यर अर्थ को लेकर ये नई चाल चल रहा चीन, भारत पर क्या पड़ेगा असर?

दुनिया के सबसे बड़े रेयर अर्थ एलिमेंट्स के खजाने पर बैठा चीन अक्सर अपने तेवर दिखता रहा है. अब ड्रैगन ने बिना किसी देश का नाम लिए सनसनीखेज इल्ज़ाम लगाया है कि विदेशी जासूस उसकी इस बेशकीमती संपत्ति को चुराने की साजिश रच रहे हैं. चीनी खुफिया एजेंसी ने दावा किया है कि विदेशी ताकतें […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 20 जुलाई 2025, 08:21 AM 5 मिनट read
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यर अर्थ को लेकर ये नई चाल चल रहा चीन, भारत पर क्या पड़ेगा असर?
Photo: UB India News Archive

दुनिया के सबसे बड़े रेयर अर्थ एलिमेंट्स के खजाने पर बैठा चीन अक्सर अपने तेवर दिखता रहा है. अब ड्रैगन ने बिना किसी देश का नाम लिए सनसनीखेज इल्ज़ाम लगाया है कि विदेशी जासूस उसकी इस बेशकीमती संपत्ति को चुराने की साजिश रच रहे हैं. चीनी खुफिया एजेंसी ने दावा किया है कि विदेशी ताकतें और उनके एजेंट मिलकर रेयर अर्थ एलिमेंट्स की तस्करी कर रहे हैं, जो उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये चीन की नई चाल है, या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है? आखिर ड्रैगन किसे निशाना बना रहा है?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स क्या हैं?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स वो 17 खनिज हैं, जो प्रकृति में बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं. इनका नाम भले ही “रेयर” हो, लेकिन इनकी अहमियत आज की टेक्नोलॉजी की दुनिया में बेशुमार है. स्मार्टफोन्स, लैपटॉप्स, इलेक्ट्रिक कारें, सोलर पैनल्स, और यहां तक कि डिफेंस सिस्टम्स में भी इनका इस्तेमाल होता है. लैंथेनम, सेरियम, नियोडिमियम जैसे नाम सुनने में अजीब लग सकते हैं, लेकिन ये वो जादुई तत्व हैं, जो आधुनिक दुनिया को चला रहे हैं.

चीन इन खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक है. दुनिया के 60% से ज्यादा रेयर अर्थ एलिमेंट्स यहीं से आते हैं. और यही वजह है कि बीजिंग इसे अपनी ताकत का सबसे बड़ा हथियार मानता है. लेकिन अब उसने इल्ज़ाम लगाया है कि कुछ विदेशी ताकतें इन खनिजों को चुराने की कोशिश कर रही हैं. चीनी सुरक्षा मंत्रालय ने अपने वीचैट अकाउंट पर एक पोस्ट में कहा, “विदेशी जासूस और उनके एजेंट गैरकानूनी तरीकों से हमारे रेयर अर्थ खजाने को लूट रहे हैं. ये हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.”

आखिर चीन का प्लान क्या है?
चीन का ये इल्ज़ाम ऐसे वक्त में आया है, जब वो अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर में उलझा हुआ है. अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने चीन पर 145% टैरिफ लगाया था, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिका पर 125% टैरिफ लगा दिया था. हालांकि बाद में जेनेवा में ट्रेड डील पर सहमति बन गई थी और दोनों देशों ने टैरिफ में 115% कटौती का ऐलान किया था. लेकिन इसके बाद चीन ने रेयर अर्थ को लेकर कई ऐसे नियम बना दिए जिससे पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया. क्योंकि रेयर अर्थ के बिना न तो इलेक्ट्रिक गाड़ियां बन सकती हैं, न स्मार्ट डिवाइसेज़, और न ही डिफेंस सिस्टम्स. ऐसे में अब चोरी का इल्जान लगना कहीं ना कहीं चीन की एक चाल ही मानी रही है.

जानकारों का कहना है कि ये इल्ज़ाम सिर्फ एक बहाना हो सकता है. चीन शायद इस बहाने अपनी ताकत दिखाना चाहता है. वो दुनिया को ये मैसेज देना चाहता है कि रेयर अर्थ एलिमेंट्स उसके कब्जे में हैं और जो भी उससे पंगा लेगा, उसे इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा.

क्या अमेरिका को निशाना बना रहा है चीन?
चीन और अमेरिका के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है. ट्रेड वॉर, टैरिफ, और टेक्नोलॉजी को लेकर दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं. रेयर अर्थ एलिमेंट्स इस जंग का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं. अमेरिका और यूरोप जैसे देश इन खनिजों के लिए चीन पर निर्भर हैं. लेकिन अब चीन ने निर्यात पर पाबंदी लगाकर इन देशों की कमर तोड़ दी है.

उदाहरण के लिए, फोर्ड मोटर कंपनी को इस बैन की वजह से अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रोडक्शन में कटौती करनी पड़ी और सिर्फ फोर्ड ही नहीं, कई दूसरी ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी इसका झटका लगा है. इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट्स बनाने के लिए रेयर अर्थ एलिमेंट्स की ज़रूरत होती है. और जब ये खनिज नहीं मिलेंगे, तो प्रोडक्शन कैसे होगा?

चीन का ये कदम अमेरिका को जवाब देने की रणनीति हो सकता है लेकिन सवाल ये है कि क्या वो वाकई विदेशी जासूसों को पकड़ रहा है? चीनी खुफिया एजेंसी ने दावा किया है कि उसने रेयर अर्थ की तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया लेकिन बिना सबूत और बिना किसी देश का नाम लिए ये दावा कितना सच है? क्या ये सिर्फ दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश है, ताकि चीन अपने अगले कदम की तैयारी कर सके?

रेयर अर्थ को लेकर भारत भी तैयार
भारत के लिए भी ये खबर अहम है. हमारा देश भी रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है. स्मार्टफोन्स, इलेक्ट्रिक वाहन, और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स में इन खनिजों की ज़रूरत पड़ती है. अगर चीन ने अपने निर्यात को और सख्त कर दिया, तो भारत की इंडस्ट्री पर भी इसका असर पड़ सकता है.

भारत सरकार पहले से ही इस दिशा में काम कर रही है. देश में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और खनन को बढ़ावा देने की कोशिशें चल रही हैं. लेकिन अभी भी हमारी निर्भरता चीन पर काफी ज्यादा है. ऐसे में चीन का ये नया इल्ज़ाम और उसकी नीतियां भारत के लिए भी चिंता का सबब बन सकती हैं.

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