अंतरराष्ट्रीय विधि प्रणाली आज एक संक्रमण-कालीन व्यवस्था बनते जा रही है
प्रख्यात विधिवेत्ता थॉमस एर्स्किन हॉलैंड ने अंतरराष्ट्रीय विधि को ‘न्यायशास्त्र का तिरोधान बिंदु’ कहा था। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय विधि में न तो पूर्ण संप्रभु विधायिका है, न बाध्यकारी दंड-व्यवस्था और न ही ऐसा प्रवर्तन तंत्र, जो राज्यों को अनिवार्य रूप से नियमों के पालन के लिए विवश कर सके। इस दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय विधि, विधिशास्त्र […]