सबसे बड़े दुश्मन पर सुपरपावर क्यों मेहरबान

अमेरिका और चीन एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं. दोनों एक-दूसरे को फुटी आंख भी नहीं सुहाते हैं. ट्रे़ड वॉर में भी दोनों किसी से कम नहीं. इस बीच अमेरिका ने अपने फैसलों से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. अमेरिका ने एक ही दिन में दो ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे चीन और पाकिस्तान […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
मंगलवार, 12 अगस्त 2025, 07:19 AM 4 मिनट read
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सबसे बड़े दुश्मन पर सुपरपावर क्यों मेहरबान
Photo: UB India News Archive
अमेरिका और चीन एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं. दोनों एक-दूसरे को फुटी आंख भी नहीं सुहाते हैं. ट्रे़ड वॉर में भी दोनों किसी से कम नहीं. इस बीच अमेरिका ने अपने फैसलों से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. अमेरिका ने एक ही दिन में दो ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे चीन और पाकिस्तान दोनों खुश हो गए. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने एक ही दिन में चीन को दो बड़ी राहतें दी हैं. अमेरिका ने पहली मेहरबानी यह दिखाई है कि उसे टैरिफ से 90 दिनों की राहत दे दी है. यानी अमेरिका ने टैरिफ लागू करने का प्लान और 90 दिनों के लिए टाल दिया है. दूसरी राहत बीएलए पर एक्शन को लेकर है.

जी हां, अमेरिका ने चीन को सोमवार को दो राहत दी. पहली राहत है कि अमेरिका ने बीएलए यानी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को बैन कर उसे आतंकी संगठन घोषित किया है. यह वही बीएलए है जो सालों से चीन और पाकिस्तान दोनों के लिए सिरदर्द बना हुआ है. दूसरी राहत है कि चीनी आयात पर लगने वाले टैरिफ की समय सीमा को 90 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है. अब सवाल है कि आखिर सुपरपावर अपने सबसे बड़े दुश्मन पर इतना मेहरबान क्यों हो रहा है?
पहली खुशखबरी
अमेरिका ने पाकिस्तान स्थित बीएलए यानी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और उसके सहयोगी संगठन मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया. पाकिस्तान की नजर में बीएलए एक आतंकी संगठन है. जबकि वह अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा है. वह आजाद बलूचिस्तान की मांग करता रहा है. बीएलए बलूचिस्तान के संसााधनों पर स्थानीय नियंत्रण की वकालत करता है. यही वजह है कि उसने पाकिस्तान की नाक में दम कर रखा है. मगर आसिम मुनीर की यात्रा के दौरान ही अमेरिका ने पाकिस्तान का सिरदर्द कम क दिया.
कैसे चीन को राहत?
यह संगठन न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन के लिए भी खतरा बना हुआ है, क्योंकि बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपेक) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं. बीएलए ने कई बार सीपेक से जुड़े चीनी श्रमिकों और परियोजनाओं को निशाना बनाया है. इससे बीजिंग की चिंता बढ़ी हुई है. ऐसे में अमेरिका ने बीएलए को आतंकवादी संगठन घोषित कर और उस पर प्रतिबंध लगाकर चीन को परोक्ष रूप से राहत दी है. बीएलए बलूचिस्तान में चीनी इन्वसेस्टमेंट का विरोध करता रहा है. साथ ही पाकिस्तान जिस तरह से बलूचिस्तान में चीन को कंट्रोल दे रहा है, बीएलए इसके भी खिलाफ रहा है.
दूसरी खुशखबरी
ट्रंप ने चीनी पर टैरिफ लगाने के प्लान को 90 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है. यह दूसरी बार है, जब अमेरिका ने चीन को टैरिफ लगाने पर राहत दी है. ट्रंप अगर यह डेडलाइन नहीं बढ़ाते तो चीन पर 145% तक टैरिफ लागू हो जाता. इससे ट्रेड और टैरिफ की जंग और भंयकर हो जाती. इससे चीन को काफी नुकसान होता. हालांकि, अमेरिका भी इससे कम परेशान नहीं होता. हाई टैरिफ की कीमत उसके लोगों को भी चुकानी पड़ती. फिलहाल, चीन पर 30 फीसदी टैरिफ लागू है. चीन ने भी इस खुशखबरी का इनाम दिया है. चीन ने भी अमेरिका से एडिशनल 24 फीसदी टैरिफ को हटा लिया है.

अब सवाल है कि आखिर चीन पर ट्रंप इतने मेहरबान क्यों है?
अमेरिका हर फैसले में अपना नफा-नुकसान देखता है. चीन पर भी उसने मेहरबानी अपनी मजबूरी में की है. अगर ट्रंप यूटर्न नहीं लेते तो अमेरिका में माहौल गरमा सकता था. अमेरिका ने चीन पर टैरिफ की समय सीमा 90 दिनों के लिए बढ़ाई, क्योंकि क्रिसमस के दौरान भारी खरीदारी होती है. चीनी सामान, जैसे कपड़े और खिलौने सस्ते होते हैं. इस कारण ये बेहद लोकप्रिय हैं. टैरिफ बढ़ने से कीमतें बढ़तीं. इससे अमेरिकी उपभोक्ता नाराज हो सकते थे और ट्रंप के खिलाफ विद्रोह का खतरा था. दूसरी वजह यह भी है कि अमेरिका चीन से अधिक तकरार नहीं चाहता. क्योंकि वह रूस, भारत और चीन की बन रही तिकड़ी को तोड़ने की कोशिश में है.
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