आधार कार्ड वाले घुसपैठियों को क्या दे दें वोटिंग अधिकार ?

SIR केस में आधार कार्ड फिर सवालों के घेरे में है. पैसे देकर आधार कार्ड बनवाए जा रहे हैं. घुसपैठियों के पास भी आधार कार्ड हैं. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जो लोग कानूनी नागरिक नहीं हैं, उनके पास आधार कार्ड हैं, तो क्या उन्हें […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 27 नवंबर 2025, 10:57 AM 3 मिनट read
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आधार कार्ड वाले घुसपैठियों को क्या दे दें वोटिंग अधिकार ?
Photo: UB India News Archive

SIR केस में आधार कार्ड फिर सवालों के घेरे में है. पैसे देकर आधार कार्ड बनवाए जा रहे हैं. घुसपैठियों के पास भी आधार कार्ड हैं. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जो लोग कानूनी नागरिक नहीं हैं, उनके पास आधार कार्ड हैं, तो क्या उन्हें भी वोटिंग का अधिकार मिलना चाहिए?

SIR केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड इसलिए बनाए जाते हैं ताकि सभी तरह के सोशल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट सभी लोगों तक पहुंच सकें. यह डॉक्यूमेंट वोटिंग का अधिकार नहीं देता है. पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में SIR के फैसले, खासकर इंटेंसिव रिवीजन को चुनौती देते हुए केस की सुनवाई चल रही थी.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने एक बार फिर कहा, “आधार कार्ड पूरी तरह से नागरिकता साबित नहीं करता है. इसीलिए हमने कहा कि SIR में एक डॉक्यूमेंट आधार कार्ड होगा. अगर किसी का नाम छूट गया है, तो उसे नोटिस देना होगा.”

आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

आधार एक्ट में यह भी कहा गया है कि यह डॉक्यूमेंट नागरिकता या डोमिसाइल साबित नहीं करता है. इसका जिक्र करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “आधार कई तरह के फायदे पाने के लिए बनाया गया है. अगर किसी व्यक्ति को राशन लेने के लिए आधार कार्ड दिया जाता है, तो क्या उसे भी वोटर बना दिया जाएगा? मान लीजिए कोई पड़ोसी देश का नागरिक है. वह इस देश में मजदूरी करता है.”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इलेक्शन कमीशन को वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए फॉर्म-6 एप्लीकेशन में जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स के सही होने को वेरिफाई करने का अधिकार है. इलेक्शन कमीशन कोई पोस्ट ऑफिस नहीं है.

पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में SIR प्रोसेस को चुनौती देने वाले मामलों में चुनाव आयोग से 1 दिसंबर तक जवाब मांगा गया है. केस करने वाले जवाब भी दे सकते हैं. इस मामले में राज्यों की तरफ से सीनियर वकील कपिल सिब्बल लड़ रहे हैं.

SIR प्रोसेस पर कपिल सिब्बल ने जताई चिंता

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIR प्रोसेस ने आम आदमी पर बेवजह दबाव डाला है. उन्होंने कहा, कई वोटर अनपढ़ हैं. फॉर्म भरना वोटरों की जिम्मेदारी नहीं है. कई अनपढ़ हैं. वे पढ़-लिख नहीं सकते. अगर वे फॉर्म नहीं भर सकते, तो उनके नाम हटा दिए जाएंगे. अगर नाम वोटर लिस्ट में है, तो उसे वैलिड माना जाएगा, जब तक कि राज्य कुछ और न कहे. अगर कोई नाम हटाया जाता है, तो यह एक सही और निष्पक्ष प्रोसेस से किया जाना चाहिए.

कपिल सिब्बल ने कहा, हालांकि आधार कार्ड नागरिकता का सबूत नहीं है, लेकिन यह नागरिकता के पक्ष में सबूत है. मेरे पास आधार कार्ड है. यह मेरा घर है. इस प्रोसेस में इसे छीना जा रहा है. जस्टिस जयमाल्या बागची ने कहा कि मरे हुए वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाना जरूरी है.

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में SIR को खास तौर पर चुनौती देने वाली पिटीशन पर सुनवाई का शेड्यूल भी तय किया. बेंच ने इलेक्शन कमीशन से 1 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है. पिटीशनर फिर अपने जवाब दाखिल कर सकते हैं और उसके तुरंत बाद मामलों पर सुनवाई होगी.

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