अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में जारी गिरावट का सिलसिला मंगलवार को थम गया. शुरुआती कारोबार के दौरान घरेलू शेयर बाजारों के सकारात्मक रुझानों के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे मजबूत होकर 86.26 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता की स्थिति विदेशी मुद्रा बाजार के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है. ऐसे में मुद्राओं का कारोबार बेहद सीमित दायरे में किया जा रहा है.
रुपये में आयी मजबूती
भारत अमेरिका डील पर नजर
फिनरेक्स एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी एंड एग्जक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि अमेरिकी और यूरोपीय व्यापार में तनाव बढ़ने की आशंका के बीच एशियाई बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत में गिरावट आयी है. ट्रेड डील में किसी भी तरह की रुकावट आने का सीधा असर इकोनॉमिक एक्टिविटी और तेल की मांग पर भी देखने को मिल सकता है.
भंसाली का कहना है कि एक तरफ डॉलर में लगातार मजबूती आ रही है. लेकिन आरबीआई की तरफ से रुपये को बचाने के लिए डॉलर की बिकवाली की जा रही है.
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि अब सभी की नजर भारत और अमेरिकी के बीच होने वाली ट्रेड डील के ऊपर है, खासकर 1 अगस्त नजदीक आने से भारतीय निर्यातकों के मन में संभावित टैरिफ को लेकर कन्फ्यूजन बढ़ गया है.








