रणनीतिक चूक या किस्मत का कहर…

आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की किस्मत साथ नहीं दे रही. उन्हें हर बार गच्चा खाना पड़ रहा है। यह स्थिति 2024 से ही बनी हुई है. इससे उनका कन्फ्यूजन भी बढ़ता जा रहा है. वे समझ नहीं पा रहे कि उनकी रणनीति फेल क्यों हो जाती है. बड़ी […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 23 मार्च 2026, 05:36 AM 7 मिनट read
लाइव टेक्स्ट हाइलाइटिंग के साथ सुनें
शेयर करें:
WhatsAppFacebookXTelegram
रणनीतिक चूक या किस्मत का कहर…
Photo: UB India News Archive
आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की किस्मत साथ नहीं दे रही. उन्हें हर बार गच्चा खाना पड़ रहा है। यह स्थिति 2024 से ही बनी हुई है. इससे उनका कन्फ्यूजन भी बढ़ता जा रहा है. वे समझ नहीं पा रहे कि उनकी रणनीति फेल क्यों हो जाती है. बड़ी मुश्किल से 2022 में साथ आए नीतीश ने 17 महीने में ही तेजस्वी को झटका दे दिया. 2025 के असेंबली इलेक्शन में वे 2020 की उपलब्धियों को भी अक्षुण्ण नहीं रख पाए. 2026 में राज्यसभा चुनाव के दौरान उनकी बिछाई बिसात बिगड़ गई. 2024 से अब तक उनके खाते में सिर्फ विफलताएं ही आई हैं.
नीतीश ने 2024 में दिया झटका 
तेजस्वी यादव को नीतीश कुमार ने 2022 से 2023 के दौरान खूब दुलारा-पुचकारा. नीतीश अक्सर उनके बारे में ऐसी बातें कहते, जिससे वे यकीनन आह्लादित होते रहे होंगे. खासकर इस बात से कि नीतीश ने उन्हें सीएम पद का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. उन्हें 2025 में सपना दिखाया। पर, नीतीश कुमार के बारे में अपने पिता की उस बात को तेजस्वी भूल गए कि उनके पेट में दांत है. नीतीश कुमार को समझना किसी के बूते की बात नहीं. हुआ भी ऐसा ही. नीतीश ने 2024 में राजद से कट्टी कर ली और भाजपा को गले लगा लिया. यह तेजस्वी को पहला बड़ा सियासी झटका था.
विश्वासमत में भी मिली थी मात
तेजस्वी ने दूसरी बार नीतीश को घेरने की कोशिश की. उन्हें पता था कि एनडीए के पास सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा तो है, लेकिन मामूली प्रयास से उसे अपदस्थ किया जा सकता है. तेजस्वी के पास तब तकरीबन 115 एमएलए थे। उन्हें सिर्फ 7 का ही बंदोबस्त करना था. इसके लिए उन्होंने बिसात भी बिछाई. बीमा भारती और संजीव समेत जेडीयू के कई विधायकों को पटाया. योजना थी कि आरजेडी विधायक अवध बिहारी चौधरी स्पीकर पद से इस्तीफा नहीं देंगे. एनडीए उन्हें स्वीकार नहीं करेगा. फिर मत विभाजन होगा और तेजस्वी की बिसात काम कर जाएगी. मत विभाजन में दांव उल्टा पड़ गया. तेजस्वी के विधायकों ने ही उन्हें गच्चा दे दिया. नीतीश कुमार ने 125 मतों से विश्वासमत जीता लिया. यह तेजस्वी को जोर से लगा दूसरा झटका था.
विधानसभा चुनाव में भी हुई हार
चूंकि अगले ही साल विधानसभा के चुनाव होने थे. और खटर-पटर करने के बजाय चुनाव की तैयारी ही तेजस्वी को बेहतर विकल्प लगा. उन्होंने साल भर पहले पड़ोसी राज्य झारखंड में महिलाओं के लिए हेमंत सोरेन की मईयां सम्मान योजना का चमत्कार देखा था. तपाक से उन्होंने बिहार में माई-बहिन मान योजना के तहत हर महिला को 2500 रुपए मासिक मदद की घोषणा कर दी .चुनाव आने पर उन्होंने इस योजना की एकमुश्त राशि 30 हजार रुपए देने का भी ऐलान कर दिया. वे यहीं नहीं रुके. दन से हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की हास्यास्पद घोषणा कर डाली. अब तक जो लोग तेजस्वी को भरोसमंद मान कर उनके मुरीद हो गए थे, वे नौकरी वाली घोषणा के बाद उनका मजाक उड़ानें लगे. नीतीश ने भी चाणक्य बुद्धि भिड़ाई और हर परिवार की एक महिला के खाते में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपए भेजने शुरू कर दिए. तेजस्वी यहां भी गच्चा खा गए. राजद 25 सीटों पर ही सिमट गया. महागठबंधन की सम्मिलित सीटें भी 35 पर आकर अंटक गईं.
Advertisement

RS में कांग्रेस विधायकों से धोखा
इसी साल 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में भी तेजस्वी के नेतृत्व वाला महागठबंधन मात खा गया. तेजस्वी ने येन-केन प्रकारेण महागठबंधन से बाहर की विपक्षी पार्टियों को पटाया. 41 का आंकड़ा भी जुटा लिया. पर, इस बार भी वे मात खा गए. अपनों ने ही दगा दे दिया. कांग्रेस के 3 और राजद के एक विधायक ही धोखेबाज निकल गए. इसे हार का सदमा कहें या उत्साह कि अगले ही दिन वे बंगाल में ममता बनर्जी का पैर छूकर आशीर्वाद लेते नजर आए. प्रसंगवश यह उल्लेख भी आवश्यक है कि विधानसभा चुनाव में बुरी हार के बाद तेजस्वी शपथ लेते ही सपरिवार तफरीह के लिए विदेश दौरे पर निकल गए थे.
परिवार में भी होती रही है खटपट
तेजस्वी यादव का इसे दुर्भाग्य कहिए कि चुनाव के पहले ही परिवार मे खटपट शुरू हो गई. एक लड़की से रिलेशनशिप के आरोप में उनके बड़े भाई और पूर्व मंत्री तेज प्रताप को पिता लालू ने परिवार और पार्टी से बाहर कर दिया. चुनाव में एनडीए के साथ तेज प्रताप भी तेजस्वी के खिलाफ खड़े हो गए. बहन रोहिणी आचार्य ने भी तेजस्वी के चुनाव रथ पर उनके करीबी सांसद संजय यादव के सवाल होने को लेकर बवाल मचा दिया. बाद में रोहिणी ने तेजस्वी और उनके सहयोगियों पर चप्पल चलाने का ऐसा आरोप लगाया, जिससे परिवार के भीतर का कलह सतह पर आ गया. यह भी तेजस्वी के लिए किसी झटके से कम नहीं था.
क्या MLC चुनाव में भी होगी क्षति
आने वाले दिनों में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. इनमें 9 नियमित सीटों पर चुनाव होगा, जबकि 2 सीटों पर उपचुनाव होंगे. नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने से एक सीट की रिक्ति होगी और दूसरी सीट मंगल पांडेय के विधायक चुने जाने से खाली हुई है. अपने विधायकों को संख्या बल से राजद बमुश्किल एक सीट निकल सकता है. अगर दूसरा कोई फैसला रज्हमान की शक्ल में उभरा तो राजद को एक सीट पर भी आफत आ जाएगी. राज्यसभा में राजद उम्मीदवार को समर्थन देने के एवज में AIMIM ने अगर एमएलसी सीट की शर्त रखी तो यह अवसर भी तेजस्वी के हाथ से गया.
जोड़-तोड़ का सुफल जान कर भी चुप
तेजस्वी इस बार 2020 वाले नीतीश की भूमिका में हैं. तब नीतीश के अपने 43 ही विधायक थे. इस बार तेजस्वी उससे भी कम 25 विधायकों के नेता हैं. तब नीतीश किंगमेकर की भूमिका में थे. इस बार 6 पार्टियों वाले महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव हैं। पर, तेजस्वी खामोश हैं. वे इस मुद्दे पर सुगबुगा भी नहीं रहे. उल्टे बेफिक्र होकर मस्ती में देश-विदेश घूम रहे हैं. उन्हें शायद इसका आभास नीतीश कुमार अब पहले जैसे नहीं रहे. उम्र और अस्वस्थता ने उन्हें मेन स्ट्रीम से हटने को मजबूर कर दिया है. तेजस्वी अपनी कही बात भूल गए कि उन्होंने मौजूदा सरकार के 100 दिन बीतने के बाद आलोचना की घोषणा की थी. रोज-रोज क्राइम बुलेटिन जारी कर सरकार को कठघरे में खड़ा करने वाले तेजस्वी चाहते तो नीट छात्रा की रहस्यमय मौत और सारण में दुष्कर्म के बाद हत्या के संवेदनशील सवाल पर बड़ा आंदोलन राज्य भर में खड़ा कर सकते थे.
तेजस्वी के लिए आत्ममंथन जरूरी
परिवार की खटपट, कांग्रेस का कमजोर साथ और NDA की मजबूती ने तेजस्वी को बार-बार गच्चा खाने पर मजबूर किया है. MLC चुनाव में भी अगर यही सिलसिला रहा, तो RJD की साख और गिरेगी. तेजस्वी यादव अभी युवा हैं, लेकिन राजनीति में निरंतर असफलता उन्हें सबक सिखा रही है. लालू की विरासत को बचाने के लिए उन्हें सम्यक समीक्षा के साथ आत्ममंथन करना होगा. तदनुरूप रणनीति बनानी होगी.
UB India News

UB India News

बिहार और देश-दुनिया की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक घटनाओं की निष्पक्ष व सटीक रिपोर्टिंग।

संबंधित खबरें (Related Stories)

9 Articles loaded
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू
खास खबर

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू

राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का खार्ग द्वीप पूरी तबाह कर दिया गया है. हालांकि अभी ईरान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. ट्रंप ने हमले की एआई वीडियो भी जारी की है.

UB India News31 अग॰
युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत
खास खबर

युद्ध के बीच अर्थव्यवस्था की अग्निपरीक्षा! बैंक लोन और Q1 GDP बताएंगे भारत की ताकत

सोमवार यानी 31 अगस्त को देश के जीडीपी के आंकड़े आने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि देश की रफ्तार 7% से ज्यादा रह सकती है. वैसे मिडिल ईस्ट वॉर, महंगाई के अलावा फैक्टर्स चुनौतियां बनी हुई हैं. लोन ग्रोथ और कॉरेपोरेट इनकम देश की ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं. क्या चुनौतियों के बाद भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 7% रह सकती है?

UB India News31 अग॰
नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…
खास खबर

नेपाल बाढ़- मौतों का आंकड़ा 903 पहुंचा, टनल में फंसी जानों को बचाने के लिए ऑपरेशन जिंदगी जारी…

पाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों ही देशों के इलाकों में भीषण तबाही मचाई है। इस बाढ़ में अब तक 804 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

UB India News31 अग॰
ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा
खास खबर

ईरान युद्ध के बीच मोदी-पजेश्कियन की मुलाकात: बदलते पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीति की बड़ी परीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन के बीच बिश्केक में मुलाकात होने वाली है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार होगा, जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने मिलने वाले हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस द्विपक्षीय वार्ता पर होगी.

UB India News31 अग॰
एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह
खास खबर

एक दशक में बदली भारत की उच्च शिक्षा की तस्वीर, विकास से समावेशिता तक नई राह

उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार, विद्यार्थियों की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में भारत की लंबी छलांग

UB India News30 अग॰
भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा
खास खबर

भारत की डिजिटल फर्टिलाइज़र क्रांति: डेटा एनालिटिक्स से बदलेगा सब्सिडी प्रबंधन का ढांचा

खाद की खपत से लेकर जिला स्तर तक निगरानी; iFMS नेटवर्क से 14 करोड़+ आधार-लिंक्ड किसान और 2.5 लाख+ खुदरा विक्रेता जुड़े

UB India News30 अग॰
सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !
खास खबर

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा पर विवाद क्यों !

सोनिया गांधी की प्रस्तावित आत्मकथा को लेकर विवाद ने किताब, सत्ता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। यह बहस सिर्फ संपादकीय बदलाव तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से असहज विचारों और लेखकों के साथ व्यवहार से भी जुड़ी है। आंबेडकर की Annihilation of Caste, पेरियार की सच्ची रामायण, सलमान रुश्दी की The Satanic Verses और पेरुमल मुरुगन की One Part Woman भारत में ‘किताबी विद्रोह’ की लंबी परंपरा के उदाहरण हैं। हालांकि हर संपादकीय हस्तक्षेप को सेंसरशिप नहीं कहा जा सकता। सोनिया की किताब ने फिर सवाल खड़ा किया है कि लोकतंत्र में असहमति को दबाया जाए या उसका जवाब विचार से दिया जाए।

UB India News Desk30 अग॰