रामफल मंडल : सबको साधने का NDA का ‘मेगा प्लान’, मोदी-नीतीश जोड़ी की बड़ी रणनीति!

बिहार के झंझारपुर में 23 अगस्त 2025 को जेडीयू एक बड़े आयोजन के जरिए अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटबैंक को साधने की तैयारी में है. अमर शहीद रामफल मंडल की पुण्यतिथि पर यह कार्यक्रम पचपनिया समाज को एकजुट करेगा, जिसमें धानुक, केवट, अमात, तांती, चौपाल और नोनिया समुदाय शामिल होंगे. जेडीयू सांसद रामप्रीत मंडल […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 13 अगस्त 2025, 08:13 AM 4 मिनट read
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रामफल मंडल : सबको साधने का NDA का ‘मेगा प्लान’, मोदी-नीतीश जोड़ी की बड़ी रणनीति!
Photo: UB India News Archive

बिहार के झंझारपुर में 23 अगस्त 2025 को जेडीयू एक बड़े आयोजन के जरिए अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटबैंक को साधने की तैयारी में है. अमर शहीद रामफल मंडल की पुण्यतिथि पर यह कार्यक्रम पचपनिया समाज को एकजुट करेगा, जिसमें धानुक, केवट, अमात, तांती, चौपाल और नोनिया समुदाय शामिल होंगे. जेडीयू सांसद रामप्रीत मंडल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति समर्थन का संदेश दिया जाएगा, ताकि 2025 के चुनाव में NDA को मजबूती मिले.

रामफल मंडल: शहीद की विरासत

अमर शहीद रामफल मंडल को 1943 में भागलपुर जेल में फांसी दी गई थी जो आज भी पचपनिया समाज के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं. झंझारपुर के जेडीयू सांसद रामप्रीत मंडल ने बताया कि तीन साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनकी प्रतिमा का अनावरण किया था. 23 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि पर जेडीयू एक बड़े आयोजन के जरिए उनकी शहादत को याद करेगा. जानकार कहते हैं कि इस आयोजन के माध्यम से EBC समाज को जोड़ने पर जोर होगा.

रामफल मंडल कौन हैं?

जानकार बताते हैं कि रामफल मंडल ने सीतामढ़ी के बाजपट्टी में 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभायी थी. दरअसल, अंग्रेजों सीतामढ़ी में गोलीकांड किया था जिसमें बच्चे, बूढ़े और महिलाएं मारे गए थे. विरोध में वीर सपूत रामफल मंडल ने गोलीकांड के जवाबदेह अंग्रेजी हुक्मरानों के तत्कालीन एसडीओ और अन्य दो सिपाही को गड़ासे से काटकर मार डाला था. इसके बाद रामफल मंडल गिरफ्तार कर लिये गए.

गिरफ्तार होने के बाद रामफल मंडल ने कहा था कि भारत की आजादी में मुझे फांसी भी मंजूर है और आप लोग मेरे परिवार को देखते रहिएगा. बाद में यह सच साबित हुआ और अंग्रेज सरकार ने रामफल मंडल को फांसी पर लटका दिया. रामफल मंडल ने युवावस्था में ही देश की स्वतंत्रता के लिये हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था. रविवार, 23 अगस्त 1943 की सुबह भागलपुर सेट्रल जेल में 19 वर्ष 17 दिन के अवस्था में उन्हें फांसी दे दी गई थी. बता दें कि भाजपा ने रामफल मंडल को शहीद का दर्जा दिये जाने की मांग उठाई है.

जेडीयू की EBC रणनीति

बिहार में EBC समुदाय 36% आबादी का हिस्सा है और चुनावी नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभाता है. जेडीयू इस आयोजन के जरिए पचपनिया समाज (धानुक, केवट, अमात, तांती, चौपाल, नोनिया जैसी जातियां) को एकजुट कर नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताने का संदेश देना चाहता है. साफ है कि यह कार्यक्रम 2025 विधानसभा चुनाव से पहले EBC वोटबैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है.

बड़े नेताओं की मौजूदगी

इस आयोजन में जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, पूर्व सांसद दिलेश्वर कामत और अन्य EBC नेता शामिल होंगे. जेडीयू सांसद रामप्रीत मंडल ने बताया कि सभी पचपनिया समाज को निमंत्रण दिया गया है. यह आयोजन न केवल शहीद को श्रद्धांजलि देगा, बल्कि EBC समुदायों में NDA के प्रति समर्थन को और मजबूत करेगा.

नीतीश-मोदी पर भरोसा

रामप्रीत मंडल ने कहा, “पचपनिया समाज नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी पर भरोसा करता है. हम इस आयोजन के जरिए संदेश देना चाहते हैं कि हम NDA, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ हैं.” यह आयोजन EBC समुदायों में यह मैसेज पहुंचाने की कोशिश है कि नीतीश कुमार की सरकार और केंद्र की योजनाएं बिहार के विकास के लिए समर्पित हैं.
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