उपराष्ट्रपति चुनाव में इस बार कम पड़ेंगे 7 वोट, JK के साथ लगातार दूसरी बार होगा ऐसा

9 सितंबर को उपराष्ट्रपति का चुनाव है. जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद ये पद खाली हुआ था. 2022 को उन्होंने जिम्मेदारी संभाली थी. अगस्त, 2027 तक उनका कार्यकाल था. धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का ऐलान किया था. लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत के कारण एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 28 अगस्त 2025, 07:45 AM 4 मिनट read
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उपराष्ट्रपति चुनाव में इस बार कम पड़ेंगे 7 वोट, JK के साथ लगातार दूसरी बार होगा ऐसा
Photo: UB India News Archive

9 सितंबर को उपराष्ट्रपति का चुनाव है. जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद ये पद खाली हुआ था.  2022  को उन्होंने जिम्मेदारी संभाली थी. अगस्त, 2027 तक उनका कार्यकाल था. धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का ऐलान किया था. लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत के कारण एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन गौर करने वाली बात है कि इस चुनाव में 7 वोट कम पड़ेंगे. वहीं, लगातार दूसरी बार ऐसा भी होगा कि जब जम्मू कश्मीरकी ओर से कोई भी राज्यसभा सांसद किसी बड़े चुनाव में वोट नहीं डाल पाएगा. इससे पहले 2022 में राष्ट्रपति के चुनाव में ऐसा हुआ था.

बता दें कि 15 फरवरी, 2021 के बाद से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर से राज्यसभा में कोई सांसद नहीं रहा है. आखिरी बार यहां से गुलाम नबी आजाद और नाजिर अहमद थे. इन दोनों नेताओं का कार्यकाल 15 फरवरी, 2021 को पूरा हुआ था. इससे पहले 10 फरवरी को फयाज मीर और शमशेर सिंह रिटायर हुए थे. जम्मू कश्मीर में विधानसभा का चुनाव होने के 10 महीने बाद भी यहां के लिए अब तक राज्यसभा का चुनाव नहीं हो सका है. बता दें उपराष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद वोट डालते हैं.

कम पड़ेंगे 7 वोट

इस बार के चुनाव में 7 वोट कम पड़ेंगे. 543 सदस्यों वाली लोकसभा में एक सीट रिक्त है. पश्चिम बंगाल की बशीरघाट खाली है. इसके अलावा राज्यसभा में 6 सीटें रिक्त हैं. इनमें जम्मू कश्मीर की 4 और झारखंड- पंजाब की एक एक सीट है. आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा के इस्तीफे के बाद पंजाब में राज्यसभा की सीट खाली हुई थी. वहीं, JMM के शिबू सोरेन के निधन के बाद झारखंड की एक सीट रिक्त हुई.

दोनों सदनों को मिलाकर कुल 781 सीटें हैं. चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 391 वोटों की जरूरत पड़ेगी. लोकसभा में एनडीए के पास 293 वोट हैं तो राज्यसभा में 129 वोट हैं. ऐसे में सत्तापक्ष के पास कुल 422 सांसदों का समर्थन है.

चुनाव आयोग की मांग को सरकार ने किया खारिज

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा की चार सीटों का कार्यकाल अलग-अलग करने के लिए निर्वाचन आयोग के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधि मंत्रालय ने चुनाव आयोग को बताया कि कानून में इस तरह के आदेश का कोई प्रावधान नहीं है.

अनुच्छेद 83 के तहत, राज्यसभा एक स्थायी सदन है जिसके एक-तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं. इनका कार्यकाल 6 साल का होता है. चुनाव आयोग ने इस वर्ष की शुरुआत में कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर राष्ट्रपति के आदेश की मांग की थी, जिससे जम्मू-कश्मीर की सीटों का कार्यकाल इस प्रकार निर्धारित हो कि एक-तिहाई सीटें हर दो साल में रिक्त हो जाएं.

पिछले 30 वर्षों में कई बार राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर की सीटों का कार्यकाल एक साथ हो गया है. पंजाब और दिल्ली में भी ऐसी ही स्थिति है, क्योंकि पहले इमजरेंसी की घोषणा की गई थी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 के तहत नई विधानसभा का गठन किया गया था. चुनाव आयोग ने केवल जम्मू-कश्मीर के लिए राष्ट्रपति के आदेश की मांग की थी.

जम्मू-कश्मीर के चार राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल फरवरी 2021 में समाप्त हो गया था, जब केंद्र शासित प्रदेश राष्ट्रपति शासन के अधीन था. पिछले साल अक्टूबर में नई विधानसभा का चुनाव हुआ था, लेकिन चुनाव आयोग ने अभी तक राज्यसभा की चार सीटों को नहीं भरा है.

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