देश के पहले मिग-21 सुपरसोनिक लड़ाकू विमान की आखिरी विदाई, वायुसेना अध्यक्ष एपी सिंह ने उड़ाया मिग 21, 62 साल बाद हुआ रिटायर , …………………

भारतीय वायुसेना की ‘रीढ़’ कहे जाने वाले मिग-21 एयरक्राफ्ट शुक्रवार को रिटायर हो जाएगा। चंडीगढ़ एयरबेस में फाइटर जेट को विदाई दी जाएगी। इसके बाद विमान की सेवाएं आधिकारिक तौर पर खत्म हो जाएंगी। विदाई समारोह में सूर्य किरण एरोबेटिक टीम ने अपनी प्रस्तुति शुरू की। अलविदा उड़ान को देखकर इन्हें उड़ाने वाले पूर्व वायु […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शुक्रवार, 26 सितंबर 2025, 04:45 AM 5 मिनट read
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देश के पहले मिग-21 सुपरसोनिक लड़ाकू विमान की आखिरी विदाई, वायुसेना अध्यक्ष एपी सिंह ने उड़ाया मिग 21, 62 साल बाद हुआ रिटायर  , …………………
Photo: UB India News Archive

भारतीय वायुसेना की ‘रीढ़’ कहे जाने वाले मिग-21 एयरक्राफ्ट शुक्रवार को रिटायर हो जाएगा। चंडीगढ़ एयरबेस में फाइटर जेट को विदाई दी जाएगी। इसके बाद विमान की सेवाएं आधिकारिक तौर पर खत्म हो जाएंगी। विदाई समारोह में सूर्य किरण एरोबेटिक टीम ने अपनी प्रस्तुति शुरू की। अलविदा उड़ान को देखकर इन्हें उड़ाने वाले पूर्व वायु सैनिक भावुक हो गए। कुल छह मिग विमान ने आसमान में आखिरी बार ताकत दिखाई। सातवीं महिला पायलट स्कवाड्रन लीडर प्रिया शर्मा ने भी मिग 21 उड़ाया। पैंथर फॉरमेशन के सभी विमान एयरबेस पर लौटे। वायु सेना अध्यक्ष एपी सिंह ने मिग 21 के टेल नंबर 2777 के साथ एयरबेस पर लैंड किया। यह उनकी मिग 21 के साथ अंतिम उड़ान थी।  1963 में एयरक्राफ्ट चंडीगढ़ में ही वायुसेना में शामिल हुआ था।

थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि मिग-21 की विदाई को लेकर भावुक महसूस कर रहा हूं। यह बहुत ताकतवर था। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष बीएस धनोआ ने कहा कि मिग 21 ने वायु सेना को बहुत मजबूत बनाए रखा। इसकी कमी खलेगी लेकिन समय के साथ-साथ नए जंगी जहाज भी ताकत बढ़ाएंगे। मिग की ताकत का लोहा दुश्मन भी मानता था और आज तक घबराता था

रिटायर विंग कमांडर बोले-मिग एक खूबसूरत मशीन

सेवानिवृत्त विंग कमांडर राजीव बत्तीश ने कहा कि मिग-21 की एक बहुत लंबी कहानी है और इतने सारे लोगों का यहां एकत्र होना इस बात का प्रमाण है कि हम सभी इस विमान से जुड़े हुए हैं… जहां तक भारत का संबंध है, लड़ाकू विमान पर उड़ाए गए विमानों की अधिकतम संख्या मिग-21 है… बहुत शक्तिशाली विमान, और ज्यादातर पूर्वी ब्लॉक के देशों ने इसे उड़ाया। यह पश्चिमी क्षेत्र के लिए एक पहेली था… जहां तक उड़ान का सवाल है, मिग-21 एक खूबसूरत मशीन थी, और इसका प्रमाण यह है कि इतने सारे लोग देश भर से विदेशों से अंतिम प्रकाश देखने और अलविदा कहने के लिए आए थे।

62 साल की सर्विस के दौरान सुपरसोनिक मिग-21 ने 1965 के भारत-पाक युद्ध, 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम, 1999 के कारगिल युद्ध और 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह भारत का पहला सुपरसोनिक जेट था यानी ये आवाज की गति (332 मीटर प्रति सेकेंड) से तेज उड़ सकता है। अब इसकी जगह तेजस LCA मार्क 1A को शामिल किया जाएगा।

MiG-21 के रिटायरमेंट समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख समेत रक्षा मंत्रालय के कई अधिकारी शामिल होंगे। जगुआर और तेजस फाइटर जेट भी हिस्सा लेंगे।

400 से ज्यादा मिग-21 क्रैश हुए

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 400 से ज्यादा मिग-21 विमान क्रैश हुए हैं। इसमें 200 से ज्यादा पायलट मारे गए गए हैं। इसी वजह से फाइटर प्लेन को ‘उड़ता ताबूत’ और ‘विडो मेकर’ कहा जाता है।

भारत कब आया मिग-21?

मिग-21 लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना में साल 1963 में शामिल किया गया था। ये लड़ाकू विमान लंबे समय तक भारतीय वायुसेना का मुख्य आधार रहा। भारतीय वायुसेना ने अब तक 870 से ज्यादा मिग-21 लड़ाकू विमान खरीदे थे। मिग-21 के बारे में भारतीय वायुसेना का कहना है कि “छह दशकों की सेवा, साहस की अनगिनत कहानियां, एक ऐसा योद्धा जिसने राष्ट्र के गौरव को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया।”

क्यों कहा गया- F-16 किलर?

मिग-21 विमान 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों में प्रमुख लड़ाकू विमान थे। इस विमान ने 1999 के करगिल संघर्ष के साथ-साथ 2019 के बालाकोट हवाई हमलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2019 के फरवरी महीने में बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान मिग-21 ने पाकिस्तान के आधुनिक F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। F-16 अमेरिका द्वारा बनाए गए सबसे कामयाब लड़ाकू विमानों में से एक हैं। F-16 को मार गिराने की कामयाबी को हासिल करने के बाद मिग-21 की चर्चा पूरी दुनिया में हुई थी।

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MIG-21 की खूबियां और इतिहास

मिग-21 लड़ाकू विमान को रूस (तत्कालीन सोवियत यूनियन) ने 1950 के दशक में बनाया था। इसे साल 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। मिग-21 भारतीय वायुसेना का भरोसेमंद और सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाला लड़ाकू विमान रहा है। मिग-21 के पास मैक 2 (आवाज की गति से दोगुना) की स्पीड तक पहुंचने की क्षमता थी। इस विमान की रेंज 1,470 किलोमीटर तक की थी और ये 9,800 किलोग्राम तक के वजन को लेकर उड़ान भर सकता था। इस विमान में मिसाइल फिट करने के लिए 4 हार्डप्वाइंट्स दिए गए थे।

क्यों कहा गया फ्लाइंग कॉफिन?

भारतीय वायुसेना मिग-21 के सबसे उन्नत संस्करण मिग-21 बाइसन का इस्तेमाल करती थी। हालांकि, बीते कुछ सालों से मिग-21 को फ्लाइंग कॉफिन यानी उड़ता ताबूत के नाम से जाना जाने लगा था। इसका कारण था कि एक बाद एक मिग-21 विमानों के क्रैश होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद से सैकड़ों मिग-21 क्रैश हुए और सैकड़ों की संख्या में पायलटों की जान भी गई। हालांकि, वायुसेना के कई जानकार कहते हैं कि मिग-21 को फ्लाइंग कॉफिन कहना इसके साथ बहुत बड़ा अन्याय है।

कौन करेगा मिग-21 की भरपाई?

मिग-21 विमानों के रिटायर होने के बाद भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या कम होकर 29 रह जाने का अनुमान है। भारतीय वायुसेना में मिग-21 विमानों की जगह स्वदेशी तेजस विमान लेंगे। फरवरी 2021 में वायुसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ 83 तेजस Mk-1A के लिए ₹48,000 करोड़ का सौदा किया था। इसके बाद हाल ही में 97 तेजस Mk1A फाइटर जेट के लिए 62,370 करोड़ रुपये का सौदा किया गया है।

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