भारत-यूरोपीयन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) के बीच मुक्त व्यापार समझौता एक अक्टूबर से लागू होगा। समझौते के लागू होने पर ईएफटीए में शामिल सदस्य देश आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन द्वारा भारत से निर्यात किए जाने वाले करीब 99 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क को खत्म किया जाएगा।
वहीं, भारत इन देशों से आने वाले करीब 85 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क को खत्म करेगा। समझौते के तहत ईएफटीए के सदस्य भारत में अगले 10 वर्षों में 50 अरब डॉलर और उसके बाद अगले पांच वर्षों साल में 50 अरब डॉलर अतिरिक्त निवेश करेंगे। यानी अगले 15 वर्षों में कुल 100 अरब डॉलर का निवेश ईएफटीए सदस्य देशों की तरफ से किया जाएगा, जिसके जरिए भारत में प्रत्यक्ष रूप से 10 लाख नौकरियों के अवसर पैदा होने की संभावना है।
आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने समझौते में शामिल सदस्य देशों को 1.97 अरब डॉलर का निर्यात किया, जिसमें से तीन-चौथाई निर्यात अकेले स्विट्जरलैंड को किया गया। वहीं, आयात की बात करें तो वह 22.44 अरब डॉलर का रहा, जिसमें से करीब 21.8 अरब डॉलर का आयात केवल स्विट्जरलैंड से हुआ था। इस समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
समझौते के लागू होने के अवसर पर दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, ईएफटीए देशों के मंत्री, प्रमुख सरकारी अधिकारी और कई उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे
भारत अपनी टैरिफ लाइनों या उत्पाद श्रेणियों का 82.7 प्रतिशत प्रदान कर रहा है, जो ईएफटीए निर्यात का 95.3 प्रतिशत है, जिसमें से 80 प्रतिशत से अधिक आयात सोना है। डेयरी, सोया, कोयला और संवेदनशील कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों को बहिष्करण सूची में रखा गया है तथा इन वस्तुओं पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी जाएगी। सेवा क्षेत्र में भारत ने ईएफटीए को लेखांकन, व्यवसाय सेवाएं, कंप्यूटर सेवाएं, वितरण और स्वास्थ्य जैसे 105 उप-क्षेत्रों की पेशकश की है।
दूसरी ओर, देश ने स्विट्जरलैंड से 128 उप-क्षेत्रों में, नॉर्वे से 114, लिकटेंस्टीन से 107 और आइसलैंड से 110 उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा उनमें कानूनी, दृश्य-श्रव्य, अनुसंधान व विकास, कंप्यूटर, लेखांकन और लेखा परीक्षा शामिल हैं।








