भाजपा की रणनीति को कितनी धार देगी नितिन की नई टीम…………..

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश समेत अगले वर्ष विधानसभा चुनावों वाले राज्यों को जिस तरह प्रतिनिधित्व दिया गया है, उससे साफ है कि भाजपा ने संगठनात्मक पुनर्संरचना के बहाने आने वाले चुनावों की राजनीतिक बिसात भी बिछानी शुरू कर दी है। दरअसल, भाजपा की […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 19 अगस्त 2026, 04:22 AM 7 मिनट read
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भाजपा की रणनीति को कितनी धार देगी नितिन की नई टीम…………..
Photo: UB India News Archive

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश समेत अगले वर्ष विधानसभा चुनावों वाले राज्यों को जिस तरह प्रतिनिधित्व दिया गया है, उससे साफ है कि भाजपा ने संगठनात्मक पुनर्संरचना के बहाने आने वाले चुनावों की राजनीतिक बिसात भी बिछानी शुरू कर दी है।

दरअसल, भाजपा की राजनीति में संगठन कभी केवल संगठन नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने का सबसे प्रभावी जरिया रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति में राज्यों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक परिस्थितियों का संतुलन साधना स्वाभाविक रूप से व्यापक राजनीतिक संदेश देता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद नेपथ्य में चली गई पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े राम माधव की पार्टी में अहम संगठनात्मक भूमिकाओं में वापसी हुई।

इसके अलावा, छह महिलाओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, तीन को राष्ट्रीय सचिव और एक को राष्ट्रीय महासचिव बनाना दर्शाता है कि नए बदलाव में महिलाओं को प्रमुखता से शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरा असर डालता है। ऐसे में 2027 के चनाव से काफी पहले ही संगठन को चुनावी मोड में ले जाना पार्टी की रणनीतिक जरूरत भी है। नई टीम के गठन से पूर्व नितिन नवीन का प्रदेश के बीस सांसदों से विमर्श और टीम में दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश को मिला सर्वाधिक प्रतिनिधित्व इसी तैयारी का संकेत है।

एक ओर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के रूप में सार्वजनिक पहचान रखने वाले प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बनाए रखना, तो दूसरी ओर अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी कुंवर बासित अली को दिया जाना इस बात का संकेत है कि भाजपा उन सामाजिक समूहों के बीच अपना राजनीतिक आधार बढ़ाना चाहती है, जहां उसका प्रभाव पारंपरिक रूप से सीमित रहा है। इस नई टीम में भाजपा की आईटी टीम के प्रमुख अमित मालवीय का नाम शामिल नहीं है, तो इसकी वजह शायद कई अहम मौकों पर पार्टी का पक्ष ठीक ढंग से न रख पाने के आरोपों को भी माना जा सकता है।

नई सूची में पीयूष गोयल, जो पहले भी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे हैं, की फिर इसी पद पर वापसी के पीछे आने वाले दिनों में उनकी भूमिका में बदलाव के संकेत भी छिपे हो सकते हैं। नई टीम में वैसे तो संगठन के पुराने अनुभवी लोगों और युवा चेहरों का मिश्रण दिखता है, फिर भी नई टीम में महिलाओं और युवाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है। जाहिर है,  2027 के चुनावी रण के लिए भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। अब यह समय ही बताएगा कि नितिन नवीन की नई टीम भाजपा की रणनीति को कितनी धार दे पाती है।

योगी के साथ होगी जुगलबंदी?

भाजपा ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रभारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रभारी के तौर पर तावड़े की नियुक्ति के पीछे सिर्फ 2027 का विधानसभा चुनाव जीतना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि सीएम योगी के चेहरे के साथ तावड़े की चुनावी रणनीति के सहारे 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भी मजबूत जमीन तैयार करना है। इसलिए तावड़े की नियुक्ति को सिर्फ विधानसभा चुनाव तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के जरिए 2029 के लिए भी संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों मजबूत करना है।

राजनीतिक सफर और संगठनात्मक पृष्ठभूमि
विनोद तावड़े छात्र जीवन से ही वे आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और 1980 के दशक में पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। 1999 में वे मुंबई भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष बने और कई वर्षों तक महाराष्ट्र बीजेपी के महासचिव रहे। 2014 से 2019 के दौरान देवेंद्र फडणवीस सरकार में उन्होंने स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। वे 2011 से 2014 तक महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे। तावड़े भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रहे। इससे पहले बिहार, हरियाणा और केरल समेत कई राज्यों के भी प्रभारी रह चुके हैं।

तावड़े के सामने ये चुनौतियां भी होंगी

देश के सबसे अधिक विधानसभा क्षेत्र वाले यूपी के प्रभारी के तौर पर तावड़े के सामने कई चुनौतियां भी होंगी। राजनीतिक और रणनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य में पार्टी ने लगातार दो बार विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी की पकड़ ढीली नजर आई। ऐसे में भाजपा की पकड़ मजबूत करने के साथ ही तावड़े के सामने आगामी चुनावों में जीत की हैट्रिक सुनिश्चित करने और संगठनात्मक संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती होगी। साथ ही संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और अंदरूनी गुटबाजी को दूर कर सबको साथ लेकर चलने, बूथ स्तर पर कैडर को फिर से सक्रिय करने, जटिल सामाजिक-जातिगत समीकरणों को साधना बड़ी चुनौती होगी।

ढाई साल बाद यूपी भाजपा को मिला नया प्रभारी

UP: BJP's new in-charge has the responsibility of winning the Lok Sabha elections along with the Assembly elec
विनोद तावड़े

 यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने अब तेजी से सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रभारी और राष्ट्रीय मंत्री जगदीश ईश्वर भाई पटेल को सह प्रभारी बनाया है। तावड़े महाराष्ट्र और जगदीश भाई गुजरात से हैं।

राष्ट्रीय संगठन के गठन के एक दिन बाद ही पार्टी ने मंगलवार को बिहार जैसे जातीय समीकरण के लिहाज से जटिल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी बनाकर संगठन और चुनावी प्रबंधन में सिद्धहस्त नेता पर दांव लगाया है। माना जा रहा है कि तावड़े की रणनीति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चेहरा आगे करके पार्टी आगामी चुनाव जीतकर हैट्रिक बनाने के साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए जमीन मजबूत करेगी।

विजयंत पांडा के हटने के बाद से यूपी में कोई स्थायी प्रभारी नहीं था। करीब ढाई साल बाद पार्टी ने तावड़े को नया प्रभारी बनाया है। हालांकि तावड़े अघोषित तौर पर यूपी में पार्टी का कामकाज देख रहे थे। यही वजह है कि पार्टी ने किसी नए चेहरे के बजाए तावड़े को ही यूपी की कमान सौंपी है। उन्हें यूपी का प्रभारी बनाने के पीछे भाजपा के चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पार्टी का मानना है कि 403 विधानसभा वाले इस प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए सिर्फ चुनावी रैलियां ही काफी नहीं हैं, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती, टिकट वितरण, जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने और सहयोगी दलों से समन्वय के साथ ही पार्टी के अंदरूनी अर्न्तकलह से निपटने जैसी कई ऐसी चुनौतियों से पार पाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में तावड़े के अनुभवों के देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें प्रभारी की जिम्मेदारी देकर यूपी जीतने का टास्क दिया है। तावड़े के लिए यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव एक बड़ी अग्निपरीक्षा होंगे। इस समय इस फैसले को अहम इसलिए बताया जा रहा है, क्योंकि विधानसभा सीट के लिहाज से यूपी काफी बड़ा राज्य है। 2027 के चुनावों के के बाद पार्टी के सामने 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए यूपी जीतना अहम है। इसलिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में तावड़े को अहम जिम्मेदारी दी गई है।

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