तमिलनाडु में बीजेपी के लिए बड़ी कामयाबी है AIADMK का साथ ……..

तमिलनाडु बीजेपी का AIADMK के साथ गठबंधन हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने चैन्नई में ऐलान किया कि तमिलनाडु के अगले विधानसभा चुनाव BJP और AIADMK मिलकर लड़ेंगे और एड्डपडी के. पलानीस्वामी सीएम के उम्मीदवार के रूप में पेश होंगे। चुनाव में गठबंधन की कमान AIADMK के हाथ में होगी। तमिलनाडु में बीजेपी के लिए […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
सोमवार, 14 अप्रैल 2025, 07:42 AM 2 मिनट read
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तमिलनाडु में बीजेपी के लिए बड़ी कामयाबी है AIADMK का साथ ……..
Photo: UB India News Archive

तमिलनाडु बीजेपी का AIADMK के साथ गठबंधन हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने चैन्नई में ऐलान किया कि तमिलनाडु के अगले विधानसभा चुनाव BJP और AIADMK मिलकर लड़ेंगे और एड्डपडी के. पलानीस्वामी सीएम के उम्मीदवार के रूप में पेश होंगे।  चुनाव में गठबंधन की कमान AIADMK के हाथ में होगी। तमिलनाडु में बीजेपी के लिए ये बड़ी कामयाबी है क्योंकि पिछले साल लोकसभा चुनाव में AIADMK और BJP के बीच गठबंधन नहीं हो पाया था। बीजेपी ने कुछ छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, वोट प्रतिशत तो बढ़ा था लेकिन  एक भी सीट नहीं मिली। दूसरी तरफ बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ने का खामियाजा AIADMK ने भी भुगता। लोकसभा चुनाव में AIADMK के सभी उम्मीदवार चुनाव हार गए।  इसलिए एक दूसरे के साथ की ज़रूरत दोनों पार्टियों को थी, लेकिन बात  तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष अन्नमलाई के नाम पर बात फंसी थी। लोकसभा चुनाव के दौरान अन्नामलाई ने AIADMK के नेताओं की आलोचना की थी, इसलिए AIADMK के नेताओं ने कहा था कि अन्नामलाई जब तक प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे, बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं होगा। इसीलिए बीजेपी ने तमिलनाडु में पार्टी अध्यक्ष बदल दिया। नयनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। तमिलनाडु में बीजेपी को समझ में आ गया कि अकेले अपने दम पर DMK का मुकाबला करना संभव नहीं है। अगर मुख्यमंत्री स्टालिन के कुशासन को मुद्दा बनाना है तो AIADMK की मदद के बिना काम नहीं चलेगा। स्टालिन ने जिस तरह से परिसीमन को मुद्दा बनाया और तमिलनाडु पर  हिंदी थोपे जाने का आरोप लगाया, उसने बीजेपी को डिफेंसिव कर दिया। स्टालिन की सरकार का सनातन विरोध रुख पीछे रह गया, तमिलनाडु की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप दब गए। इसीलिए बीजेपी को AIADMK का साथ लेना पड़ा लेकिन अब बड़ी चुनौती ये है कि AIADMK जिन अलग अलगधड़ों में बंटी हुई है, क्या उन्हें साथ लाया जा सकता है? अमित शाह इसी कोशिश में लगे हैं।

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