ईसीआई के अनुसार, दावों और आपत्तियों का निपटारा संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ/एईआरओ) द्वारा 7 दिनों के भीतर किया जाएगा.ईसीआई के मुताबिक, बिहार में आम आदमी पार्टी (आप) का 1 बीएलए है, बहुजन समाज पार्टी के 74, भारतीय जनता पार्टी के 53,338, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के 899, इंडियन नेशनल कांग्रेस के 17,549, और नेशनल पीपुल्स पार्टी के 7 बीएलए हैं। इन राजनीतिक दलों की तरफ से कोई आपत्तियां नहीं मिली हैं. इसके अलावा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (लिबरेशन) के 1,496, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के 1,913, जनता दल (यूनाइटेड) के 36,550, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 1,210, राष्ट्रीय जनता दल के 47,506, और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के 270 बीएलए हैं, और उनकी तरफ से भी कोई आपत्ति नहीं मिली है।
1 अगस्त को मसौदा सूचियों के प्रकाशन के साथ ही ‘दावों और आपत्तियों’ की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जो एक सितंबर तक जारी रहेगी और इस अवधि के दौरान मतदाता गलत तरीके से नाम हटाए जाने की शिकायत लेकर संबंधित प्राधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं. बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं.
एसआईआर के बाद बिहार में मतदाताओं की संख्या में 65 लाख की कमी
चुनावी राज्य बिहार में निर्वाचन आयोग की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत तैयार की गई मसौदा मतदाता सूची में 65 लाख से अधिक गणना प्रपत्र ‘शामिल नहीं’ किए गए हैं, जिससे पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 7.9 करोड़ से घटकर 7.24 करोड़ रह गई है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक, पटना में सबसे ज्यादा 3.95 लाख गणना प्रपत्र को मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया है, जबकि मधुबनी में ऐसे गणना प्रपत्र की संख्या 3.52 लाख, पूर्वी चंपारण में 3.16 लाख और गोपालगंज में 3.10 लाख है.
आयोग के अनुसार, एसआईआर की कवायद शुरू होने से पहले बिहार में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 7.9 करोड़ बताई गई थी. हालांकि, उसने बताया कि तब से 22.34 लाख लोगों की मौत हो चुकी है, 36.28 लाख लोग या तो राज्य से स्थायी रूप से बाहर चले गए हैं या अपने बताए गए पते पर नहीं मिले हैं और 7.01 लाख लोग एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए हैं.