ट्रंप ने अब भारत को दी 500 प्रतिशत टैक्‍स की धमकी, क्या पुतिन से दोस्‍ती कर फंसा दिल्‍ली?

रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन इस साल भारत के दौरे पर आने वाले हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन भारत नहीं आए हैं। उनके खिलाफ आईसीसी का अरेस्‍ट वारंट भी जारी है। पुतिन के भारत आने से पहले ही भारत और रूस के रिश्‍तों को लेकर हलचल तेज हो गई है। एक […]

UB India News By UB India News Patna, Bihar
बुधवार, 9 जुलाई 2025, 08:12 AM 5 मिनट read
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ट्रंप ने अब भारत को दी 500 प्रतिशत टैक्‍स की धमकी, क्या पुतिन से दोस्‍ती कर फंसा दिल्‍ली?
Photo: UB India News Archive

रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन इस साल भारत के दौरे पर आने वाले हैं। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन भारत नहीं आए हैं। उनके खिलाफ आईसीसी का अरेस्‍ट वारंट भी जारी है। पुतिन के भारत आने से पहले ही भारत और रूस के रिश्‍तों को लेकर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ रूस ने भारत को सुखोई-57 स्‍टील्‍थ फाइटर जेट समेत कई हथियारों का ऑफर दिया है, वहीं अमेरिका में भी भारत के खिलाफ बड़े ऐक्‍शन की तैयारी तेज हो गई है। ट्रंप के करीबी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक विधेयक पेश किया है जिसमें भारत और चीन पर रूस का समर्थन करने के लिए 500 फीसदी टैक्‍स लगाने की बात कही गई है। इस व‍िधेयक को लेकर अब राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी भारत को रूसी तेल को लेकर धमकाने की कोशिश की है। ट्रंप ने कहा कि मैं इस 500 प्रतिशत टैरिफ पर पूरी गंभीरता के साथ विचार कर रहा हूं। यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस अब चीन का जूनियर पार्टनर बन चुका है। इसके बाद भी भारत रूस के साथ अपने रिश्‍ते को कम करने की स्थित में नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी हथियारों को लेकर रूस पर निर्भरता है। आइए समझते हैं पूरा मामला…

अमेरिका में 500 प्रतिशत का टैक्‍स लगाने के प्रस्‍ताव से भारत के लिए राजनयिक रूप से असहज स्थिति पैदा हो गई है। लिंडसे ग्राहम चाहते हैं कि अमेरिका भारत और चीन से होने वाले सामानों के आयात पर 500 फीसदी का टैक्‍स लगाए। ग्राहम टैरिफ को भारत और चीन के खिलाफ हथियार के रूप में इस्‍तेमाल करना चाहते हैं ताकि उन्‍हें रूस से दूर किया जा सके। ग्राहम का दावा है कि उन्‍हें राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और 84 अन्‍य लोगों का समर्थन हासिल है। अगर यह व‍िधेयक पारित होता है तो इससे अमेरिका और भारत के बीच रिश्‍ते एक बार फिर से तनावपूर्ण हो जाएंगे। व‍िशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह बिल फेल भी होता है तो भी जब पुतिन भारत आएंगे तो इसकी चर्चा फिर से तेज हो जाएगी।

इस पूरे मुद्दे पर एक्‍सपर्ट बंटे हुए हैं। रूस समर्थकों का कहना है कि भारत और रूस के बीच दोस्‍ती की जड़ इतिहास में है और यह समय के साथ खरी साबित हुई है। सोवियत जमाने में 1971 के भारत और पाकिस्‍तान युद्ध के दौरान सोवियत संघ ने अमेरिका के खिलाफ भारत के समर्थन में अपनी नौसेना भेज दी थी। इससे रूस के प्रति आज भी भारत में बहुत अच्‍छी छवि है। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने जब भारत को आधुनिक हथियार नहीं दिए थे तब सोवियत संघ ने उन्‍हें मदद भेजी थी। वहीं अमेरिका पाकिस्‍तान की मदद कर रहा था। सोवियत संघ ने भारत के समर्थन में सुरक्षा परिषद में कश्‍मीर पर आए प्रस्‍ताव पर वीटो भी किया था।

रूस समर्थकों का कहना है कि नई दिल्‍ली और मास्‍को स्‍वाभाविक दोस्‍त हैं और भारत की रणनीतिक स्‍वायत्‍ता बनाए रखने के लिए पुतिन से दोस्‍ती जरूरी है। इसके अलावा अगर भारत भी रूस से मुंह मोड़ता है तो मास्‍को पूरी तरह से चीन के खेमे में चला जाएगा। चीन पर निर्भर रूस भारत के लिए और भी ज्‍यादा चुनौती बढ़ाएगा। वहीं रूस के विरोधियों का कहना है कि भारत को रूस के साथ रिश्‍ते में अब व्‍यवहारिकता देखनी चाहिए। उनका कहना है कि आधुनिक रूस पुराना सोवियत संघ नहीं है। उन्‍होंने कहा कि यूक्रेन पर रूस ने हमला किया था जो अंतरराष्‍ट्रीय कानून का उल्‍लंघन है। ऐसे में भारत को रूस की मदद नहीं करना चाहिए।

रूस विरोधियों का कहना है कि मास्‍को अब बीजिंग पर बुरी तरह से निर्भर हो गया है जो भारत के सुरक्षा हितों को खतरा पैदा कर रहा है। रूस की ताकत घट रही है और भारत की चीन के खिलाफ कोई मदद नहीं कर पाएगा। वहीं तटस्‍थ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत भले ही रूस के साथ रिश्‍ते को अभी कम नहीं कर सकता है लेकिन उसे संतुलित रिश्‍ते बनाना चाहिए। इसके अलावा भारत को 4 कदम उठाना चाहिए। पहला- अमेरिका को चीन के खतरे के प्रति आगाह करना चाहिए और दोस्‍ती बढ़ानी चाहिए। दूसरा- भारत को रूस पर से हथियारों की निर्भरता को कम करके इसे संतुलित करना चाहिए जिससे मास्‍को भी संतुष्‍ट हो। भारत को चीन से बातचीत करते रहना चाहिए ताकि वह रूस के निर्भरता का इस्‍तेमाल नहीं कर पाए। चौथा- भारत को रूस से कहना चाहिए कि वह अपने दरवाजे बंद नहीं करे। भारत को भी साथ काम करने के लिए सहूल‍ियत दे।

 

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