बिहार : राजस्व चोरी पर रोक की कवायद ,GIS तकनीक के जरिए उसका फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य………………

बिहार में जमीन खरीदना और बेचना अब पहले की तरह केवल कागजी प्रक्रिया नहीं रह जाएगा. राज्य सरकार ने जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए इसे तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने का फैसला लिया है. अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले GIS तकनीक के जरिए उसका फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा. […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
रविवार, 25 जनवरी 2026, 07:42 AM 4 मिनट read
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बिहार : राजस्व चोरी पर रोक की कवायद ,GIS तकनीक के जरिए उसका फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य………………
Photo: UB India News Archive
बिहार में जमीन खरीदना और बेचना अब पहले की तरह केवल कागजी प्रक्रिया नहीं रह जाएगा. राज्य सरकार ने जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए इसे तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने का फैसला लिया है. अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले GIS तकनीक के जरिए उसका फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा. इसका मकसद गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री कराने, निर्माण छिपाने और राजस्व चोरी पर रोक लगाना है. बता दें कि मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने सभी निबंधन कार्यालयों को निर्देश जारी किया है कि अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसकी वास्तविक स्थिति की जांच GIS तकनीक से की जाएगी. GIS के जरिए जमीन की लोकेशन, क्षेत्रफल, चारों ओर का ढांचा और उस पर मौजूद निर्माण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि रजिस्ट्री दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और जमीन की वास्तविक स्थिति में कोई अंतर न रहे.

गलत विवरण से हो रहा था राजस्व नुकसान

विभाग का मानना है कि अब तक जमीन को खाली बताकर या निर्माण की जानकारी छिपाकर रजिस्ट्री कराने के कई मामले सामने आए हैं. इससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व नुकसान हुआ. GIS आधारित सत्यापन से जमीन की सही प्रकृति सामने आएगी और कम कीमत दिखाकर स्टांप ड्यूटी बचाने जैसी गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी.

निबंधन अधिकारियों की तय की गई जिम्मेदारी

नए नियमों के अनुसार, नगर निकाय क्षेत्रों में जमीन और उस पर बने निर्माण का निरीक्षण खुद निबंधन पदाधिकारी करेंगे. ग्रामीण और अन्य क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी कार्यालय अधीक्षक, प्रधान लिपिक या अधिकृत कर्मचारियों को सौंपी जा सकती है. कर्मचारियों द्वारा किए गए निरीक्षणों में से कम से कम 10 प्रतिशत मामलों का क्रॉस वेरिफिकेशन निबंधन पदाधिकारी खुद करेंगे ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो.

तीन दिनों के भीतर अनिवार्य होगा निरीक्षण

रजिस्ट्री के लिए आवेदन देने के बाद तीन दिनों के भीतर स्थल निरीक्षण करना अनिवार्य कर दिया गया है. GIS सत्यापन पूरा होने के बाद ही रजिस्ट्री प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा. फ्लैट रजिस्ट्री के मामलों में बिल्डर एसोसिएशन और RERA से समन्वय कर फ्लैट के सही विवरण की पुष्टि की जाएगी ताकि खरीदारों को कोई भ्रम न हो.

डिजिटल रिकॉर्ड और जनजागरूकता

सरकार चलंत निबंधन इकाइयों और विशेष कैंपों के माध्यम से लोगों को नए नियमों की जानकारी देगी. अब सभी रजिस्ट्री कार्यालयों से नॉन इनकंबरेंस सर्टिफिकेट और सच्ची प्रतिलिपि ऑनलाइन जारी की जाएगी. पुराने दस्तावेज यदि डिजिटल नहीं हैं तो उनकी प्रति ऑफलाइन दी जाएगी लेकिन उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा.

राजस्व लक्ष्य और GIS की भूमिका

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 9130 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व लक्ष्य के मुकाबले अब तक 5662.51 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई है. विभाग का मानना है कि गलत विवरण और कमजोर जांच इसकी बड़ी वजह रही है. GIS तकनीक लागू होने से राजस्व संग्रह बढ़ाने में मदद मिलेगी और चोरी पर रोक लगेगी.

अधिकारियों को सख्त निर्देश

विभाग के सचिव अजय यादव ने सभी जिलों के अधिकारियों को लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे का निर्देश दिया है. नीलामवाद और 47 ए जैसे मामलों में तेजी लाने को कहा गया है. सभी अंचल अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम तीन दिन कार्यालय निरीक्षण और रविवार को अनिवार्य निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं.

बड़ा सुधारात्मक कदम

कुल मिलाकर GIS आधारित सत्यापन व्यवस्था बिहार में जमीन रजिस्ट्री को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे न केवल राजस्व नुकसान रुकेगा बल्कि आम लोगों को भी सुरक्षित तरीके से संपत्ति का लेनदेन करने में सुविधा मिलेगी.
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