ब्रिक्स की ताकतों को तोड़ रहा अमेरिका!

भारत में ब्रिक्स (BRICS) के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की है। पश्चिम एशिया संकट, चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद बदलते समीकरण की ओर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
गुरुवार, 14 मई 2026, 12:42 PM 6 मिनट read
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ब्रिक्स की ताकतों को तोड़ रहा अमेरिका!
Photo: UB India News Archive

भारत में ब्रिक्स (BRICS) के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की है। पश्चिम एशिया संकट, चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद बदलते समीकरण की ओर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संकेत करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से अनिश्चित और जटिल होती जा रही है। वहीं, एक्सपर्ट इसे ट्रंप की गहरी चाल बता रहे हैं, ताकि भारत की अगुवाई वाला ब्रिक्स अलग-थलग पड़ जाए। वजह साफ है कि अमेरिका नहीं चाहता है कि ब्रिक्स मजबूत बने, जो उसके डॉलर और उसकी महाशक्ति होने को चुनौती दे। बीजिंग में हलचल बढ़ी हुई है। ट्रंप के पहुंचने के बाद कहा जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी चीन जाने वाले हैं। ये वही ट्रंप हैं, जो सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की तस्वीर सामने आने से बेचैन हो गए थे। इन बदलते समीकरणों को समझते हैं।

BRICS: जयशंकर ने बताया-दुनिया बेहद जटिल

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा-आज नई दिल्ली में आयोजित #BRICSIndia2026 विदेश मंत्रियों की बैठक में अपने सहयोगियों का स्वागत करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है। हम ऐसे वक्त मिल रहे हैं जब दुनिया तेजी से जटिल और अनिश्चित होती जा रही है, जिसका उभरते बाजारों और विकासशील देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
जयशंकर ने इन जरूरतों पर बल दिया है।

  • ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करना।
  • वैश्विक आर्थिक कल्याण के लिए आवश्यक अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से निर्बाध और सुरक्षित समुद्री प्रवाह सुनिश्चित करना।
  • आर्थिक लचीलेपन के लिए विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और विविध बाजारों को सुरक्षित करना।
  • समानता और साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए जलवायु परिवर्तन का समाधान करना।
  • सुशासन और समावेशी विकास के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना। साथ ही विश्वास, पारदर्शिता और समान पहुंच से संबंधित चिंताओं का समाधान करना।
  • संवाद और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना। और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत सहयोग।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सुधार सहित बहुपक्षवाद में सुधार।

जयशंकर ने कहा है कि भारत की ब्रिक्स की अध्यक्षता का उद्देश्य लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण करना है। हमें विश्वास है कि #BRICSIndia2026 की चर्चाएं अधिक स्थिर, न्यायसंगत और समावेशी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था प्राप्त करने में उपयोगी होंगी।

चीन ने ब्रिक्स के बजाय अमेरिका को दिया तवज्जो!

सोशल मीडिया एक्स पर एक जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट एजे इनापी (AJ Inapi (Allan) ने ट्रंप के प्लान को डिकोड किया है। उन्होंने कहा है कि ब्रिक्स की बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी नहीं पहुंचे। वह राष्ट्रपति ट्रंप की मेजबानी में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा-जरा सोचिए, इससे दुनिया को क्या संदेश मिलता है। जहां ब्रिक्स के विदेश मंत्री नई दिल्ली में बहुध्रुवीयता,डॉलर-मुक्ति और वैश्विक व्यवस्था को नया आकार देने पर चर्चा कर रहे हैं, वहीं बीजिंग की प्राथमिकता इस समय राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आमने-सामने बैठकर अमेरिका के साथ सीधे समझौते करना है।

चीन का ब्रिक्स के बजाय ट्रंप को तवज्जो देना संयोग नहीं

एजे इनापी का कहना है कि यह कोई संयोग नहीं है। यह प्राथमिकता तय करने की बात है। अधिकांश टिप्पणीकार राष्ट्रपति ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान चल रहे गहरे रणनीतिक दांव-पेच को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह ट्रंप की भू-राजनीति का खास उदाहरण है।
यह है-व्यक्तिगत संबंध + लेन-देन आधारित अर्थव्यवस्था > वैचारिक गुट। मीडिया टैरिफ, ताइवान, ईरान, एआई, सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ से जुड़ी सुर्खियों में डूबा हुआ है। मगर, संरचनात्मक रूप से कुछ बड़ा घट रहा है। दरअसल, चीन ने वांग यी की जगह भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग (Xu Feihong) को बीजिंग की ओर से प्रतिनिधित्व करने को कहा है।

ट्रंप चुपचाप कमजोर कर रहे ब्रिक्स की एकजुटता

एक्सपर्ट एजे इनापी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप चुपचाप ब्रिक्स देशों की एकजुटता को कमजोर कर रहे हैं, क्योंकि वे इसके आर्थिक इंजन चीन को अमेरिका के साथ अधिक व्यावहारिक द्विपक्षीय संबंधों की ओर खींच रहे हैं।

  • युद्ध के माध्यम से नहीं।
  • सत्ता परिवर्तन के माध्यम से नहीं।
  • विचारधारा के माध्यम से नहीं।
  • प्रोत्साहनों के माध्यम से।

अमेरिका क्या दे रहा है चीन को लालच

  • अमेरिकी सीईओ का विशाल प्रतिनिधिमंडल
  • विस्तारित बाजार पहुंच
  • टैरिफ में राहत
  • बोइंग के साथ सौदे
  • कृषि आयात
  • ऊर्जा स्थिरता
  • चीनी विकास की भविष्यवाणी

 

ब्रिक्स द्वारा चीन को दिए जा रहे प्रस्तावों से तुलना

  • ईरान को लेकर आंतरिक मतभेद
  • रूस द्वारा गुट को भू-राजनीतिक टकराव में घसीटना
  • संगठन के भीतर ही यूएई-ईरान के बीच तनाव
  • बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के लगातार डॉलर-विरोधी बयानबाजी
  • सीमित अल्पकालिक आर्थिक लाभ के साथ राजनीतिक बोझ
  • बीजिंग इस बात का हिसाब लगा रहा है।

क्या चीन के साथ अमेरिका अपना रहा G2 मॉडल

  • वहीं, अमेरिका अब चीन को महाशक्ति मानते हुए उसे जी2 मॉडल (G-2) मॉडल की ओर ले जाना चाहता है, जहां दुनिया के हर बड़े फैसले अब अमेरिका और चीन मिलकर कर सकते हैं। कारोबार हो या सेमीकंडक्टर या तेल-गैस की सप्लाई-चेन, मुद्रा व्यवस्था और सुरक्षा सबके लिए यही जी-2 मॉडल काम करेगा। इसे अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री रहे हेनरी किसिंजर भी इस पर जोर देते थे।
  • हालांकि, चीन की रणनीति अमेरिका से कहीं ऊपर है। वह पूरी दुनिया में अमेरिका को हटाकर सबसे बड़ी महाशक्ति का खिताब हथियाना चाहता है। इसीलिए वह भी सधे कदम से दांव चल रहा है। उसने रेयर अर्थ और सेमीकंडक्टर की सप्लाई पर रोक लगाकर अमेरिका की कमर तोड़ दी है। दुनिया में रेयर अर्थ की सप्लाई के करीब 90 फीसदी हिस्से पर चीन का कब्जा है।

पुतिन भी जल्द आने वाले हैं चीन?

बीते अप्रैल में ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव चीन पहुंचे थे। उस वक्त न्यूज एजेंसी रायटर्स ने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के हवाले से बताया कि रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित चीन यात्रा से पहले चीन को ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है। एजेंसियों ने लावरोव के हवाले से कहा कि यह यात्रा वर्ष की पहली छमाही में होगी, जबकि वेदोमोस्ती समाचार पत्र ने सूत्रों के हवाले से कहा कि यह 18 मई से शुरू होने वाले सप्ताह के दौरान होगी। हालांकि, अभी तक इस यात्रा के बारे में पुष्टि नहीं की गई है।

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