यों सौंप देता है?
Photo: UB India News Archive

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) भारत का केंद्रीय बैंक है. इसे 1935 में हिल्टन-यंग कमीशन की सलाह पर बनाया गया था. यह भारत में पैसों और बैंकों को नियंत्रित करने का सबसे बड़ा संगठन है. इसका मुख्य काम भारत में पैसों की स्थिरता बनाए रखना है. इसका मतलब है कि रुपये की कीमत को स्थिर रखना ताकि महंगाई न बढ़े. RBI का मुख्य कार्यालय पहले कोलकाता में था, लेकिन 1937 में इसे मुंबई में स्थानांतरित कर दिया गया. 1949 में RBI को पूरी तरह से भारत सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया.

RBI के मुख्य उद्देश्य

  1. पैसों की स्थिरता: RBI यह सुनिश्चित करता है कि रुपये की कीमत स्थिर रहे. इससे महंगाई कम रहती है और लोग आसानी से चीजें खरीद सकते हैं.
  2. आर्थिक विकास: RBI देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है. यह बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को नियंत्रित करता है.
  3. वित्तीय स्थिरता: RBI बैंकों और वित्तीय संस्थानों की निगरानी करता है ताकि वे ठीक से काम करें और लोगों का पैसा सुरक्षित रहे.

RBI मौद्रिक नीति को कैसे नियंत्रित करता है और इसके मुख्य उपकरण क्या हैं?

मौद्रिक नीति क्या है?

मौद्रिक नीति वह तरीका है जिससे RBI देश में पैसों की मात्रा, ब्याज दरों और उधार को नियंत्रित करता है. इसका मुख्य उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है. 2016 में RBI ने एक नया नियम अपनाया, जिसे “लचीली महंगाई लक्ष्यीकरण” कहते हैं. इसके तहत RBI यह कोशिश करता है कि महंगाई 4% के आसपास रहे, जिसमें 2% कम या ज्यादा हो सकता है.

RBI के मुख्य उपकरण

RBI कई उपकरणों का इस्तेमाल करता है ताकि पैसों और ब्याज दरों को नियंत्रित कर सके. ये हैं:

रेपो रेट: यह वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को एक दिन के लिए पैसा उधार देता है. अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों को उधार लेना महंगा पड़ता है. इससे वे अपने ग्राहकों को ज्यादा ब्याज पर उधार देते हैं, जिससे पैसों की मात्रा कम होती है और महंगाई नियंत्रित होती है.

  1. रिवर्स रेपो रेट: यह वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों से पैसा लेता है. इससे बाजार में पैसों की मात्रा कम की जा सकती है.
  2. लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF): यह एक तरीका है जिससे RBI बैंकों को अल्पकालिक उधार देता या लेता है.
  3. मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): यह बैंकों को आपात स्थिति में अतिरिक्त पैसा उधार लेने की सुविधा देता है.
  4. कॉरिडोर: यह MSF और रिवर्स रेपो रेट के बीच का अंतर है, जो बाजार में ब्याज दरों को नियंत्रित करता है.
  5. बैंक रेट: यह वह दर है जिस पर RBI बैंकों के बिल खरीदता या छूट देता है. यह MSF के साथ जुड़ा होता है.
  6. कैश रिज़र्व रेशियो (CRR): बैंकों को अपने जमा का कुछ हिस्सा RBI के पास रखना होता है. अगर CRR बढ़ता है, तो बैंकों के पास उधार देने के लिए कम पैसा रहता है.
  7. स्टैट्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR): बैंकों को अपने जमा का कुछ हिस्सा सरकारी बॉन्ड, नकदी या सोने में रखना होता है. इससे उधार देने की क्षमता प्रभावित होती है.
    1. ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMOs): RBI सरकारी बॉन्ड खरीदता या बेचता है ताकि बाजार में पैसों की मात्रा को नियंत्रित कर सके. बॉन्ड बेचने से पैसा कम होता है और खरीदने से पैसा बढ़ता है.
    2. मार्केट स्टेबिलाइजेशन स्कीम (MSS): यह 2004 में शुरू हुआ ताकि अतिरिक्त पैसों को बाजार से हटाया जा सके.

     

    मौद्रिक नीति समिति (MPC) क्या है और महंगाई नियंत्रण में इसकी भूमिका क्या है?

    MPC क्या है?

    मौद्रिक नीति समिति (MPC) एक छह सदस्यों की समिति है, जिसे भारत सरकार ने बनाया है. इसका मुख्य काम रेपो रेट तय करना है ताकि महंगाई को नियंत्रित किया जा सके. MPC का फैसला RBI के लिए बाध्यकारी होता है. पहली MPC 2016 में बनी थी.

    MPC की भूमिका

    • महंगाई का लक्ष्य: सरकार और RBI मिलकर हर पांच साल में महंगाई का लक्ष्य तय करते हैं. अभी का लक्ष्य 4% महंगाई है, जिसमें 2% कम या ज्यादा हो सकता है (यानी 2% से 6% के बीच).
    • जिम्मेदारी: अगर महंगाई लगातार तीन तिमाहियों तक 2% से कम या 6% से ज्यादा रहती है, तो RBI को इसका कारण बताना होता है और इसे ठीक करने के उपाय सुझाने होते हैं.
    • रिपोर्ट: RBI हर छह महीने में एक मौद्रिक नीति रिपोर्ट जारी करता है, जिसमें महंगाई और अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी होती है.
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