नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता बढ़ गई है. बाढ़ और अचानक बढ़े जलस्तर के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक और यात्री प्रभावित हुए हैं. नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बाद कई विदेशी यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई. इनमें कई भारतीय भी शामिल हैं. ऐसे में हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आपदा के 24 घंटे में अब तक कितने भारतीयों का रेस्क्यू कर लिया गया है और अभी कितने भारतीय यात्री लापता हैं. इन सवालों के जवाब एमईए की ओर से दिए गए हैं.
288 भारतीय लापता, 21 का हुआ रेस्क्यू
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना है. राहत और बचाव एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में तलाश अभियान चला रही हैं. इस बीच अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार 27 अगस्त को स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों तक पहुंचने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि दोपहर 1 बजे तक 21 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका था.
नेपाल में बाढ़ के कारण कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है. तेज बहाव और खराब मौसम के चलते प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी राहत टीमों के लिए चुनौती बना हुआ है. ऐसे में भारतीय नागरिकों की पहचान और उनकी लोकेशन का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं.
बंगाल और केरल के यात्री भी प्रभावित
रणधीर जायसवाल ने बताया कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिक सम्राट ट्रैवल के माध्यम से नेपाल की यात्रा पर गए थे. इसके अलावा केरल के 33 नागरिकों का एक समूह भी नेपाल में मौजूद था. सरकार इन दोनों समूहों के लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है.
विदेश मंत्रालय ने प्रभावित भारतीयों और उनके परिवारों के बीच संपर्क बनाए रखने पर भी जोर दिया है. यात्रियों की जानकारी जुटाकर उनकी वर्तमान स्थिति और लोकेशन का पता लगाने का प्रयास जारी है.
मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय भी फंसे
नेपाल की बाढ़ के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीयों को लेकर भी चिंता सामने आई है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, कई भारतीय यात्री फिलहाल चीन की तरफ फंसे हुए हैं. करीब 200 भारतीय नागरिकों ने मदद के लिए संपर्क किया है.
जायसवाल ने बताया कि चीन में स्थित भारतीय मिशन स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इन नागरिकों को सुरक्षित निकालने की दिशा में काम कर रहा है. यानी नेपाल के अलावा चीन के क्षेत्र में फंसे भारतीय यात्रियों की मदद के लिए भी भारत सरकार सक्रिय है.
ईशा फाउंडेशन के लोग भी प्रभावित
विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि ईशा फाउंडेशन से जुड़े कुछ लोग भी प्रभावित क्षेत्र में फंसे हुए हैं. सरकार उनकी स्थिति की जानकारी जुटाने और आवश्यक सहायता पहुंचाने के प्रयास कर रही है.
नेपाल और चीन दोनों जगहों पर अलग-अलग परिस्थितियों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालना फिलहाल प्राथमिकता बना हुआ है. सरकार स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय कर रही है.
परिवारों की बढ़ी चिंता
बड़ी संख्या में भारतीयों के लापता होने की सूचना के बाद उनके परिवारों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है. हालांकि 21 लोगों का रेस्क्यू होने से राहत की उम्मीद भी जगी है. अधिकारियों का कहना है कि बचाव अभियान लगातार जारी है और प्रभावित इलाकों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
फिलहाल सरकार का मुख्य फोकस लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और नेपाल तथा चीन में फंसे यात्रियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर है. अगले कुछ घंटे रेस्क्यू अभियान के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं.








