महाराष्ट्र निकाय चुनाव : AIMIM की जीत ने बढ़ा दी राहुल-अखिलेश की टेंशन

महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिका चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के शानदार प्रदर्शन ने सभी को हैरान कर दिया है. इन नतीजों के साथ असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है. इन चुनावों में कुल 114 पार्षदों को जिताकर न सिर्फ अपनी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
शनिवार, 17 जनवरी 2026, 07:20 AM 3 मिनट read
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महाराष्ट्र निकाय चुनाव : AIMIM की जीत ने बढ़ा दी राहुल-अखिलेश की टेंशन
Photo: UB India News Archive
महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिका चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के शानदार प्रदर्शन ने सभी को हैरान कर दिया है. इन नतीजों के साथ असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है. इन चुनावों में कुल 114 पार्षदों को जिताकर न सिर्फ अपनी ताकत दिखाई, बल्कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) से भी बेहतर प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. यह एआईएमआईएम का अब तक का सबसे बड़ा शहरी स्थानीय निकाय प्रदर्शन माना जा रहा है.

महाराष्ट्र निकाय चुनाव नतीजों के फाइनल आंकड़ों मुताबिक, एआईएमआईएम को सबसे बड़ी सफलता छत्रपति संभाजीनगर में मिली, जहां पार्टी के 33 पार्षद विजयी हुए. इसके अलावा मालेगांव में 21, अमरावती में 11, नांदेड़ में 13, धुले में 10, मुंबई और सोलापुर में 8-8, ठाणे में 5, जलगांव में दो और परभणी में 1-1 पार्षद एआईएमआईएम के खाते में गए हैं. इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि एआईएमआईएम अब केवल सीमित इलाकों की पार्टी नहीं रही, बल्कि उसने मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और मुंबई जैसे बड़े शहरी केंद्रों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है.

कांग्रेस की कैसे बढ़ी टेंशन?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआईएमआईएम की यह बढ़त कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लिए खतरे की घंटी है, खासकर अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिहाज से. महाराष्ट्र में एआईएमआईएम ने कई जगह कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ दिया है. सोलापुर, धुले और मुंबई जैसे शहरों में पार्टी की मजबूत मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एआईएमआईएम राज्य की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है. कई नगरपालिकाओं में, जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां एआईएमआईएम की भूमिका निर्णायक हो सकती है.

बीएमसी चुनाव में भी AIMIM का अच्छा प्रदर्शन

मुंबई की बात करें तो एआईएमआईएम ने 2017 के मुकाबले इस बार बेहतर प्रदर्शन किया है. पार्टी ने बीएमसी में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर विपक्ष की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर ली है. वार्ड नंबर 145 से विजयी हुईं एआईएमआईएम नेता खैरुनिसा अकबर हुसैन ने कहा कि यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि जनता की जीत है और पार्टी नगर निगम में जनता से जुड़े सभी मुद्दों को मजबूती से उठाएगी.

कुल मिलाकर, 29 महानगर पालिका चुनावों में एआईएमआईएम की 114 पार्षदों के साथ एंट्री ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति का समीकरण बदल दिया है. यह नतीजे साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में एआईएमआईएम राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत करने की दिशा में आक्रामक रणनीति अपनाने वाली है, जिसका असर 2029 के विधानसभा चुनावों तक देखने को मिल सकता है.

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