मौलाना महमूद ने की सुप्रीम कोर्ट पर की विवादित टिप्पणी , भाजपा ने किया पलटवार

भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग में इस्लामी विद्वान मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसी इस्लाम की पवित्र अवधारणा को दुर्व्यवहार, अव्यवस्था और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है। ‘लव जिहाद’, ‘भूमि जिहाद’, ‘शिक्षा जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके मुसलमानों को […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 29 नवंबर 2025, 11:13 AM 5 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
मौलाना महमूद ने की सुप्रीम कोर्ट पर की विवादित टिप्पणी , भाजपा ने किया पलटवार
Photo: UB India News Archive

भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग में इस्लामी विद्वान मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसी इस्लाम की पवित्र अवधारणा को दुर्व्यवहार, अव्यवस्था और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है। ‘लव जिहाद’, ‘भूमि जिहाद’, ‘शिक्षा जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके मुसलमानों को गहरी ठेस पहुंचाई गई है। इससे धर्म का अपमान होता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार और मीडिया में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने में कोई शर्म महसूस नहीं करते है।

‘एक विशेष समुदाय को जबरन निशाना बनाया जा रहा’
इस्लामी विद्वान मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि देश की वर्तमान स्थिति अत्यंत संवेदनशील और चिंताजनक है। दुःख की बात है कि एक विशेष समुदाय को जबरन निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अन्य समुदायों को कानूनी रूप से शक्तिहीन, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से अपमानित किया जा रहा है। भीड़ द्वारा हत्या, बुलडोजर कार्रवाई, वक्फ संपत्तियों पर कब्जा और धार्मिक मदरसों व सुधारों के विरुद्ध नकारात्मक अभियान जैसे व्यवस्थित और संगठित प्रयास उनके धर्म, पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने के लिए किए जा रहे हैं।

एसआईआर पर क्या बोले मदनी?

उन्होंने आगे कहा कि एसआईआर भी किया जा रहा है, और यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। अगर हम इस पर कड़ी नजर रखें, तो हम निराशा से बच सकते हैं, क्योंकि निराशा किसी भी समुदाय के लिए जहर है और अगर कोई समुदाय जीवित है, तो इससे बचने की और भी ज्यादा जरूरत है।

मदनी ने कहा कि इस देश में मुसलमानों के अनुकूल लगभग 10 फीसदी लोग हैं, जो अलग-अलग वजहों से हमारे पक्ष में हैं। इसी तरह लगभग 30 फीसदी लोग समुदाय के विरोध में हैं, जबकि एक अनुमान के अनुसार 60 फीसदी लोग ऐसे हैं जो न हमारे अनुकूल हैं और न ही विरोध में। यह जो खामोश बहुमत है, उसे फिरका-परस्त लोग अपनी ओर झुकाने की कोशिश कर रहे हैं। मदनी ने कहा कि यदि यह वर्ग उनके प्रभाव में आ गया, तो यह देश और मुसलमानों दोनों के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी होगी।

उन्होंने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि फिरकापरस्त तत्व कामयाब न हों, तो समुदाय को मानवता की चिंता करने वाला रवैया अपनाना होगा और अपनी प्रतिनिधिक सोच पर नियंत्रण रखना होगा। मुसलमान अपने ओहदे को पहचानें, दूसरों के साथ बेहतर रिश्ते स्थापित करें, एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करें और साथ ही दूसरों को दीन-इस्लाम की सच्चाई से अवगत कराएँ।

अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रहीं 
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि बहुत अफसोस के साथ ये कहना पड़ रहा है कि बीते कुछ अरसे से खासकर बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और कई अन्य मामलों में फैसलों के बाद ऐसा लगता है कि पिछले कुछ वर्षों से अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं।

भाजपा ने किया पलटवार
जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान पर भाजपा की तरफ से पलटवार किया गया है। संबित पात्रा ने कहा कि उनकी तरफ से भोपाल में दिया गया बयान भड़काऊ और देश को बांटने वाला है। जिहाद के नाम पर जिस प्रकार से लोगों ने भारत में ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर भी आतंक फैलाया है, वह हमने देखा है। उन्होंने आगे कहा कि मौलाना मदनी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। मौलाना मदनी के इस बयान को सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान में लेकर इसकी सुनवाई करनी चाहिए।
‘भारत में जिहाद को सही ठहराना अस्वीकार्य’
संबित पात्रा ने कहा कि मौलाना मदनी ने अपने भाषण में जिहाद शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जहां भी अत्याचार हो, वहां जिहाद होना चाहिए। उन्होंने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा, ‘ऐसे शब्द देश को बांटने का काम करते हैं। जिहाद के नाम पर दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवाद फैला है। भारत में इसे सही ठहराना अस्वीकार्य है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में जिहाद का आह्वान करना देश की एकता पर हमला है और इस बयान की जांच होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी को लेकर भी नाराजगी
संबित पात्रा ने दावा किया कि मौलाना मदनी ने सुप्रीम कोर्ट की भी आलोचना की और कहा कि कोर्ट सरकार के दबाव में काम करता है। इस पर उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट इस देश की सर्वोच्च संस्था है। उसके बारे में ऐसी टिप्पणी सिर्फ संस्था को कमजोर करने की कोशिश है। मैं चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट इस बयान पर स्वत: संज्ञान ले।’

अखिलेश यादव और विपक्ष पर भी हमला
संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष और कुछ नेता लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जो लोगों में भ्रम और नफरत फैलाने वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘आज सुबह से देश में दो तरह की खबरें आई हैं, एक तरफ विकास, जिसमें देश की Q2 जीडीपी का ऐतिहासिक आंकड़ा शामिल है। दूसरी तरफ कुछ नेता ऐसे बयान दे रहे हैं जो समाज में भड़काऊ माहौल बना रहे हैं।’

समाज में नफरत फैलाने की कोशिश- संबित पात्रा
संबित पात्रा ने आगे कहा कि सरकार और भाजपा किसी भी तरह की नफरत, हिंसा और देश विरोधी बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ‘भारत विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में समाज में नफरत फैलाने की कोशिश पूरी तरह अस्वीकार्य है।’
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰