सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार किया, लालू प्रसाद यादव को पेशी से मिली छूट

जमीन के बदले नौकरी घोटाले के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी मांग को खारिज कर दिया है। हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 13 अप्रैल 2026, 07:56 AM 4 मिनट read
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सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार किया, लालू प्रसाद यादव को पेशी से मिली छूट
Photo: UB India News Archive

जमीन के बदले नौकरी घोटाले के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की उनकी मांग को खारिज कर दिया है। हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को निचली अदालत की कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट प्रदान की है।

यह फैसला बुधवार को सुनाया गया, जिससे इस बहुचर्चित घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर प्राथमिकी (एफआईआर) को रद्द करने की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय को जल्द सुनवाई का निर्देश भी दिया है।

लैंड फॉर जॉब केस-लालू परिवार समेत 41 पर आरोप तय

9 जनवरी 2026 को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के पूर्व CM लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी यादव और बेटी मीसा, हेमा पर आरोप तय किए।

लालू परिवार के साथ कुल 41 लोगों पर आरोप तय किया। इन लोगों पर अब मुकदमा चल रहा है। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया था।

सुनवाई को लेकर लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती और बेटे तेजप्रताप-तेजस्वी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे थे। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया है।

लालू परिवार ने एक आपराधिक गिरोह की तरह काम किया- कोर्ट

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा कि, ‘लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे और उनकी ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी।’

जज ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘अदालत संदेह के आधार पर यह पाती है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने परिवार (बेटियों, पत्नी और बेटों) के लिए अचल संपत्तियां हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की एक व्यापक साजिश रची थी।’

कोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचे लालू प्रसाद यादव और बेटी रोहिणी आचार्य। (फाइल फोटो)
कोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचे लालू प्रसाद यादव और बेटी रोहिणी आचार्य। (फाइल फोटो)

क्या है बिहार का नौकरी के बदले में जमीन घोटाला?

बात 6 फरवरी 2008 की है। पटना के किशुन देव राय ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन सिर्फ 3.75 लाख रुपए में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी काे बेच दी। यह जमीन की काफी कम कीमत थी।

इसी साल किशुन देव राय के परिवार के 3 लोगों को मध्य रेलवे मुंबई में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिल गई।

CBI ने इसे लैंड फॉर जॉब घोटाला बताया। यानी नौकरी के बदले में जमीन लेना। यह मामला तब का है, जब लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे।

लैंड फॉर जॉब स्कैम के तार RJD नेता लालू यादव से जुड़े

लैंड फॉर जॉब स्कैम के तार RJD नेता लालू यादव से जुड़े हुए हैं। नौकरी के बदले जमीन लेने के घोटाले में लालू और उनके परिवार वालों पर रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन लेने का आरोप है। इस मामले में CBI ने मई 2022 में लालू और उनके परिवार के सदस्यों पर भ्रष्टाचार का नया केस दर्ज किया था।

CBI के अनुसार इस तरह से लालू यादव के परिवार ने बिहार में 1 लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख रुपए में हासिल कर ली, जबकि उस समय के सर्कल रेट के अनुसार जमीन की कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपए थी। खास बात ये है कि लैंड ट्रांसफर के ज्यादातर केस में जमीन मालिक को कैश में भुगतान किया गया।

क्या है जमीन के बदले नौकरी घोटाला?

जमीन के बदले नौकरी घोटाला कथित तौर पर उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीनें ली गईं। इस मामले में सीबीआई ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। लालू यादव ने इस मामले में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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